दलितस्त्रीवाद

आदिवासी लेखिकाओं ने की आदिवासी महिलाओं के खिलाफ लेखन की निंदा लेकिन लेखन पर...

देश की वरिष्ठ और युवा आदिवासी महिलाओं ने एक स्वर से हांसदा सौभेन्द्र शेखर के लेखन की भर्त्सना की है जिसमें उसने आदिवासी स्त्रियों...

समानित हुई ‘ महिषासुर की बेटी’ ( राष्ट्रपति ने दिया ‘नारी शक्ति सम्मान’)

संजीव चंदन महिला दिवस, 8 मार्च 2016 को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने बिहार के नवादा जिले की डा. सौरभ सुमन को जब ‘ नारी शक्ति’...

दलित छात्रा ने की आत्महत्या मोदी सरकार के फैसले को कोर्ट में उसने दी...

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में बहस करने वाली तमिलनाडु के अरियालुर जिले की दलित लड़की अनीथा  ने...

ब्राह्मण होने का दंश: कथित पवित्रता की मकड़जाल

शिक्षकों के साथ एससीईआरटी मे विभिन्न प्रशिक्षणों के दौरान काम करते हुए कई बार जाती पूछी गई दक्षिण भारत मे (आंध्र प्रदेश) उस समुदाय या उस क्षेत्र विशेष के लोग ही आपको चिन्हित कर पाते हैं| मैं छत्तीसगढ़ मे रहती हूँ तो जब तक मैं स्वयम से होकर लोगो को अपनी जाति नहीं बताती तब तक पता नही होता| मेरे नाम में मैंने अपना उपनाम कभी नही लिखा संयोग से विद्यालय मे भी मेरा केवल नाम ही रह गया उपनाम किसी तरह से छूट गया|

समकालीन नारीवाद और दलित स्त्री का प्रश्न

समकालीन नारीवाद और दलित स्त्री का प्रश्न: अनिता भारती के भाषण का वीडियो देखें

सावित्रीबाई फुले : शैक्षिक –सामाजिक क्रान्ति की अगुआ

आज भारत की आद्यशिक्षिका सावित्री बाई फुले का जन्मदिन है. आज के इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए ....

माई साहब (सविता अम्बेडकर) पीठ की स्थापना

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय माई साहेब यानी सविता अम्बेडकर के नाम पर एक पीठ की स्थापना करने जा रहा है। ऐसा खुलासा पहली...

रजनी तिलक का स्त्री चिंतन : जाति, जेंडर, पितृसत्ता और यौनिकता के प्रश्न

स्त्री के पास अत्याचारों के अनुभवों का एक भण्डार होता है जिसकी चाभी शायद ही कभी किसी के पुरुष के हाथ लगती होगी. स्त्री के प्रति बहुत सदाशयी पुरुष भी अनुकूल समय देखकर पाला बदल देता है. रजनी ऐसे सदाशयी पुरुषों से भी सवाल करती हैं. ये सवाल करने की ताकत उन्हें जीवन में मिले अनुभवों और उनकी आंच में तपकर बाहर निकलने से आई है. स्त्री की नज़र और उसका मन हर भाव को बहुत सटीक तौलता है.

इकाई नही मैं करोड़ो पदचाप हूँ मैं: रजनी तिलक की काव्य-चेतना

अनिता भारती  रजनी तिलक  होतीं तो आगामी 27 मई को 60वां सालगिरह मना रही होतीं. पिछले 30 मार्च 2018 को उनका परिनिर्वाण हो गया. प्रथमतः सामाजिक...

महावारी से क्यों होती है परेशानी

आरती रानी प्रजापति  महावारी हर स्त्री के 10-14 की आयु में शुरू होने वाला नियमित चक्र है| जिसमें स्त्री की योनि से रक्त का स्त्राव...
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लोकप्रिय

रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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