मीडिया में स्त्री उपभोक्ता और उपभोग

सुभाष कुमार गौतम भूमंडलीकरण के बाद स्त्री आर्थिक रूप से सम्पन्न हुई है। बाज़ार ने उसके लिए अनेक अवसर उपलब्ध कराए हैं। आज स्त्री हर...

पितृसत्ता और जातिगत व्यवस्था के पिंजड़े तोड़ती शकुंतिकाएं

पूजा मदान भारतीय पितृसत्तात्मक समाज में वर्षों से लड़की की परवरिश पराया धन मानकर ही होती आई है | बेटे की चाह रखते पुरुषप्रधान...

मेरे हमदम मेरे दोस्त ( दूसरी किस्त ) : रजनी दिसोदिया

रजनी दिसोदिया कहानी कार मुकेश मानस की कहानियों को पढ़ने के बाद स्त्री के पक्ष में स्थितियाँ चाहे बहुत बेहतर न हों पर यह उनकी...

मेरे हमदम मेरे दोस्त ( पहली किस्त ) : रजनी दिसोदिया

रजनी दिसोदिया  दलित पुरुष के लेखन में स्त्री इस मुद्दे पर दलित स्त्री विमर्श प्राय: उत्तेजित और आवेशमयी मुद्रा में रहता आया है। वास्तव में यह...

अभिशप्त जीवन की व्यथा-कथा  

उमा मीना  स्त्री-पुरुष दोनों ही जीवन का सृजन कर पीढ़ियों को आगे बढ़ाते हैं इसलिए सामाजिक संरचना में दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका  हैं l लेकिन...

बेटियों के हक का फैसला

दीप्ति शर्मा  बेटियों के अधिकार की बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जिसमे जन्म से ही बेटियाँ होंगी पिता की...

औरत को अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी

सृष्टि की रचना के आरम्भ में समाज के संचालन की जिम्मेदारी स्त्री-पुरूष दोनों को समान रूप से थी। उसे एक साथ मिलकर चलाने और...

सरोगेसी (विनियमन) विधेयक का बहिष्कारी चरित्र

सरोगेट स्‍त्री के गर्भ में इस संवर्धित भ्रूण को स्‍थापित करना तो इस पूरी प्रक्रिया का सबसे अंतिम चरण होता है। अत: सरोगेसी के विनियमन से पहले तो सरकार को प्रजनन सहायक प्रौद्योगिकी विधेयक (असिस्‍टेड रिप्रोडक्टिव टेक्‍नोलॉजी विधेयक) को पारित करवाना चाहिए था जो लंबे समय से ठंडे बस्‍ते में पड़ा हुआ है। इस विधेयक को कानून का रूप देना बहुत जरूरी है ताकि प्रजनन सहायक प्रौद्योगिकी से जुड़े अपराधों पर रोक लग सके।

ट्रोजन की औरतें’ एवं ‘स्त्री विलाप पर्व

‘द ट्रोजन विमेन’/ ‘ट्रोजन की औरतें’ नाटक यूरिपिडीज द्वारा 416 ईसापूर्व में लिखा गया था। यह नाटक यूनान की विजय तथा ट्रॉय की पराजय के कथ्य पर केन्द्रित है। किन्तु इसका मूल कथ्य विजय के पश्चात की घटनाओं से जुड़ा हुआ है। ‘ट्रोजन की औरतें’ युद्ध के पश्चात के उन्माद, पाशविकता, व्यभिचार, हिंसा पर आधारित है। यह नाटक मुख्य रूप से हैक्युबा के विलाप और उस बहाने महान यूनान की सभ्यता पर प्रश्न चिह्न लगाता है। ‘महाभारत’ के ‘स्त्री पर्व’ में विभिन्न प्रकार के ‘विलाप दृश्य’ रखे गए हैं। जैसे धृतराष्ट्र का विलाप, कौरववंश की युवतियों के सामूहिक विलाप। इसके अतिरिक्त विभिन्न अध्याय केवल विलाप की विभिन्न भंगिमाओं के निमित्त रचे गए हैं।

बीबीसी में जातिगत भेदभाव (आरोप)

"आप ही मीना हो?" "हां, क्यों क्या हुआ?" "नहीं कुछ नहीं, बस ऐसे ही." "आपने इस तरह अचानक पूछा..? आप बताइए न किसी ने कुछ कहा क्या?" "नहीं, नहीं कुछ ख़ास नहीं." (थोड़ी देर बात कर उन्हें विश्वास में लेने के बाद) "बताइए न मैं किसी को नहीं बताऊंगी." "मुझसे किसी ने कहा था कि अब तो आपके लोग भी हमारे साथ बैठ कर काम करेंगे." ----------------------- यह सुन मैं थोड़ी देर शांत बैठ गई. मैंने उनसे जब पूछा कि आपको ये किसने कहा तो उन्होंने बताने से मना कर दिया. बीबीसी में मेरी नौकरी करने के ऊपर की गई यह टिप्पणी किसने बताई, मैं उनका नाम जगजाहिर नहीं करना चाहती क्योंकि मैं नहीं चाहती मेरी वज़ह से किसी की नौकरी ख़तरे में पड़ जाए. लेकिन बताना चाहूंगी वो व्यक्ति दलित समुदाय से आते हैं और वे पत्रकार नहीं हैं. वो बीबीसी के दफ़्तर में एक साधारण कर्मी हैं.
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‘प्रसाद की रचनाओं में स्त्री स्वर की अभिव्यक्ति’

पूनम प्रसाद जयशंकर प्रसाद आधुनिक हिन्दी साहित्य के गौरान्वित व महान लेखक हैं।जिनके कृतित्व का गौरव अक्षुण है। उनकी प्रतिभा का निरूपण कविता, कहानी, नाटक,...
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