फूलमणि! कौन सुनेगा तुम्हारी दलील… अपील

अरविन्द जैन  फूलमणि नाम था उस लड़की का और उम्र थी सिर्फ दस साल। उम्र तो गुड्डों-गुड़ियों संग खेलने और स्कूल में पढने-लिखने की थी।...

मीडिया में स्त्री मुद्दे(स्त्री मुद्दों को जनांदोलन बनाए मीडिया)

प्रो. आशा शुक्ला कुलपति, डॉ. बी. आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, महू, इंदौर, म. प्र., भारत (यह व्याख्यान दिनांक 12 जून 2020 को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता...

मीडिया में स्त्री उपभोक्ता और उपभोग

सुभाष कुमार गौतम भूमंडलीकरण के बाद स्त्री आर्थिक रूप से सम्पन्न हुई है। बाज़ार ने उसके लिए अनेक अवसर उपलब्ध कराए हैं। आज स्त्री हर...

पितृसत्ता और जातिगत व्यवस्था के पिंजड़े तोड़ती शकुंतिकाएं

पूजा मदान भारतीय पितृसत्तात्मक समाज में वर्षों से लड़की की परवरिश पराया धन मानकर ही होती आई है | बेटे की चाह रखते पुरुषप्रधान...

मेरे हमदम मेरे दोस्त ( दूसरी किस्त ) : रजनी दिसोदिया

रजनी दिसोदिया कहानी कार मुकेश मानस की कहानियों को पढ़ने के बाद स्त्री के पक्ष में स्थितियाँ चाहे बहुत बेहतर न हों पर यह उनकी...

मेरे हमदम मेरे दोस्त ( पहली किस्त ) : रजनी दिसोदिया

रजनी दिसोदिया  दलित पुरुष के लेखन में स्त्री इस मुद्दे पर दलित स्त्री विमर्श प्राय: उत्तेजित और आवेशमयी मुद्रा में रहता आया है। वास्तव में यह...

अभिशप्त जीवन की व्यथा-कथा  

उमा मीना  स्त्री-पुरुष दोनों ही जीवन का सृजन कर पीढ़ियों को आगे बढ़ाते हैं इसलिए सामाजिक संरचना में दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका  हैं l लेकिन...

बेटियों के हक का फैसला

दीप्ति शर्मा  बेटियों के अधिकार की बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जिसमे जन्म से ही बेटियाँ होंगी पिता की...

औरत को अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी

सृष्टि की रचना के आरम्भ में समाज के संचालन की जिम्मेदारी स्त्री-पुरूष दोनों को समान रूप से थी। उसे एक साथ मिलकर चलाने और...

सरोगेसी (विनियमन) विधेयक का बहिष्कारी चरित्र

सरोगेट स्‍त्री के गर्भ में इस संवर्धित भ्रूण को स्‍थापित करना तो इस पूरी प्रक्रिया का सबसे अंतिम चरण होता है। अत: सरोगेसी के विनियमन से पहले तो सरकार को प्रजनन सहायक प्रौद्योगिकी विधेयक (असिस्‍टेड रिप्रोडक्टिव टेक्‍नोलॉजी विधेयक) को पारित करवाना चाहिए था जो लंबे समय से ठंडे बस्‍ते में पड़ा हुआ है। इस विधेयक को कानून का रूप देना बहुत जरूरी है ताकि प्रजनन सहायक प्रौद्योगिकी से जुड़े अपराधों पर रोक लग सके।
309FollowersFollow
691SubscribersSubscribe

लोकप्रिय

समकालीन स्त्री लेखन और मुक्ति का स्वरूप

रेनू दूग्गल भारतीय समाज में स्त्रियों की ऐतिहासिक स्थिति संतोषजनक नहीं रही यद्यपि वैदिक काल में स्त्रियों की सामाजिक स्थिति अत्यन्त उन्नत थी। इस काल...
Loading...