यौन शोषण के आरोपों से घिरी न्यायपालिका

अरविंद जैन स्त्री पर यौन हिंसा और न्यायालयों एवम समाज की पुरुषवादी दृष्टि पर ऐडवोकेट अरविंद जैन ने मह्त्वपूर्ण काम किये हैं. उनकी किताब...

नीतीश जी, आपकी पुलिस गालियाँ देती है और टार्चर करती है

राष्ट्रीय महिला आयोग सेपीडिता की शिकायत  बिहार के भागलपुर में अपने पैतृक संपत्ति के हक़ के लिए संघर्षरत महिला जब शिकायत करने पुलिस के पास गई...

‘दर्दजा‘: हव्वा को पता होता तो वह बेऔलाद रह जाती

प्रो. चन्द्रकला त्रिपाठी प्रोफेसर, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, बनारस. वरिष्ठ आलोचक. सम्पर्क : मो.9415618813 ‘दर्दजा’ पढ़ते हुए आप हर्फ ब हर्फ़ खुद को स्त्री पर हमलावर यातनाओं को...

क्या यौन शोषण , अंग तस्करी और ह्युमन ट्रैफिकिंग के सुरक्षित ठिकाने हैं शेल्टर...

सुशील मानव  देवरिया उत्तर प्रदेश के माँ विंध्यवासिनी शेल्टर होम से चल रहे सेक्स रैकेट और बच्चों की तस्करी के भयावह खुलासों के बाद प्रशासन...

बिहार के भागलपुर में बलात्कार की कोशिश : जेंडर और जाति के समुच्चय का...

 ( बिहार के भागलपुर में एक डाक्टर के द्वारा उसके मरीज पर बलात्कार की कोशिश के बाद स्थानीय जाति समीकरण खुला खेल के रूप...

कुलपति हंगलू भेजे गये छुट्टी पर, होगी जुडीशियल जांच, अश्लील चैट मामला

सुशील मानव  कुलपति के पद और प्रभाव के दुरुपयोग के आरोपी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रतनलाल हंगलू को छुट्टी पर भेजे जाने के साथ...

हर पुरुष अपनी चमड़ी के भीतर मर्द ही होता है

निवेदिता निवेदिता पेशे से पत्रकार हैं. सामाजिक सांस्कृतिक आंदोलनों में भी सक्रिय रहती हैं. हाल के दिनों में वाणी प्रकाशन से एक कविता संग्रह...

सृजन की ताक़त रखने वाली महिलाओं से दुनिया की संस्कृतियाँ क्यों डरती हैं !

राजीव सुमन रजस्वला होने की उम्र की महिलाओं के सबरीमाला मंदिर में के प्रवेश-निषिद्ध के संदर्भ...

वे लाइव पोर्न में प्रदर्शन के पूर्व ईश्वर को प्रणाम करती हैं !

स्वतंत्र मिश्र स्वतंत्र मिश्र पेशे से पत्रकार हैं ,स्त्रीकाल के प्रिंट एडिशन के सम्पादन मंडल के सदस्य भी हैं . इनसे उनके मोबाइल न 9953404777...

हिंसा में कोई मर्दानगी नहीं

नसीरुद्दीन रघुवीर सहाय की कविता ‘औरत की जिंदगी’ की कुछ पंक्तियां हैं- कई कोठरियां थीं कतार में/ उनमें किसी में एक औरत ले जाई गयी/...
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भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू

इस उपन्यास को लिखते हुए मनीषा को बार—बार यह डर सताता रहा कि कभी मैं मल्लिका के बहाने हरिचंद ज्यू का जीवन ही न दोहरा दूं। निश्चित रूप से इस उपन्यास का लेखन मनीषा कुलश्रेष्ठ के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन्होंने जिस तरह इस उपन्यास में संतुलन कायम किया है, वह पाठकों के लिए हैरानी की बात है। मल्लिका बालविधवा थी और काशी अपनी मुक्ति की खोज में आई थी। उसे क्या मालूम था कि बनारस में न केवल भारतेंदु से उसका परिचय होगा बल्कि उनके प्रेम में वह डूब जाएगी।
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