मुझे वेश्या बना दिया है : अटल बिहारी वाजपेयी को बलात्कार पीड़िता...

आज  हरियाणा  के पंचकुला  में सीबीआई  के  स्पेशल  कोर्ट  ने डेरा  सच्चा  सौदा  के  स्वयंभू  बाबा  को  15  साल  पुराने  बलात्कार  के  मुकदमे  का...

विसंगतिग्रस्त समाज और स्त्री

इति शरण युवा पत्रकार इति आईआईएमसी से रेडियो टीवी पत्रकारिता करने के बाद पटना में रिर्पोटींग कर रही हैं और जी न्यूज़ के...

क्यों मारी जा रही हैं दलित महिलायें

निवेदिता सूरज ने आसमान पर कब्जा जमा लिया था। घरों के उपर झुलसती हुई गरमी छा गयी थी। दिन भर के तेज और तपती हुई...

‘दर्दजा‘: हव्वा को पता होता तो वह बेऔलाद रह जाती

प्रो. चन्द्रकला त्रिपाठी प्रोफेसर, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, बनारस. वरिष्ठ आलोचक. सम्पर्क : मो.9415618813 ‘दर्दजा’ पढ़ते हुए आप हर्फ ब हर्फ़ खुद को स्त्री पर हमलावर यातनाओं को...

सिंदूर बना विमर्श : पक्ष-विपक्ष में रचनाकार, मैत्रेयी पुष्पा हुईं ट्रॉल

यह सप्ताह स्त्रीवादी विमर्श के खाते में रहा. जहां अमेरिका स्थित भारतीय वकील सारा राय ने विद्यार्थियों के यौन उत्पीड़क प्रोफेसरों की सूची जारी...

क्यों खबर ली स्मृति ईरानी ने ‘पहरेदार पिया की’: बंद हो सकता है प्रसारण...

सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने महिलाओं द्वारा चलाये गये ऑनलाइन कैम्पेन का संज्ञान लेते हुए ब्रॉडकास्टिंरग कंटेंट कप्लेंट्स काउंसिल (BCCC) को पत्र...

विज्ञान के क्षेत्र में लडकियां क्यों कम हैं ?

सुशील शर्मा  लड़कियों  भावनात्मक रूप से लड़कों की अपेक्षा ज्यादा मजबूत होती हैं ,किन्तु वे आधुनिक तकनीकी एवं विज्ञान के विषयों की अपेक्षा परम्परागत विषयों...

मर्दों के लिए घर आशियाना और औरतों के लिए जेलखाना है : अरविन्द जैन

( कल ही दिल्ली की एक अदालत ने यह व्यवस्था दी है कि पति के द्वारा जबरन संभोग बलात्कार नहीं है , और दो...

युवती की आत्महत्या की रिपोर्टिंग कर रहे दलित पत्रकार को ही पुलिस ने किया...

स्त्रीकाल डेस्क  महाराष्ट्र के अमरावती जिले के पत्रकार प्रशांत कांबले को मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने अभी हाल में किया था सम्मानित, लेकिन फडनवीस की पुलिस...

राजेन्द्र यादव की स्वीकरोक्ति और स्त्रीवादी प्रतिबद्धता के सवाल !

( राजेंद्र यादव की स्मृति में यह आलेख. इसे स्त्रीकाल के सम्पादक  संजीव चन्दन  ने 2012 में उनकी एक   स्वीकारोक्ति के मद्देनजर लिखा था....
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समकालीन स्त्री लेखन और मुक्ति का स्वरूप

रेनू दूग्गल भारतीय समाज में स्त्रियों की ऐतिहासिक स्थिति संतोषजनक नहीं रही यद्यपि वैदिक काल में स्त्रियों की सामाजिक स्थिति अत्यन्त उन्नत थी। इस काल...
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