बिहार की सावित्रीबाई फुले कुन्ती देवी की कहानी

इस किताब में कुन्ती देवी-केशव दयाल मेहता की पुत्री पुष्पा कुमारी मेहता ने अपने माता-पिता की जीवनचर्या के बहाने भारत के निर्माण की जटिल प्रक्रिया को अनायास तरीके से दर्ज किया है. यह एक ऐसी कहानी है, जो अपनी ओर से कुछ भी आरोपित नहीं करती

‘संघियों तुम बलात्कार से पैदा हुए हो’ : क्यों कहा था गौरी लंकेश ने

संघियों, यदि आपकी माँ ने ‘फ्री सेक्स’ यानी ‘अपनी स्वतंत्र इच्छा से सेक्स’ नहीं किया है तो उसके दो मायने हैं.  1. आप बलात्कार से...

‘दर्दजा‘: हव्वा को पता होता तो वह बेऔलाद रह जाती

प्रो. चन्द्रकला त्रिपाठी प्रोफेसर, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, बनारस. वरिष्ठ आलोचक. सम्पर्क : मो.9415618813 ‘दर्दजा’ पढ़ते हुए आप हर्फ ब हर्फ़ खुद को स्त्री पर हमलावर यातनाओं को...

जान बचाने की महिला साहित्यकार की गुहार: छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष को लिखा पत्र

सुशील मानव  इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति रतन लाल हंगलू का महिला साहित्यकार के साथ अश्लील चैट सार्वजनिक होने के बाद साहित्यकार को मिल रही हैं...

अपराधबोध और हीनभावना से रहित होना ही मेरी समझ में स्त्री की शुचिता है

राजेन्द्र राव  ( प्रज्ञा पांडे के अतिथि सम्पादन में हिन्दी की पत्रिका ' निकट ' ने स्त्री -शुचितावाद और विवाह की व्यवस्था पर एक परिचर्चा...

विमर्श की ज़रुरत कहाँ

स्त्री की दशा को लेकर कई सारे व्याख्यान आयोजित होते हैं लगातार बहसें चल रही हैं पर ये बहसें कहाँ चल रही इसको देखना...

महिलाओं के गाड़ी चलाने से सऊदी अरब का कस्टोडियन लॉ संकट में

तारा शंकर  कमला नेहरु कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर अध्यापन . संपर्क :tarashanker11@gmail.com पिछले दिनों सऊदी अरब में महिलाओं के गाड़ी चलाने पर लगी...

प्रेमरिक्‍त दैहिक सम्‍बन्‍ध निस्‍संदेह अनैतिक होते हैं : कात्यायनी

कात्यायनी कात्यायनी चर्चित कवयित्री एवमऐक्टिविस्ट हैं  . संपर्क : katyayani.lko@gmail.com  ( प्रज्ञा पांडे के अतिथि सम्पादन में हिन्दी की पत्रिका ' निकट ' ने...

क्यों स्त्रीविरोधी है अतिनाटकीय फिल्म ‘पिंक’ !

संजीव चंदन वो स्त्री को सिर्फ भोगना चाहते थे, उनका इरादा हत्या करना नहीं था। कितने फैसले बताऊं-गिनाऊं, सौम्या! सुन रही हो 'निर्भया' एंड सिस्टर्स!न्यायविद  अरविंद...

वेश्यावृत्ति का समुदायिकरण और उसका परंपरा बनना

राहुल  सेक्स वर्क (sex work) विशेषकर वेश्यावृत्ति (prostitution) समाज के यौनिक संगठन में ‘यौनिक आनंद’ की एक विशेषीकृत संस्था के बतौर मौजूद रहा है। वेश्यावृत्ति...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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