कौन काट रहा उनकी चोटियाँ: एक तथ्यपरक पड़ताल

रजनीतिलक  आजकल एक खबर ने पूरे देश में दहशत फैला दी है वह है रात के समय सोती हुई महिलाओं की उनके ही घर में...

रंगभेदी और स्त्री-विरोधी सोच

नवीन रमण  (फेसबुक पर सक्रिय नवीन रमण लागातार अपनी संवेदनशील टिपण्णी से  एक  हस्तक्षेप करते हैं . हरियाणा की खाप पंचायती मनोवृत्ति पर इनके असरकारी...

पुरुषों की तुलना में स्त्रियों का नैतिक विकास अधिक : अनामिका

हिन्दी साहित्य में स्त्रीलेखन के भीतर से बहुत कम रचनाकार हैं, जो खुद को स्त्रीवादी रचनाकार क्लेम करती हैं. अनामिका खुद को स्त्रीवादी रचनाकार...

बिहार के 14 संस्थानों में बच्चों का यौन शोषण: रिपोर्ट

रोहिण कुमार  कुछ महीने पहले बिहार सरकार की पहल पर टाटा इंस्टिट्युट ऑफ सोशल साइंसेस (टीआईएसएस या टिस) ने बिहार के बालगृहों का एक सोशल...

ज़िंदा जलती होलिका

  बाल गंगाधर‘बाग़ी’ शोधार्थी जे.एन.यू. नई दिल्ली संपर्क : 09718976402 Email. bagijnu@gmail.com अलग आस्वाद और बिंबों के साथ कवि बाल गंगाधर  बागी अपनी कविताओं के...

बस्तर- आईजी ने महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं को दी गाली

 बेला भाटिया के घर पर सोमवार को क़रीब 30 अज्ञात लोगों ने हमला कर उन्हें बस्तर छोड़ देने की धमकी दी थी. इसके बाद...

अश्लील बातचीत के आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ शिकायत लेने से पुलिस ने की थी...

स्त्रीकाल डेस्क गया कॉलेज गया, मगध विश्वविद्यालय, बिहार के अंग्रेजी विभाग के एक प्रोफेसर, वकार अहमद ने पीजी में पढ़ने वाली एक छात्रा को प्रोजेक्ट...

आदिवासी स्त्री जिसे मीडिया प्रस्तुत नहीं करती है

अंजली मीडिया से अलक्षित आदिवासी स्त्री-छवि और मीडिया द्वारा स्टीरिओटाइप का विश्लेषण कर रही हैं अंजली स्त्री को वैश्विक स्तर पर एक इकाई माना गया है...

लिखने बैठा अभिजीत भट्टाचार्य की कुंठा लिख बैठा सहारनपुर का जोश

संपादकीय  यह पहली बार नहीं है कि अभिजीत भट्टाचार्य ने अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की है, और न ही यह पहली बार है कि बॉलीवुड...

विमर्श से परे: स्त्री और पुरुष-आख़िरी क़िस्त

सुधा अरोड़ा सुधा अरोडा सुधा अरोडा सुप्रसिद्ध कथाकार और विचारक हैं. सम्पर्क : 1702 , सॉलिटेअर , डेल्फी के सामने , हीरानंदानी गार्डेन्स , पवई...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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