कैथलिक पादरी के खिलाफ आगे आये महिला संगठन: पादरी पर है नन के यौन...

स्त्रीकाल डेस्क  पिछले दिनों केरल के कई पादरियों पर ननों से यौन शोषण के आरोपों के बीच कई महिला संगठनों ने जालन्धर के बिशॉप फ्रांको...

राजेन्द्र यादव की स्वीकरोक्ति और स्त्रीवादी प्रतिबद्धता के सवाल !

( राजेंद्र यादव की स्मृति में यह आलेख. इसे स्त्रीकाल के सम्पादक  संजीव चन्दन  ने 2012 में उनकी एक   स्वीकारोक्ति के मद्देनजर लिखा था....

यौन उत्पीड़क प्रोफेसरों की जारी सूची पर छिड़ा विवाद: जेएनयू, डीयू सहित 33 बड़े...

अमेरिका स्थित एक स्त्रीवादी भारतीय वकील राया  सरकार ने उन शिक्षाविदों के नामों की सूची  अपने  फेसबुक पेज पर डाली है, जिनपर उनकी विद्यार्थियों...

कानूनी भेदभाव: बेड़ियाँ तोड़ती स्त्री (सी.बी.मुथम्मा)

उल्लेखनीय है कि अदालत में बहस के दौरान महाधिवक्ता सोली सोराबजी ने सरकार की तरफ से दलील दी थी कि महिलाओं द्वारा विवाह करने की स्थिति में, गोपनीय और महत्वपूर्ण सरकारी सूचनाओं और दस्तावेजों के लीक होने का खतरा या संभावना बढ़ सकती है। इस पर न्यायमूर्ति अय्यर ने पूछा था "क्या पुरुषों द्वारा शादी करने से यह खतरा या संभावना शून्य है?"

नंदलाला के लिए होली और गोपियों के लिए गाली : होली के बहाने स्त्रियों...

संजीव चंदन  सोचता हूँ स्त्रियों के यौन अंगों के बारे में पहली बार स्पष्ट रूप से कब सुना था या पढ़ा था . बचपन में...

मलाला की कहानी बी बी सी के जुबानी

पाकिस्तान  की स्वात घाटी में स्त्री शिक्षा की लड़ाई लड़ने वाली मलाला यूसुफ़जई को  को ९ अक्टूबर २०१२ को तालिबान ने गोली मार दी...

यौनिकता की विश्वसनीय दृश्यता: भाग 3

एल.जे. रूस्सुम/ अनुवाद डा अनुपमा गुप्ता (एल .जे .रुस्सुम का यह आलेख स्त्रीकाल के प्रिंट एडिशन के लिए भेजा गया था , जिसे हम स्त्रीकाल...

व्यावसायिक जोखिम का लैंगिक विमर्श

2010 में मैंने सुप्रीम कोर्ट में सूचना अधिकार के एक आवेदन किया था और टाल मटोल के बाद पता चला कि वहां यौन उत्पीडन...

सोजर्नर ट्रूथ: साहस और विवेक की मूर्ति

विजय शर्मा अनुवादक और आलोचक विजय शर्मा की पांचवी किताब 'अफ्रो-अमरीकन साहित्य : स्त्री स्वर' हाल में प्रकाशित हुई है . संपर्क :vijshain@gmail.com ....

धर्मांध होता संसार, डेरों में सिसकती जिंदगी!

कुमारी ज्योति गुप्ता कुमारी ज्योति गुप्ता भारत रत्न डा.अम्बेडकर विश्वविद्यालय ,दिल्ली में हिन्दी विभाग में शोधरत हैं सम्पर्क: jyotigupta1999@rediffmail.com ‘‘यादव टोली का किसून कहता है...
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समकालीन स्त्री लेखन और मुक्ति का स्वरूप

रेनू दूग्गल भारतीय समाज में स्त्रियों की ऐतिहासिक स्थिति संतोषजनक नहीं रही यद्यपि वैदिक काल में स्त्रियों की सामाजिक स्थिति अत्यन्त उन्नत थी। इस काल...
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