हिंदी भाषा में स्त्री-विमर्श

राजेन्द्र प्रसाद सिंह भाषाशास्त्री. हाशिये का विमर्शकार. ' हिन्दी साहित्य का सबाल्टर्न इतिहास'  सहित आधा दर्जन से अधिक किताबें प्रकाशित.  संपर्क : ईमेल: rpsingh.ssm65@yahoo.in मो. -...

प्रभा खेतान के साहित्य में स्त्री जीवन का संघर्ष

पंकज कुमार जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में शोधरत है. संपर्क:ssatyarthi39@gmail.com स्त्री विमर्श अपने आप में पुरुष द्वारा थोपी गई जाति के लैंगीकरण  की अमानवीय व्यवस्था के विरूद्ध...

देहसत्ता का रहस्य ( दूसरी क़िस्त)

प्रमीला केपी  प्राध्यापिका, श्रीशंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, कालडी, केरल प्रोफेसर . संपर्क :prameelakp2011@gmail.com पढ़ें पहली क़िस्त : देहसत्ता का रहस्य (पहली क़िस्त) देहलेखन के महत्व को स्त्रीवादियों  ने काफी पहले...

समकालीन हिंदी आलोचना का स्त्री स्वर

कर्मानन्द आर्य कर्मानन्द आर्य मह्त्वपूर्ण युवा कवि हैं. बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय में हिन्दी पढाते हैं. संपर्क : 8092330929 इक्कीसवीं सदी संक्रमण के दौर से गुजर...

कांशीराम से मायावती तक: दलित राजनीति और दलित स्त्री-प्रश्न

प्रियंका सोनकर  प्रियंका सोनकर  असिस्टेन्ट प्रोफेसर दौलत राम कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय. priyankasonkar@yahoo.co.in दलित राजनीति में महिलाओं की संख्या कम है । दलित राजनीति में कुल मिलाकर...

यौनिकता की विश्वसनीय दृश्यता -भाग 2

एल.जे. रूस्सुम/ अनुवाद : डा अनुपमा गुप्ता (एल .जे .रुस्सुम का यह आलेख स्त्रीकाल के प्रिंट एडिशन के लिए भेजा गया था , जिसे हम...

वैवाहिक बलात्कार और हिंसा: एक अध्ययन

राजलक्ष्मी एक पति अपनी पत्नी का बलात्कार कैसे कर सकता है? वैवाहिक बलात्कार की जब भी बात होती है तो यह सवाल...

स्त्रीसत्ता, लोकायत दर्शन और क्रान्ति की गति

आशिष साहेबराव पडवळ स्त्री-वर्ग-जाति के मुद्दों पर काम करनेवाली मानव मुक्ति मिशन नामक संगठन के सोशल मीडिया का महाराष्ट्र प्रभारी. संपर्क: aanvikshiki.edit@gmail.com मो.8888577071 दर्शन काल का...

निराला की कविता में स्त्री मुक्ति का स्वर

नीरज कुमार निराला का ब्याह तेरह (13) बरस की उम्र के आस-पास हो गया था। तकरीबन सोलह (16) बरस की उम्र में उनका गौना हुआ।...

हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायन में महिला कलाकारों का योगदान

राकेश कलोत्तरा पी.एच.डी. शोधार्थी,संगीत विभाग,दिल्ली विश्वविद्यालय,दिल्ली . सम्पर्क:  rakeshkalotra21@gmail.comमो. 9717655412 भारतीय शास्त्रीय संगीत का इतिहास वैदिक काल से ही माना जाता है. मानव और संगीत का...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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