हिन्दी नवजागरण और स्त्री

अंजली पटेल ,गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोधरत है. Email : anjalipatelbindki@gmail.com नवजागरणएक कालवाची शब्द है, जहाँ इसकी पृष्ठभूमि विभिन्न आन्दोलनों से जुड़ती है तो वहीं स्त्री उत्थान की...

सामंती हवेलियों में दफ्न होती स्त्री

शिप्रा किरण सहायक प्राध्यापक, हिन्दी विभाग बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ. संपर्क:kiran.shipra@gmail.com साहित्य के फिल्मी रूपांतरण की कड़ी में यूँ तो कई फ़िल्में आईं हैं किन्तु कुछ ही...

मुस्लिम महिलाओं की निर्णय स्वतंत्रता: प्रतिरोध का एक स्वरूप

आरिफा खातून पी-एच.डी शोधार्थी,मानवविज्ञान विभाग.संपर्क: arifakhatoon08@gmail.com इस्लाम में विश्वास रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति मुसलमान कहलाता है और मुसलमानों को नियंत्रित या शासित करने वाली विधि को मुसलमान...

हिंदी भाषा में स्त्री-विमर्श

राजेन्द्र प्रसाद सिंह भाषाशास्त्री. हाशिये का विमर्शकार. ' हिन्दी साहित्य का सबाल्टर्न इतिहास'  सहित आधा दर्जन से अधिक किताबें प्रकाशित.  संपर्क : ईमेल: rpsingh.ssm65@yahoo.in मो. -...

हिंदी साहित्य में आदिवासी स्त्री का सवाल

अ‍जय कुमार यादव पीएच.डी. हिंदी (शोधरत ) जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय दिल्ली संपर्कःajjujnu@gmail.com जब आदिवासी समाज में स्त्रियों की बात होती है तो ऐसा माना जाता...

पुंसवादी आलोचना के खतरे और महादेवी वर्मा

सुधा सिंह आलोचक सुधा सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाती हैं.  ज्ञान का स्त्रीवादी पाठ , स्त्री अस्मिता साहित्य और विचारधारा, आदि कई किताबें...

यौनिकता की विश्वसनीय दृश्यता

एल.जे. रूस्सुम/ अनुवाद : डा अनुपमा गुप्ता (एल .जे .रुस्सुम का यह आलेख स्त्रीकाल के प्रिंट एडिशन के लिए भेजा गया था , जिसे हम...

हिन्दी साहित्य में अस्मितामूलक विमर्श विशेष संदर्भःस्त्री अस्मिता

अजय कुमार यादव अजय कुमार यादव, शोधर्थी , जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली . संपर्क :ajjujnu@gmail.com Mobile no.8882273975 पिछले कुछ दशकों में विचारधारा और चिन्तन की...

लोकआस्था और श्रमण परम्परा की अदम्य जिजीविषा का आख्यान

पूनम सिंह कथाकार , कवि और आलोचक पूनम सिंह की कहानी , कविता और आलोचाना की कई किताबें प्रकाशित हैं . सम्पर्क : मो॰ 9431281949 'सबलोग' के...

विज्ञान के क्षेत्र में लडकियां क्यों कम हैं ?

सुशील शर्मा  लड़कियों  भावनात्मक रूप से लड़कों की अपेक्षा ज्यादा मजबूत होती हैं ,किन्तु वे आधुनिक तकनीकी एवं विज्ञान के विषयों की अपेक्षा परम्परागत विषयों...
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कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।
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