स्त्री का समाज और समाज में स्त्री‘अकेली’

अल्पना मिश्र एसोसिएट प्रोफेसर, हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय संपर्क : alpana.mishra@yahoo.co.in  वरिष्ठ लेखिका मन्नू भंडारी के जन्मदिन पर विशेष  अलग -अलग समय की स्त्री रचनाकारों ने हमेशा...

रंडी, या रंडी से कम और हाँ, बीबी से भी बलात्कार हक़ नहीं

अखिलेश कुमार बी.एच.यु. से इतिहास में स्नातक कर रहे है संपर्क:akhileshfssbhu@gmail.com मैंने पहली बार जब 'ना' कहा तब मैं 8 बरस की थी, "अंकल नहीं .....

पेंटिंग में माँ को खोजते फ़िदा हुसेन

डा. शाहेद पाशा  मकबूल फ़िदा हुसेन ने अपनी कलाकृतियों में स्त्री को दर्शाते हुए न जाने कितने ही ऐसे चहरों को रंगा है, जिसकी दुनियाँ...

आचार्य श्रीराम शर्मा और स्त्री शिक्षा

आचार्यश्री का मानना था कि लड़कियों को केवल किताबी शिक्षा देने भर से काम नहीं चलेगा। बल्कि लड़कियों को स्वालम्बन की शिक्षा देनी होगी ताकि आधी आबादी अपने पैरों पर खड़ी हो सके। उनका सोचना था कि- ‘‘लड़कियों की शिक्षा के सम्बन्ध में कुछ नये सिरे से विचार करना पड़ेगा क्योंकि बच्चों की, घर गृहस्थी की जिम्मेदारी सँभालते हुए घर छोड़कर अन्यत्र कठिनाई में ही जा सकती हैं। उन्हें ऐसे ही उद्योग सीखने चाहिए, जिन्हें घर रहते हुए सहायक धन्धे के रूप में आसानी से सम्पन्न किया जा सके’’

आदिवासी स्त्री जिसे मीडिया प्रस्तुत नहीं करती है

अंजली मीडिया से अलक्षित आदिवासी स्त्री-छवि और मीडिया द्वारा स्टीरिओटाइप का विश्लेषण कर रही हैं अंजली स्त्री को वैश्विक स्तर पर एक इकाई माना गया है...

अरूणा शानबाग – आखिर कब तक???

ज्योति गुप्ता अरूणा शानबाग का निधन हमारी खोखली व्यवस्था पर कई सवाल उठाता है। यातना में बिताए उसके हर वो पल पूछ रहे हैं कि...

महिलाएँ-जाति, वर्ग या एक उत्पीड़ित लिंग

  इविलीन  रीड /अनुवाद-प्रोमिला प्रोमिला , असिस्टैंट प्रोफ़ेसर , हिन्दी विभाग ,अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, हैदराबाद के द्वारा अनूदित इविलीन रीड का आलेख '...

हिंदी साहित्य में आदिवासी स्त्री का सवाल

अ‍जय कुमार यादव पीएच.डी. हिंदी (शोधरत ) जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय दिल्ली संपर्कःajjujnu@gmail.com जब आदिवासी समाज में स्त्रियों की बात होती है तो ऐसा माना जाता...

स्त्री आत्मकथा – अस्मिता संघर्ष तथा आत्मनिर्भर स्त्री

कुमारी ज्योति गुप्ता कुमारी ज्योति गुप्ता भारत रत्न डा.अम्बेडकर विश्वविद्यालय ,दिल्ली में हिन्दी विभाग में शोधरत हैं सम्पर्क: jyotigupta1999@rediffmail.com संदर्भ-प्रभा खेतान और मैत्रेयी पुष्पा  हिंदी जगत...

पितृसत्तात्मक दृष्टिकोण और स्त्री की आजादी विशेष संदर्भ-मैत्रेयी की कहानी “पगला गयी है भागवती”

आदित्य कुमार गिरि शोधार्थी,कलकत्ता विश्वविद्यालय,ईमेल आईडी-adityakumargiri@gmail.com पुंसवादी समाज ने एक ऐसी व्यवस्था बनाई है जिसके तहत स्त्रियों को दूसरे दर्जे का प्राणी मान लिया...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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