आचार्य श्रीराम शर्मा और स्त्री शिक्षा

आचार्यश्री का मानना था कि लड़कियों को केवल किताबी शिक्षा देने भर से काम नहीं चलेगा। बल्कि लड़कियों को स्वालम्बन की शिक्षा देनी होगी ताकि आधी आबादी अपने पैरों पर खड़ी हो सके। उनका सोचना था कि- ‘‘लड़कियों की शिक्षा के सम्बन्ध में कुछ नये सिरे से विचार करना पड़ेगा क्योंकि बच्चों की, घर गृहस्थी की जिम्मेदारी सँभालते हुए घर छोड़कर अन्यत्र कठिनाई में ही जा सकती हैं। उन्हें ऐसे ही उद्योग सीखने चाहिए, जिन्हें घर रहते हुए सहायक धन्धे के रूप में आसानी से सम्पन्न किया जा सके’’

देहसत्ता का रहस्य ( दूसरी क़िस्त)

प्रमीला केपी  प्राध्यापिका, श्रीशंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, कालडी, केरल प्रोफेसर . संपर्क :prameelakp2011@gmail.com पढ़ें पहली क़िस्त : देहसत्ता का रहस्य (पहली क़िस्त) देहलेखन के महत्व को स्त्रीवादियों  ने काफी पहले...

‘अन्तरजातीय विवाह से ही सामाजिक विषमता खत्म होगी’

प्रियंका सोनकर  प्रियंका सोनकर  असिस्टेन्ट प्रोफेसर दौलत राम कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय. priyankasonkar@yahoo.co.in जब देश में जातिवादी हमले आम हो जायें, जब एक विचारशील मनुष्य भी अपने...

पोवाडा : वीर रस की मराठी कविता ( दलित परंपरा )

कुसुम त्रिपाठी स्त्रीवादी आलोचक.  एक दर्जन से अधिक किताबें प्रकाशित हैं , जिनमें ' औरत इतिहास रचा है तुमने','  स्त्री संघर्ष  के सौ वर्ष ' आदि चर्चित...

‘अर्थ स्वातंत्र्य ’ स्त्री मुक्ति की पूर्व शर्त

सुनीता आम्बेडकर विश्वविद्यालय,दिल्ली के हिन्दी विभाग में शोधरत , संपर्क : sunitas988 gmail.com भारतीय संस्कृति स्त्री  विरोधी  है और यहाँ स्त्री  की छवि परम्परागत मलबे...

वेश्यावृत्ति का समुदायिकरण और उसका परंपरा बनना

राहुल  सेक्स वर्क (sex work) विशेषकर वेश्यावृत्ति (prostitution) समाज के यौनिक संगठन में ‘यौनिक आनंद’ की एक विशेषीकृत संस्था के बतौर मौजूद रहा है। वेश्यावृत्ति...

स्त्री का समाज और समाज में स्त्री‘अकेली’

अल्पना मिश्र एसोसिएट प्रोफेसर, हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय संपर्क : alpana.mishra@yahoo.co.in  वरिष्ठ लेखिका मन्नू भंडारी के जन्मदिन पर विशेष  अलग -अलग समय की स्त्री रचनाकारों ने हमेशा...

हिन्दी नवजागरण और स्त्री

अंजली पटेल ,गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोधरत है. Email : anjalipatelbindki@gmail.com नवजागरणएक कालवाची शब्द है, जहाँ इसकी पृष्ठभूमि विभिन्न आन्दोलनों से जुड़ती है तो वहीं स्त्री उत्थान की...

रंडी, या रंडी से कम और हाँ, बीबी से भी बलात्कार हक़ नहीं

अखिलेश कुमार बी.एच.यु. से इतिहास में स्नातक कर रहे है संपर्क:akhileshfssbhu@gmail.com मैंने पहली बार जब 'ना' कहा तब मैं 8 बरस की थी, "अंकल नहीं .....

जाति पर डाका : हिंदी साहित्य में जातिविमर्श

नीरा परमार  कविता, कहानी और शोध -आलोचना के क्षेत्र में योगदान. एक कविता और कहानी संग्रह प्रकाशित . संपर्क : parmarn08@gmail.com पढें और समझें...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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