मंडल मसीहा को याद करते हुए

लेखक : प्रेमकुमार मणि 25 अगस्त उस विन्ध्येश्वरी प्रसाद मंडल का जन्मदिन है , जिनकी अध्यक्षता वाले आयोग के प्रस्तावित फलसफे को लेकर 1990 के...

भीड़ का वहशीपन : धर्मोन्माद या इंसानी बर्बरता ?

नूर ज़हीर  डायन के नाम पर, विच हंटिंग के नाम पर, सती के नाम पर, सम्मान के नाम पर महिलाएं पूरे ग्लोब पर मॉब लिंचिंग की...

साम्प्रदायिक हिंसा से अलग तासीर है मॉब लींचिंग की

इरफान इंजीनियऱ पिछले कुछ वर्षों में मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा व्यक्ति या व्यक्तियों को पीट-पीटकर मार डालना) की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई है,...

समकालीन हिन्दी-उर्दू कथा साहित्य में मुस्लिम स्त्रियाँ: संघर्ष और समाधान

डा. शगुफ़्ता नियाज़ समकालीन हिन्दी-उर्दू कथा साहित्य में मुस्लिम स्त्रियों के मुद्दों और उनकी छवि को लेकर शगुफ़्ता नियाज़ का एक पठनीय आलेख. हालांकि इस आलेख में...

छायावादी कविता में पितृसत्तात्मक अभिव्यक्ति

मनीष कुमार  भक्तिकाव्य के बाद छायावादी काव्य अपनी युगीन संवेदनशीलता में अद्वितीय है| दो विश्व-युद्धों के बीच के इस युग की यह अद्वितीयता महज़ कैशोर्य...

आदिवासी स्त्री जिसे मीडिया प्रस्तुत नहीं करती है

अंजली मीडिया से अलक्षित आदिवासी स्त्री-छवि और मीडिया द्वारा स्टीरिओटाइप का विश्लेषण कर रही हैं अंजली स्त्री को वैश्विक स्तर पर एक इकाई माना गया है...

देहसत्ता का रहस्य ( दूसरी क़िस्त)

प्रमीला केपी  प्राध्यापिका, श्रीशंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, कालडी, केरल प्रोफेसर . संपर्क :prameelakp2011@gmail.com पढ़ें पहली क़िस्त : देहसत्ता का रहस्य (पहली क़िस्त) देहलेखन के महत्व को स्त्रीवादियों  ने काफी पहले...

देहसत्ता का रहस्य (पहली क़िस्त)

प्रमीला केपी  प्राध्यापिका, श्रीशंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, कालडी, केरल प्रोफेसर . संपर्क :prameelakp2011@gmail.com पितृसत्ता और पुंसवाद की समस्त कारगुजारियों को देखने से यह समझना आसान है कि उनमें...

महिला पत्रकारों पर बढ़ रहे हमले, जेएनयू प्रदर्शन के दौरान भी पुलिस की बदसुलूकी

श्वेता यादव सामाजिक कार्यकर्ता, समसामयिक विषयों पर लिखती हैं. संपर्क :yasweta@gmail.com पिछले दिनों जेएनएयू प्रोटेस्ट के दौरान दिल्ली पुलिस ने न सिर्फ विद्यार्थियों...

मर्दोत्सव और स्त्रीविलाप बीच होलिका का लोकमिथ

सुशील मानव स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखन तथा एक्टिविज्म. सम्पर्क: susheel.manav@gmail.com फोन- 6393491351 अवध वह क्षेत्र है जहाँ से राम की कट्टर मर्यादा पुरुषोत्तम छवि के साथ साथ...
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भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू

इस उपन्यास को लिखते हुए मनीषा को बार—बार यह डर सताता रहा कि कभी मैं मल्लिका के बहाने हरिचंद ज्यू का जीवन ही न दोहरा दूं। निश्चित रूप से इस उपन्यास का लेखन मनीषा कुलश्रेष्ठ के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन्होंने जिस तरह इस उपन्यास में संतुलन कायम किया है, वह पाठकों के लिए हैरानी की बात है। मल्लिका बालविधवा थी और काशी अपनी मुक्ति की खोज में आई थी। उसे क्या मालूम था कि बनारस में न केवल भारतेंदु से उसका परिचय होगा बल्कि उनके प्रेम में वह डूब जाएगी।
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