इस्लाम में हराम परिवार-नियोजन: एक मिथक

हुस्न  तबस्सुम निंहां शोध-सारांश अब तक के समय में जहां भारत ने विभिन्न  क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की है वहीं कुछ समस्याएं आज भी जस की...

‘विजय संकेत’ के रूप में स्त्री शरीर

आकांक्षा  स्त्री अध्ययन के शोधार्थी । संपर्क : ई मेल-akanksha3105@gmail.com मनुष्य के विकास क्रम का इतिहास काफी परिवर्तनशील रहा है । आदिम युग से आगे बढ़ने पर...

‘राष्ट्रवादी’ इतिहासकार काशी प्रसाद जायसवाल: एक स्त्रीवादी अवलोकन

रतन लाल  एसोसिएट प्रोफेसर हिन्दू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, 'रोहित के बहाने' सहित 5 किताबें प्रकाशित.संपर्क : 9818426159 राष्ट्रवादी आंदोलन और राष्ट्रवादी इतिहास लेखन के दौर...

राष्ट्रीय आंदोलन में महिलायें और गांधीजी की भूमिका पर सवाल

कुसुम त्रिपाठी स्त्रीवादी आलोचक.  एक दर्जन से अधिक किताबें प्रकाशित हैं , जिनमें ' औरत इतिहास रचा है तुमने','  स्त्री संघर्ष  के सौ वर्ष ' आदि चर्चित...

भारतीय उपमहाद्वीप का स्त्री लेखन: स्त्री सशक्तीकरण की अनुगूंजें

रोहिणी अग्रवाल रोहिणी अग्रवाल स्त्रीवादी आलोचक हैं , महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर हैं . ई मेल- rohini1959@gmail.com ''स्त्री शून्य के समान पुरुष...

वेश्यावृत्ति का समुदायिकरण और उसका परंपरा बनना

राहुल  सेक्स वर्क (sex work) विशेषकर वेश्यावृत्ति (prostitution) समाज के यौनिक संगठन में ‘यौनिक आनंद’ की एक विशेषीकृत संस्था के बतौर मौजूद रहा है। वेश्यावृत्ति...

हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायन में महिला कलाकारों का योगदान

राकेश कलोत्तरा पी.एच.डी. शोधार्थी,संगीत विभाग,दिल्ली विश्वविद्यालय,दिल्ली . सम्पर्क:  rakeshkalotra21@gmail.comमो. 9717655412 भारतीय शास्त्रीय संगीत का इतिहास वैदिक काल से ही माना जाता है. मानव और संगीत का...

महिला सरपंच : संप्रभुता का सवाल (प्राथमिक डाटा के आधार पर महिला सरपंचों...

शंभु गुप्त / अस्मिता राजुरकर भूमिका : भारत गणराज्य के महाराष्ट्र राज्य में पंचायती राज्य विधेयक 1992 के तहत ग्रामपंचायतों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण...

‘विज्ञापनों में महिलाओं का प्रस्तुतीकरण:आर्थिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य’

उपासना गौतम पी-एच. डी शोधार्थी,महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय,वर्धा. सम्पर्क: sonpari2003@gmail.com प्रस्तावना लिंगाधारित व्यवस्था में खड़ी विभिन्न संस्थाओं  और उसके घटकों ने स्त्री अधीनस्थता का पूरा लाभ...

डॉ. अंबेडकर का स्त्रीवाद (एक विश्लेषणात्मक पुनरावलोकन )

अमोल निमसडकर शोधार्थी,टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, मुंबई . संपर्क : amolnimsadkar@gmail.com,मो.7028385569 स्त्री सशक्तिकरण के प्राचीन दस्तावेजों पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि  इसकी शुरुआत...
253FollowersFollow
628SubscribersSubscribe

लोकप्रिय

रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
Loading...