भारतीय संतों के हमेशा कुंडलिनी जागरण की तरह हमेशा सेक्स की समस्याओं में उलझे...

महिलाओं के मुद्दों पर लेनिन  क्लारा जे़टकिन आज से लगभग 100 साल पहले 1920 में मार्क्सवादी स्त्रीवादी क्लारा जेटकिन ने रूसी क्रांति के विराट नेता लेनिन...

लेनिन: कम्युनिस्ट नेतृत्व महिलाओं के आन्दोलन के सवाल पर निराशावादी, रुको और देखो वाला...

मजदूर दिवस पर विशेष  आज से लगभग 100 साल पहले 1920 में मार्क्सवादी स्त्रीवादी क्लारा जेटकिन ने रूसी क्रांति के विराट नेता लेनिन से यह...

विष्णु जी, ब्राहमणवाद से हमारी लड़ाई जारी रहेगी !

प्रमोद रंजन ( दलित -बहुजन संघर्षों और सपनों के लिए समर्पित पत्रिका का मासिक प्रिंट एडिशन बंद होने जा रहा है . जितना इस पत्रिका...

एक क्रांतिकारी की पत्नी का आत्मकथ्य

सरस्वती भट्ट  ( निजी जीवन में अराजक और स्वप्न तथा कर्म से क्रांतिकारी रहे सुरेश भट्ट बिहार आन्दोलन के भी एक प्रमुख नाम हैं ....
241FollowersFollow
522SubscribersSubscribe

लोकप्रिय

अम्बेडकर की प्रासंगिकता के समकालीन बयान

महितोश मंडल का कहना है कि विश्वविद्यालयों में दुनिया भर के तमाम चिन्तक पढ़ाए जाते हैं पर अम्बेडकर की सतत अनुपस्थिति और बहिष्करण की राजनीति के पीछे अम्बेडकर के प्रति ब्राह्मणवाद की घृणा है, और यह घृणा दुश्चिंता से उपजी है. दरअसल अम्बेडकर ने हिन्दू धर्म और ब्राह्मण सभ्यता के विरुद्ध कोई आधारहीन शोर-गुल नहीं किया है, बल्कि वे कानून के विद्यार्थी थे और बहुत ही तर्कपूर्ण व प्रासंगिक ढ़ंग से उन्होंने ब्राह्मणवाद की आलोचना प्रस्तुत की है. यदि युवा विद्यार्थी अम्बेडकर के आमूल परिवर्तनवादी विचारों को गंभीरता से पढ़ना शुरू करें, तो अकादमिक जगत से लेकर राजनीति, अर्थव्यवस्था, मीडिया, साहित्य, सिनेमा, और इत्यादि तक फैले राष्ट्र-व्यापी ब्राह्मणवादी साम्राज्य को भयंकर चुनौती मिलेगी.
Loading...
Bitnami