क्या महिला नेतृत्व की खोज की मुहीम में आप हमारे साथ शामिल होंगे?

आजादी के 70 साल बाद भी लोकसभा में आज तक महिलाओं की 12% भागीदारी ही संभव हो पाई है. विभिन्न राज्यों के विधान सभाओं...

अनिता भारती की किताब को ‘ सावित्री बाई फुले वैचारिकी सम्मान, 2016’ की घोषणा

स्त्रीवादी पत्रिका , ' स्त्रीकाल, स्त्री का समय और सच' के द्वारा वर्ष 2016 के लिए ' सावित्री बाई फुले वैचारिकी सम्मान'  लेखिका अनिता भारती...

यू पी एस सी में स्त्रीकाल

यू पी एस सी में 22 साल की छात्रा अव्वल  संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की 2015 की परीक्षा में दिल्ली की टीना डाबी ने...

समानित हुई ‘ महिषासुर की बेटी’ ( राष्ट्रपति ने दिया ‘नारी शक्ति सम्मान’)

संजीव चंदन महिला दिवस, 8 मार्च 2016 को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने बिहार के नवादा जिले की डा. सौरभ सुमन को जब ‘ नारी शक्ति’...

गूगल का डूडल इस्मत चुगताई के नाम

स्त्रीकाल डेस्क  उर्दू की मशहूर लेखिका इस्मत चुगताई की मंगलवार यानी 21 अगस्त को 107वीं जयंती है, इस मौके पर गूगल ने एक डूडल बनाकर...

सतपुड़ा की वादियों में सक्रिय आदिवासियों की ताई: प्रतिभाताई शिंदे

नीलेश  झाल्टे   महाराष्ट्र में आदिवासियों के बीच उनकी लड़ाई में शामिल प्रतिभाताई शिंदे से महिला-नेतृत्व सीरीज के तहत  परिचित करा रहे हैं  नीलेश  झाल्टे :  आदिवासी समाज...

सावित्रीबाई फुले वैच्रारिकी सम्मान के बाद लेखिका अनिता भारती का वक्तव्य

स्त्रीवादी पत्रिका स्त्रीकाल, स्त्री का समय और सच ने डा. आंबेडकर के नेतृत्व में नागपुर में 20 जुलाई 1942 को हुए महिला सम्मेलन के 75वें...

स्त्रीकाल देगा शर्मिला रेगे को ‘सावित्री बाई फुले वैचारिकी सम्मान ‘

३ जनवरी,  सावित्रीबाई फुले -जयन्ती की पूर्व सन्ध्या पर शर्मिला रेगे की किताब को सम्मान की घोषणा  स्त्रीवादी पत्रिका , ' स्त्रीकाल, स्त्री का समय...

महिला आरक्षण, स्त्रीवाद पर बातचीत और सावित्रीबाई फुले वैचारिकी सम्मान समारोह

1942 के 20 जुलाई को हुए नागपुर महिला सम्मलेन के 75 वें साल के अवसर पर 29 जुलाई को जेएनयू के 'ट्रिपल एस ऑडिटोरियम'...

इजाडोरा डंकन: नृत्य की महान साम्राज्ञी और स्त्री-स्वतंत्रता की प्रवक्ता!

ज्योति प्रसाद  शोधरत , जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय. सम्पर्क: jyotijprasad@gmail.com आज 29 अप्रैल है। आज ही के दिन अंतरराष्ट्रीय  नृत्य दिवस (इंटरनेशनल डांस डे) मनाया जाता...
246FollowersFollow
532SubscribersSubscribe

लोकप्रिय

भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू

इस उपन्यास को लिखते हुए मनीषा को बार—बार यह डर सताता रहा कि कभी मैं मल्लिका के बहाने हरिचंद ज्यू का जीवन ही न दोहरा दूं। निश्चित रूप से इस उपन्यास का लेखन मनीषा कुलश्रेष्ठ के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन्होंने जिस तरह इस उपन्यास में संतुलन कायम किया है, वह पाठकों के लिए हैरानी की बात है। मल्लिका बालविधवा थी और काशी अपनी मुक्ति की खोज में आई थी। उसे क्या मालूम था कि बनारस में न केवल भारतेंदु से उसका परिचय होगा बल्कि उनके प्रेम में वह डूब जाएगी।
Loading...