अपने ही घर में खतरों से घिरी बेटियां

अरविंद जैन स्त्री पर यौन हिंसा और न्यायालयों एवम समाज की पुरुषवादी दृष्टि पर ऐडवोकेट अरविंद जैन ने मह्त्वपूर्ण काम किये हैं. उनकी किताब...

‘‘अनाघ्रातम पुष्पम, असूर्यंपश्या से रमणेषु रम्भा तक’’

संध्या सिंह विभागाध्यक्ष ‘हिन्दी’ डी0ए0वी0पी0जी0 कालेज लखनऊ. संपर्क :sandhyasinghdr1@gmail.com इस लेख में कोशिश की गई है  स्त्रीलेखन के बहाने मानव सभ्यता के सबसे पुराने विवाद से साक्षात्कार...

है मुझको जमशेद तेरे जाम से भी काम…..!!

प्रो.परिमळा अंबेकर विभागाध्यक्ष , हिन्दी विभाग , गुलबर्गा वि वि, कर्नाटक में प्राध्यापिका और. परिमला आंबेकर मूलतः आलोचक हैं.  हिन्दी में कहानियाँ  अभी हाल से...

जेंडर की अवधारणा और अन्या से अनन्या

भावना मासीवाल भावना मासीवाल महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय में शोध छात्रा हैं संपर्क :bhawnasakura@gmail.com; जब महिलाओं ने अपनी सामाजिक भूमिका को लेकर सोचना-विचारना...

एक अंग्रेज़ी-भाषी बंगाली दलित महिला की कशमकश

दृशद्वती बार्गी   जाधवपुर विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में स्नात्कोत्तर. स्त्री अध्ययन केंद्र से एमफिल . संपर्क drishadwatibargi@gmail.com ( यह आलेख हर किसी को...

अपने ही पराभव का जश्न मनाती है स्त्रियाँ ! ( दुर्गा पूजा का...

नूतन मालवी <सत्यशोधक आन्दोलन की कार्यकर्ता, कई किताबें प्रकाशित, सत्यशोधक स्त्रीवाद नामक एक किताब प्रकाश्य.संपर्क : ई मेल- nootan.malvi@gmail.com नौ दिनों में दुर्गा की...

जाति पर डाका : हिंदी साहित्य में जातिविमर्श

नीरा परमार  कविता, कहानी और शोध -आलोचना के क्षेत्र में योगदान. एक कविता और कहानी संग्रह प्रकाशित . संपर्क : parmarn08@gmail.com पढें और समझें...

कृषि प्रधान देश में महिला खेतिहर की दैन्य वास्तविकता

मंजू शर्मा सोशल मीडिया में सक्रिय मंजू शर्मा साहित्य लेखन की ओर प्रवृत्त हैं .संपर्क : ई मेल- manjubksc@yahoo.co.in आंगन के, आंगन के बिरवा...

वासना नाजायज नहीं होती: लिपिस्टिक अंडर बुर्का बनाम बुर्के का सच

कुमारी ज्योति गुप्ता कुमारी ज्योति गुप्ता भारत रत्न डा.अम्बेडकर विश्वविद्यालय ,दिल्ली में हिन्दी विभाग में शोधरत हैं सम्पर्क: jyotigupta1999@rediffmail.com ‘लिपिस्टिक अंडर माय बुर्का’ स्त्री जीवन...

सावित्रीबाई फुले वैच्रारिकी सम्मान के बाद लेखिका अनिता भारती का वक्तव्य

स्त्रीवादी पत्रिका स्त्रीकाल, स्त्री का समय और सच ने डा. आंबेडकर के नेतृत्व में नागपुर में 20 जुलाई 1942 को हुए महिला सम्मेलन के 75वें...
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कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।