‘लिखो इसलिए’ व श्रीदेवी की अन्य कविताएं

भाषाकितना अच्छा होता कि तुम्हारा भी अस्तित्व होता श्रीदेवी छत्तीसगढ़ रायपुर में रहती हैं. पिछले एक...

हां उनकी नजर में जाति-घृणा थी, वे मेरे दोस्त थे, सहेलियां थीं

हिंदू ग्रंथों, टेलीविजन, सहित, समाज विज्ञान, सिनेमा ने अबतक आदिवासी को नकारात्मक तौर से पेश किया है. एंथ्रोपोलॉजी और सोशियोलॉजी के विद्वानों ने भी आदिवासियों का स्ट्रियोटाइप गढ़ने में बड़ा रोल अदा किया है.इसी स्टरियोटाइप से ग्रसित ही कर मेरे कॉलेज के दोस्तों ने मेरे साथ टिफिन खाना बंद कर दिया.

बिहार की सावित्रीबाई फुले कुन्ती देवी की कहानी

इस किताब में कुन्ती देवी-केशव दयाल मेहता की पुत्री पुष्पा कुमारी मेहता ने अपने माता-पिता की जीवनचर्या के बहाने भारत के निर्माण की जटिल प्रक्रिया को अनायास तरीके से दर्ज किया है. यह एक ऐसी कहानी है, जो अपनी ओर से कुछ भी आरोपित नहीं करती

वे सब ऊंची जाति की हिन्दू सहेलियां थीं: मेरे मुसलमान होने की पीड़ा

ऐसा मौका कई बार आया जब मेरी एक अन्य सहकर्मी (ब्राहमण) साथ खाना खाने से कतराती रहती थी, कभी खा भी लेती तो मेरे डब्बे से एक निवाला भी न चखती। ये सिलसिला लम्बा चलता रहा। कष्ट किसी को नही था इस बात से, सिवाय मेरे। वक्त गुज़रता गया। दिल की बात जुबान तक आने में ज्यादा वक्त नही लगा। एक दिन उसने कहा गुरूदेव कहते हैं, जैसा खाओगे अन्न वैसा होगा मन….। गायत्री परिवार के श्रीराम शर्मा की भक्ति के शब्द थे ये।

सांस्थानिक हत्या की सनातन परम्परा: शंबूक से लेकर डा.पायल तक

वहॉं से तो तथाकथित सभ्य समाज तक की यात्रा और भी कठिन, दुरुह रही होगी। मेडिकल कॉलेज में सामान्य कॉलेज की तरह आपके पास अपनी जाति को छुपाने का कोई रास्ता नहीं होता। यहॉं जातियॉं जग - ज़ाहिर होती हैं। और इलीट वर्ग के हाथों में जैसे हथियार आ जाता है। इनकी ज़ुबान फ़ोरसिप (सडसी/चिमटा) की तरह हो जाती हैं।

सोनिया गांधी, स्मृति ईरानी, प्रज्ञा ठाकुर सहित नई लोकसभा में रिकॉर्ड 78 महिला सांसद

ईरानी एक जायंट किलर के तौर पर सामने आयी हैं उन्होंने अमेठी में राहुल गांधी को हराकर एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की। संसद में प्रवेश करने वाले अन्य प्रमुख नाम तमिलनाडू से कनिमोझी करुणानिधि और भाजपा की रीता बहुगुणा हैं, जो उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद निर्वाचन क्षेत्र से जीती हैं।

पैतृक सम्पत्ति, कृषि भूमि और स्त्रियाँ

'कृषि भूमि' विवाद की पृष्ठभूमि यह है कि एक था लाजपत जिसकी मृत्यु के बाद, उसकी कृषि भूमि उसके दो पुत्रों नाथू और संतोख को मिली नाथू ने अपना हिस्सा एक बाहरी व्यक्ति को बेच दिया। संतोख ने मामला हमीरपुर अदालत में दायर कर कहा कि (उत्तराधिकार कानून[7] की धारा 22 के अनुसार) उसे इस मामले में प्राथमिकता पर संपत्ति लेने का अधिकार है।

मी लार्ड, यहाँ महिलाओं को न्याय नहीं न्याय का स्वांग मिलता है

फिलहाल, मुख्य न्यायाधीश को क्लीन चिट दिए जाने के फैसले के खिलाफ, आरोप लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट की पूर्व महिला कर्मचारी जल्द ही अदालत में अपील करेगी, मामला क्या रुख लेता है ये तो आनेवाला समय ही बताएगा लेकिन इतना तो स्पष्ट है कि इस मामले को जिस तरह से निपटाया गया है उससे कार्यस्थल पर यौन शोषण के खिलाफ महिलाओं की इंसाफ की लड़ाई कमजोर हुई है।

बेंगलुरू: धिक्कार है! लड़कियों की संख्या से आपत्ति है!!(लड़कियों के लिए हाई कट ऑफ़...

मतलब यदि लड़कों की संख्या अधिक है तो आपको कोई आपत्ति नहीं है लेकिन यदि लड़कियों की संख्या अधिक होने लगी तो आप परेशान हो गए। जैसा कि पूर्व में कहा कि कुलपति जैसा व्यक्ति यह बयान देता है कि ‘ज्यादा कट ऑफ़ नहीं होगा तो कॉलेज में सिर्फ़ लड़कियाँ होंगी’।

औरतें अपने दु:ख की विरासत किसको देंगी

माँ-बेटी के आपसी संवाद एक दूसरे के पूरक नजर आते हैं। जिन्दगी के सारे रंग खासकर स्त्री जीवन के सारे रंग हर्ष, ख़ुशी, उत्साह, दुःख, शोक, वियोग, अकेलापन आदि एक दूसरे से गूंथे हैं। “ऐ लड़की अँधेरा क्यों कर रखा है! बिजली पर कटौती! क्या सचमुच ऐसी नौबत आ गई है”
246FollowersFollow
644SubscribersSubscribe

लोकप्रिय

रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
Loading...