सुप्रीम कोर्ट ने कहा-दायें-बायें-केंद्र, हर जगह हो रहा बलात्कार: इस बीच यूपी के हरदोई...

सुशील मानव  मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश सरकार को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि देश भर में...

यौन स्वतंत्रता, कानून और नैतिकता (अरविन्द जैन)

वर्तमान भारतीय समाज का राजनीतिक नारा है 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ', मगर सामाजिक-सांस्कृतिक आकांक्षा है 'आदर्श बहू'।वैसे भारतीय शहरी मध्य वर्ग को 'बेटी नहीं...

सुप्रीम कोर्ट का दहेज़ संबंधी निर्णय यथार्थ की जमीन पर

अरविंद जैन पिछले दिनों अपने ही एक निर्णय को पलटते हुए सुप्रीमकोर्ट ने दहेज़ के मामलों में जो नयी व्यवस्था दी है, वह स्वागत योग्य...

बच्चियों से बलात्कार मामले में हाई कोर्ट मॉनिटरिंग को तैयार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का...

सुशील मानव  मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में बलात्कार के मामले में सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चौतरफा घिरते जा रहे हैं, विपक्ष के भाजपा सांसद...

एचएमटी-सोना धान की खोज करने वाले दलित किसान का परिनिर्वाण

स्त्रीकाल डेस्क  एक छोटे से प्लाट पर एचएमटी-सोना सहित धान की विविध किस्मों के आविष्कार कर्ता दलित किसान दादाजी रामजी खोबरागड़े ने महाराष्ट्र के शोधग्राम के...

महिला आरक्षण : मार्ग और मुश्किलें

संजीव चंदन दूसरे देशों की तुलना में भारतीय महिलायें कम से कम एक मामले में भाग्यशाली रहीं हैं और वह यह कि उन्हें आजादी के...

मेरा एक सपना है ! (मार्टिन लूथर किंग का उद्बोधन,1963)

 मार्टिन लूथर किंग, जूनियर  प्रस्तुति और अनुवाद : यादवेन्द्र    ‘मेरा एक सपना है’, 1963 में वाशिंगटन मार्टिन लूथर किंग, जूनियर द्वारा दिया गया प्रसिद्द भाषाण है, जो उन्होंने...

यौन हिंसा और न्याय की मर्दवादी भाषा : तीसरी किस्त

अरविंद जैन स्त्री पर यौन हिंसा और न्यायालयों एवम समाज की पुरुषवादी दृष्टि पर ऐडवोकेट अरविंद जैन ने मह्त्वपूर्ण काम किये हैं. उनकी किताब...

सखी का सखी को प्रेम पत्र: खुल गई बेडियां!

यशस्विनी पाण्डेय प्यारी सखी , वैसे तो आमतौर पर मै पत्र लिखते हुए कोई संबोधन नहीं देती, क्योंकि ये मेरा पत्र लिखने का अपना आइकॉन है....

मोदी के मंत्री भी महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में

केंद्र की सरकार में समाज कल्याण मंत्री (राज्य) राम दास अठावले अपने कई बयानों और विचारों में भाजपा-संघ के फायर-ब्रांड नेताओं से अलग विचार व्यक्त करते...
250FollowersFollow
644SubscribersSubscribe

लोकप्रिय

रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
Loading...