महिला सशक्तिकरण के लिए: ‘एक देश, एक कानून’

अरविंद जैन स्त्री पर यौन हिंसा और न्यायालयों एवम समाज की पुरुषवादी दृष्टि पर ऐडवोकेट अरविंद जैन ने महत्वपूर्ण काम किये हैं. उनकी किताब...

जांच और एसपी के ट्रांसफर से असंतुष्ट कोर्ट ने सीबीआई को लताड़ा: मुजफ्फरपुर शेल्टर...

स्त्रीकाल डेस्क मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम में बच्चियों से बलात्कार मामले में सीबीआई जांच की प्रगति से असंतुष्ट हाई कोर्ट ने आज सीबीआई को जमकर...

न्याय व्यवस्था में दहेज़ का नासूर

अरविंद जैन स्त्री पर यौन हिंसा और न्यायालयों एवम समाज की पुरुषवादी दृष्टि पर ऐडवोकेट अरविंद जैन ने मह्त्वपूर्ण काम किये हैं. उनकी किताब...

राजनीति का अपराधीकरण और अपराध का राजनीतिकरण

अरविंद जैन सुप्रीम कोर्ट के पाँच न्यायमूर्तियों (दीपक मिश्रा, नरीमन खानविलकर, धनन्जय चंद्रचूड, इंदु मल्होत्रा) की संविधान पीठ का निर्णय (25.9.2018) है कि अदालत उन...

हम चार दशक पीछे चले गए हैं :

आयडवा और पी यू सी एल की  अपील ( याद होगा कि महिला आंदोलनों की वजह से महिलाओं के खिलाफ उत्पीडन को लेकर क़ानून सख्त...

दाम्पत्य में ‘बलात्कार का लाइसेंस’ असंवैधानिक है

 अरविन्द जैन  ( भारत में नैतिकता और परिवार की पवित्रता और निजी दायरे की आड में विवाह के भीतर बलात्कार के खिलाफ कानून बनाने के...

एचएमटी-सोना धान की खोज करने वाले दलित किसान का परिनिर्वाण

स्त्रीकाल डेस्क  एक छोटे से प्लाट पर एचएमटी-सोना सहित धान की विविध किस्मों के आविष्कार कर्ता दलित किसान दादाजी रामजी खोबरागड़े ने महाराष्ट्र के शोधग्राम के...

न्यायपालिका में मौजूद जातिवादी मानसिकता – अरविंद जैन

प्रो. परिमला अंबेकर अध्यक्ष, हिन्दी विभाग गुलबर्गा विश्वविद्यालय, गुलबर्गा ‘भारतीय समाज में दो तरह की संस्कृतियां मौजूद रहीं हैं, ब्राह्मणवादी और लोक संस्कृति। पहली सतावाद और यथास्थितिवाद...

यौन हिंसा और न्याय की मर्दवादी भाषा : दूसरी किस्त

अरविंद जैन स्त्री पर यौन हिंसा और न्यायालयों एवम समाज की पुरुषवादी दृष्टि पर ऐडवोकेट अरविंद जैन ने मह्त्वपूर्ण काम किये हैं. उनकी किताब...

महिला मताधिकार पर बहस : सन्दर्भ बिहार विधान परिषद ( १९२१ , १९२५, १९२९...

डा मुसाफिर बैठा डा मुसाफिर बैठा कवि और सामाजिक -सांस्कृतिक विषयों के चिन्तक हैं . सम्प्रति बिहार विधान परिषद् में कार्यरत हैं. संपर्क : 09835045947,...
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कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।