धारा 304 IPC के बहाने एक चर्चा : एक विचार यह भी

प्रो.परिमळा अंबेकर प्रो.परिमळा अंबेकर हिन्दी विभाग , गुलबर्गा वि वि, कर्नाटक में प्राध्यापिका और विभागाध्यक्ष हैं . परिमला अम्बेकर मूलतः आलोचक हैं तथा कन्नड़ में हो...

यौन शोषण के आरोपों से घिरी न्यायपालिका

अरविंद जैन स्त्री पर यौन हिंसा और न्यायालयों एवम समाज की पुरुषवादी दृष्टि पर ऐडवोकेट अरविंद जैन ने मह्त्वपूर्ण काम किये हैं. उनकी किताब...

सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ आगे आये महिला संगठन

दहेज़ कानूनों के दुरुपयोग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के खिलाफ चारो ओर आक्रोश है . आज पटना में भी ८ महिला...

दहेज विरोधी कानून में सुधार की शुरुआत

कमलेश जैन कमलेश जैन सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता हैं , स्त्री मुद्दों और कानूनी मसलों पर विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में नियमित स्तम्भ लेखन करती...

न्याय व्यवस्था में दहेज़ का नासूर

अरविंद जैन स्त्री पर यौन हिंसा और न्यायालयों एवम समाज की पुरुषवादी दृष्टि पर ऐडवोकेट अरविंद जैन ने मह्त्वपूर्ण काम किये हैं. उनकी किताब...

हम चार दशक पीछे चले गए हैं :

आयडवा और पी यू सी एल की  अपील ( याद होगा कि महिला आंदोलनों की वजह से महिलाओं के खिलाफ उत्पीडन को लेकर क़ानून सख्त...

दाम्पत्य में ‘बलात्कार का लाइसेंस’ असंवैधानिक है

 अरविन्द जैन  ( भारत में नैतिकता और परिवार की पवित्रता और निजी दायरे की आड में विवाह के भीतर बलात्कार के खिलाफ कानून बनाने के...

मनुवादी न्याय का शीर्ष तंत्र

( भगाणा की दलित लड्कियों के साथ बलात्कार के खिलाफ साथियों ने आन्दोलन छेड ही रखा था कि 'योगगुरु' रामदेव ने दलित स्त्रियों के...

न्यायपालिका में मौजूद जातिवादी मानसिकता – अरविंद जैन

प्रो. परिमला अंबेकर अध्यक्ष, हिन्दी विभाग गुलबर्गा विश्वविद्यालय, गुलबर्गा ‘भारतीय समाज में दो तरह की संस्कृतियां मौजूद रहीं हैं, ब्राह्मणवादी और लोक संस्कृति। पहली सतावाद और यथास्थितिवाद...
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