दाम्पत्य में ‘बलात्कार का लाइसेंस’ असंवैधानिक है

 अरविन्द जैन  ( भारत में नैतिकता और परिवार की पवित्रता और निजी दायरे की आड में विवाह के भीतर बलात्कार के खिलाफ कानून बनाने के...

मनुवादी न्याय का शीर्ष तंत्र

( भगाणा की दलित लड्कियों के साथ बलात्कार के खिलाफ साथियों ने आन्दोलन छेड ही रखा था कि 'योगगुरु' रामदेव ने दलित स्त्रियों के...

न्यायपालिका में मौजूद जातिवादी मानसिकता – अरविंद जैन

प्रो. परिमला अंबेकर अध्यक्ष, हिन्दी विभाग गुलबर्गा विश्वविद्यालय, गुलबर्गा ‘भारतीय समाज में दो तरह की संस्कृतियां मौजूद रहीं हैं, ब्राह्मणवादी और लोक संस्कृति। पहली सतावाद और यथास्थितिवाद...
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भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू

इस उपन्यास को लिखते हुए मनीषा को बार—बार यह डर सताता रहा कि कभी मैं मल्लिका के बहाने हरिचंद ज्यू का जीवन ही न दोहरा दूं। निश्चित रूप से इस उपन्यास का लेखन मनीषा कुलश्रेष्ठ के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन्होंने जिस तरह इस उपन्यास में संतुलन कायम किया है, वह पाठकों के लिए हैरानी की बात है। मल्लिका बालविधवा थी और काशी अपनी मुक्ति की खोज में आई थी। उसे क्या मालूम था कि बनारस में न केवल भारतेंदु से उसका परिचय होगा बल्कि उनके प्रेम में वह डूब जाएगी।
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