अरे वे माँ नहीं, भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ) थीं !

स्त्रीकाल डेस्क 
भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट) लीला सेठ का कल निधन हो गया. वह 86 साल थीं और कल रात दिल का दौरा पड़ने से नोएडा स्थित निवास पर उनका निधन हो गया. उनके बेटे शांतुम के अनुसार ‘‘कल रात करीब दस बजकर 28 मिनट पर दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया.”
लखनऊ में वर्ष 1930 में जन्मी लीला सेठ भारत की पहली महिला थीं, जिन्होंने 1958 में लंदन बार की परीक्षा पास की थी. 1959 में उन्होंने कोलकाता  और पटना में कानूनी प्रक्टिस शुरू की और 19 साल बाद 1978 में दिल्ली हाई कोर्ट में पहली महिला न्यायाधीश बनीं. इसके 13 साल बाद हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं. 1995 मे उन्होने पुलिस हिरासत मे हुई राजन पिलाई की मौत की जांच के लिये बनाई एक सदस्यीय आयोग की ज़िम्मेदारी संभाली. 1998 से 2000 तक वे भारतीय विधि आयोग की सदस्य रही और हिन्दू उतराधिकार कानून में संशोधन कराया जिसके तहत संयुक्त परिवार मे बेटियों को बराबर का अधिकार प्रदान किया गया.2012 में निर्भया काण्ड के बाद बनी जस्टिस वर्मा कमिटी की वे सदस्य थीं.
लीला सेठ की आत्मकथा ‘आॅन बैलेंस’, हिन्दी अनुवाद ‘घर और अदालत’ बहुचर्चित आत्मकथाएं रही हैं. उन्होंने 2014 में प्रकाशित हुई किताब ‘टॉकिंग आॅफ जस्टिस: पीपुल्स राइट्स इन मॉडर्न इंडिया’ भी लिखी, जिसमें उन्होंने 50 साल से ज्यादा लंबे अपने कानूनी करियर में अपने सामने आए महत्वपूर्ण मुद्दों की बात की.2010 में उन्होंने एक किताब ‘वी द चिल्ड्रेन ऑफ़ इंडिया’ लिखी.
और हाँ, वे प्रसिद्द लेखक विक्रम सेठ की माँ थीं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here