सदन में हम दलित महिलाओं को लड़ाने का षड्यंत्र सफल नहीं होगा: भगवती देवी

बिहार में सर्वाधिक हाशिये पर जीने वाली दलित जाति,मुसहर, से आने वाली महिला राजनेता भगवती देवी ने मजदूरी से लेकर संसद तक का सफ़र किया था. बिहार विधानसभा में 20 जुलाई 2000 को दिया गया उनका यह भाषण समाज के स्तरीकरण को समझते हुए राजनीति में जाति के खेल को बहुत स्पष्ट तरीके से सामने रखता है. वे पढ़ी लिखी नहीं थीं लेकिन यह भाषण तत्कालीन राजनीति और समाज का आइना है. भारतीय राजनीति में प्रतिनिधित्व के महत्व को समझने के लिए यह भाषण जरूर पढ़ा जाना चाहिए. बहुत साफगोई से वे बिना भारी-भरकम शब्दावली के अनुकूलन को भी समझा जाती हैं.

सभापति महोदय, मैं अपने क्षेत्र के बारे में कुछ कहना चाहती हूं। बाराचट्टी फायरिंग रेंज के बारे में कहा जा रहा है-बाराचट्टी, इमामगंज, चतरा और पलामू का जो क्षेत्र है इसमें अधिकतर लोग हरिजन, आदिवासी, पिछड़े लोग हैं और कुछ माइनारिटी के लोग हैं। इन लोगों को अगर घर से निकाला जाता है तो मैं समझती हूं यह सरकार इनके लिए व्यवस्था नहीं कर सकती है, इतने लोगों को कहां बसायेगी? इतनी बड़ी आबादी है, इतनी बड़ी आबादी को कहां बसायेगी? प्रधानमंत्री ने कहा था कि खाली कराया जायेगा और फायरिंग रेंज बनेगा, मेरा कहना है कि तमाम गरीबों के साथ बहुत भारी जुल्म होगा, सोचते हैं कि वहां पर राष्ट्रीय जनता दल से सारे सदस्य हैं-इनको खत्म करने के लिए फायरिंग रेंज बन रहा है, इसलिए निवेदन है, सरकार से निवेदन करती हूं कि इस पर सरकार गंभीर रूप से निर्णय करे, विचार करे कि हम गरीबों को कहां रखेंगे, यहां अधिकतर गरीब, किसान और मजदूर हैं और आदिवासी हैं इसलिए मेरा निवेदन है।

दूसरी बात, जंगल की बात कही जा रही थी, नाम रखा गया है जंगल-राज, जंगली का राज, बार-बार ये लोग नारा लगाते हैं और मैं एक लाइन और कहना चाहती हूं कि जो गरीब मुख्यमंत्री हैं-कभी-कभी उनके बारे में लोग अपमानजनक बात भी बोलते रहते हैं, यह अशोभनीय है. कल मेरे साथ भी घटना घटी, इस पर मैं क्षोभ प्रकट करती हूं। जब सदन में हरिजन, आदिवासी महिला को मजाक के रूप में लिया जायेगा तो बाहर क्या होगा? मैं क्या आशा करती हूं? आसन से कहा जाता है कि भगवती जब बोलती जब बोलती हैं, तो भगवती नाचती है. क्या वे तबलची हैं?  भगवती जब नाचती है, बोलती है या नाचती है तब क्या वे तबला बजाने का काम करते हैं? भोला जी लायक नहीं है, उस कुर्सी के, लायक नहीं है, मैं मांग करती हूं कि दूसरे माननीय सदस्य को इस कुर्सी पर बैठाइये, वे इस कुर्सी के लायक नहीं हैं. इतना गंदा विचार का आदमी है, उस कुर्सी पर, इतना पवित्र कुर्सी पर बैठना नहीं चाहिए। मजाक किसी से भी कर देते हैं और इनका जिस तरह से गांव में रवैया है उसी तरह अगर सदन में लाना चाहते हैं तो मैं क्षोभ प्रकट करती हूं, दुःख प्रकट करना चाहती हूं., जिस वक्त इन्दिरा गांधी जी थीं, उस वक्त बोलते, जिस वक्त सदन के अन्य महिलाएं हैं-बोलेंगे तो इनकी बोलती बंद हो जायेगी। भगवती हरिजन है और निचले कतार की है इसलिए वे कल बोलकर चले गये, अगर हम कल आये हुए होते और ऐसा होता तो मैंने एक बार कहा था, सदन में अगर हम महिलाओं को लड़ाना चाहते हैं तो हम पीछे नहीं रह सकते हैं।

भगीरथी आदि शक्ति है, वह आप जान लें। महिला जो हैं पहले आदि शक्ति हैं। पहले मां हैं तब बेटा है। जब पृथ्वी पर आती है भगीरथी देवी-( भागीरथी देवी महादलित समुदाय से आने वाली विधायक रही हैं, ब्लाक में स्वीपर के काम करती थीं अपने शुरुआती दिनों में) यह आदि शक्ति के रूप में है और यह और बात है कि वह पहली बार आयी हैं सदन में और उनकी उतनी सूझ बूझ नहीं है इसलिए इन लोगों ने ललकारने का काम किया है कि उठो, बोलो मुख्यमंत्री के खिलाफ बोलो, भागवती देवी के खिलाफ बोलो। अगर समझती कि हम भी पीड़ित हैं. यह देखे कि क्या वह भागवती देवी की नाली को साफ करती है? क्या भागवती देवी के पैखाना को साफ करती है? झाडू देने जाती है किसका? वह जुल्मी लोगों के यहां झाडू देती है और वहां साफ करती है। भगवती देवी अपने मजदूरी करती है, अपने सफाई करती है लेकिन आज जो शोषण करता है उसके लिए भागीरथी देवी काम करती है और जो उनकी ही रोटी छीन लेता है उसके लिए काम करती है।

जूता पहन कर खटिया पर बैठ जाते हैं और ठीकेदारी किसके लिए होती है? ये सब काम के लिए हैं। बम पुलिस या उसको क्या कहते हैं, मैं नहीं जानती लेकिन सब काम अपना लिए हैं। पैखाना बगैरह की सफाई करने का सब ठीका इन लोगों ने ले रखी है। पहले कमाउ- शौचालय होता था लेकिन अब सुलभ शौचालय करके ठेका ले लिए हैं और यह सब काम इन लोगों ने पैसा कमाने के लिए ले लिया है। पहले हम लोग कहते थे चमैनियां माई करेगी, लेकिन अब वे ही करते हैं, कोई काम इनसे बाकी नहीं है। सारा काम करने के लिए उतरे हुए हैं फिर भी कहते हैं कि जरा उधर ही रहो, छुआ जायेंगे हम. लेकिन काम करते हैं वही नर्स का और डेगरिन का और सेविका का. लेकिन हम लोग इसका दुख नहीं मानते हैं लेकिन ये लोग जिस तरह का रवैया हम लोगों के साथ अख्तियार करते हैं  वही रवैया हम लोग अपनायेंगे तो उनकी नानी मर जायेगी, छट्ठी का दूध या आ जायेगा। मैं कहना चाहती हूं कि इस तरह से न करें और हम लोगों को अपमानित न करें क्योंकि आज क्रान्ति की बाढ़ है और उस क्रान्ति की बाढ़ में आपका पैर नहीं टिक सकता है। गरीबों की जुबान आप बंद नहीं कर सकते हैं। आप उनका अपमान करके कोई स्वार्थ नहीं साध सकते। क्या अगर कोई पागल बड़ा होगा तो उसकी छाती पर चढ़कर पार कर जायेगा। छट्ठी का दूध याद करा देगा। क्योंकि यह गरीबों की क्रान्ति की बाढ़ है और कोई उसको रोक नहीं सकता है। क्या भाषा का उपयोग करते हैं। क्या मजाक हम लोगों से करते हैं और इसी तरह से कोई गरीब इन लोगों के साथ पेश आयेगा तो कहेंगे कि नक्सलाइट है।

गरीबों को लेकर सदन में ये मजाक कर सकते हैं तो कभी अपनी लड़की के उठा लेगा गरीब तब क्या नतीजा होगा। लगता है कि भोला बाबू की उम्र 60-70 से कम नहीं होगी और इस उम्र में जब ये इस तरह की बात करते हैं तो मुझे गुस्सा आता है और आज हमको अपना मुस्सा उतारने दीजिये जिन्होंने अपमान किया है। जब पृथ्वी पर पाप का घड़ा भर जाता है तो भागवती जैसी काली को अवतार लेना पड़ता है या राबड़ी जी को अवतार लेकर उतरना होता है। इनकी गीदड़भभकी से हम लोग डरने वाले नहीं हैं कि लालू जी को जेल में बन्द करो। यह ईसामसीह का युग नहीं है, राम का युग नहीं है, राम को पाठ पढ़ाकर सीता को चुरा लिया था, वह युग नहीं है। ईसामसीह को कांटी ठोका गया लेकिन आज गरीब बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है। ये लालू जी पर इल्जाम लगाते हैं। ये लोग स्वयं जुल्म की बेदी चला रहे हैं। क्या तरीका है। ये गरीबों को देखना नहीं चाहते हैं। चाहे घर हो, बाहर हो-क्या युग है? कहेंगे कि नक्सलाइट है। आप बतलाइये नक्सलाइट बढ़ेगा नहीं? नक्सलाइट के घर से निकालियेगा उनकी बहू बेटी को और गरीबों के गांव पर उजाड़ियेगा तो वह नक्सलाइट बनेगा कि नहीं? कल तब इन्होंने आलोचना की है। डेली आलोचना कर रहे हैं। गरीबों के बारे मं बड़ी जल्दी से फैसला करते हैं और इस सदन से पास होकर कानून बन जाता है कि गरीब बाहर नहीं जाये काम करने यहीं कमायेगा, खायेगा। सुनिश्चित योजना जो है गरीबों के लिए है।

ठेकेदारी कौन करता है? ठेकेदार किनको कहते हैं? क्या राबड़ी जी का बेटा ठेकेदारी कराने जाते हैं? बिचैलिये का काम कौन करता है? किसका मोटर साइकिल पकड़ करके उड़ाया जाता है। कोई गरीब का राबड़ी जी का बेटा नहीं और जो बोलता है उसी का सारा बेटा ठीकेदार और बिचैलिये का काम करता है। अगर जांच हो तो मैं समझती हूं कि सुनिश्चित रोजगार योजना का जो पैसा है तो उसके बारे में लोग नाम गिनावे, सभापति जी, आप खुद इस पर जांच बैठाइये, कौन जेल जायेगा? गरीब का आप ठेका दिलवाते हैं और किसको ठीका मिलता है? भागवती देवी के बेटा के? पैसा लेकर कौन जायेगा? वही जो मोटर सायकिल और फटफटवा चला के जायेगा और तोरा 50 रुपया मिलेगा मजदूरी और यह 50 रुपया कौन ले गया? तो फटफटवा वाला पैसा लेगा और राबड़ी देवी गाली सुनेंगी और मजदूर के जो काम करते हैं अपने खाने के लिए कमाने के लिए तो वह ठेपा दें। ठीकेदारी अगर माल है तब ही तो चला रहे हैं और मस्ती मौज कर रहे हैं और जिस दिन गरीब मजदूर पढ़ेंगे-लिखेंगे तो उनका ठेपा देना बंद हो जायेगा और उस दिन इनका फटफटवा बंद हो जायेगा और मैं समझती हूं कि अधिकतम लोगों का बंद हो गया है। इसलिए आंख में धूल झोंकने का काम मत करें। कमाए लंगोटी वाला और खाए धोती वाला। यह कब तक चलेगा? एक पंडित जी पूजा कर रहे थे। उनको पढ़ने लिखने नहीं आता था। पूजा करा रहे थे-भाई कि करैथ, जै हम करैथी। एक बार राजा जी जांच में आ गए। पंडित जी पूजा करा रहे थे-भाई कि करैथ जे हम करैथी और जांच में यह बात पता चल गयी तो उनको हटा दिया गया इसलिए यह पूजा मत करिये और यह ठेपा और अनपढ़ वाली बात मत करिये-भाई के करैथ हमहु करैथी। आज भाई जाग चुका है। आज भाई जान चुका है।

एक तरफ पूरे बिहार में सारे नेता लोगों का 11-11 हेलीकाप्टर और राबड़ी जी को मात्र एक हेलीकाप्टर। सारा हेलीकाप्टर और नेता इनके पीछे लेकिन वोटर राबड़ी जी के पीछे। कितना भी अफसरों की अदला-बदली करते रहे चुनाव कौन जीता। चुनाव कमिश्नर को कहा गया कि बूथ लूट लिया। कहने में इनको लाज नहीं है लगता है। एक जहाजरानी विभाग के मंत्री हैं। क्या इस्तीफा देंगे? इतनी बड़ी घटना घटी है, कितना खराब है बिहार के लिए खराब जहाज है और अन्य जगहों के लिए अच्छा है। पुराना जहाज बिहार के लिए और नया जहाज अन्य जगहों के लिए है। 10 लाख रुपया मुआवजा देने की बात स्वीकारते हैं लेकिन इसी तरह की घटना बार-बार घटती रहे तब वे क्या करेंगे? मंत्री बने हैं। अनशन करने जा रहे थे कि हम अनशन करेंगे लालू जी सारा बूथ लूट लिए। लेकिन वोट किनका निकला? वोट शरद जी का निकला। क्यों नहीं इन्होंने रिजाइन किया। हम मांग करते हैं कि अगर शरद जी में आत्मीयता है तो वे इस्तीफा कर दें। लालू जी जीते होते तो वे कहते कि कोर्ट में जायेंगे। बाल ठाकरे से इनका भव-भवशुर का रिश्ता है। जिस मंदिर की बात करते हैं राम मंदिर वहां बनेगा।

बाल ठाकरे से भावहू-भैंसुर का रिश्ता है। जिस मन्दिर की बात करते हैं, राम का मन्दिर वहीं बनेगा, कहां बनेगा? उस दिन आप थे? आपकी मां का जन्म था, जो आपका ही मंदिर होगा। आपकी मां ही नहीं थी तो आप कहां थे? मन्दिर कहां बनेगा, कैसे बनेगा? जहां सीता थी, उस दिन वहां पानी पीने नहीं दिया, पटरानी नहीं बनीं। बाल ठाकरे जी, जरा इस पर तो सोचिये, उस दिन से अपहरण हो रहा है, यह भी कहते हैं, उनके ग्रंथ में लिखा हुआ है, ‘हम किसी से शादी कर सकते हैं, हमारी लड़की को कोई देख नहीं सकता है।’ बताइये-‘ढोल गंवार शूद्र, पशु, नारी, ये है तारण के अधिकारी।’

महोदय, ढोल, गंवार, शूद्र, पशु, नारी, यह हैं तारण के अधिकारी। इसी बात पर गरीब जब दो जूता लगा दे तो क्या होगा? तब तो मामला बिगड़ जाये, नक्सलाइट हो जाये।

महोदय, लिख-लिख कर सारे लोगों को इन लोगों ने गरियाया है। बाबा फुले को क्या हुआ? जितने, संत, महात्मा, भगवान सब गरीब के यहां जन्म लिये हैं। अमीर के यहां जन्म नहीं लिया है। बाबा फुले, सावित्री फुले को जिस तरह से आज लालू जी को तंग किया जा रहा है, उसी तरह से तंग किया गया। कबीर, रविदास को क्या हुआ? यही हुआ। गरीबों के यहां भगवान जन्म लेते हैं। पहले उसको तंग करते हैं फिर पूजा उसी की करते हैं। पहले तंग करेंगे और फिर तैयार हो जायेंगे पूजा करने के लिए कि भगवान हैं, ठाकुर जी हैं। ठाकुर जी को तंग नहीं किया है? द्रौपदी का भरी सभा में चीर-हरण हुआ-

‘दुख हरो, द्वारिकानाथ, शरण में तेरी,

बिना काज महाराज लाज गयी मेरी।’

इसी तरह से सभा में मुझे भी कल ऐसा ही लगा था। जैसा भोला सिंह ने बोला है, यह बात जब तक वापस नहीं लेंगे, तब तक मैं गलियाते रहूंगी, चाहे जितना हमको सहना पड़ेगा।

महोदय, इतना ही कह कर बैठती हूं।