महिला विधायक पुरुष विधायकों से विकास करने में 21 ही साबित होती हैं!

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यूं तो विकास की बागड़ोर पूरी दुनिया में पुरुषों के हाथों में हैं, लेकिन शोध बताते हैं की विकास के मामले में भी महिलाएं पुरुषों को काफी पीछे छोड़ दे रही हैं. और यह तो तब है जबकि राजनीति को पुरुषों का कार्यक्षेत्र समझा जाता है. महिलाओं के पास बहुत कम व सीमित राजनीति अनुभव के बावजूद भी वे इस क्षेत्र में पुरुषों को बड़ी चुनौती दे रही हैं.

हाल ही में यूनाईटेड नेशन यूनिवर्सिटी के ‘वर्ल्ड इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स रिसर्च’ की एक रिपोर्ट सामने आई है. 2018 में हुए इस शोध में सामने आया है भारत में महिला विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में पुरुष विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा आर्थिक विकास हुआ है. यह शोध महिला विधायकों को चुनने के आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण करने के लिए किया गया था. ताकि आर्थिक विकास पर एक नेता के लिंग के कारण पड़ने वाले प्रभावों की जांच की जा सके.

इस शोध में 1992 से 2012 के बीच के 4,265 राज्य विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया था. शोध में जिन चार विधानसभा चुनावों को लिया गया है, उस दौरान चुनाव जीतने वाली महिला विधायकों की संख्या लगभग साढ़े चार फीसदी से बढ़कर आठ फीसदी हो गई थी. इस अध्ययन में महिला और पुरुष विधायकों के कामों को भ्रष्टाचार, कार्यकुशलता, योजनाओं को लागू करना आदि बिन्दुओं के माध्यम से परखा गया है.

यूनाईटेड नेशन यूनिवर्सिटी के ‘वर्ल्ड इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स रिसर्च’ की एक रिपोर्ट में सामने आया था कि महिलाओं और पुरुषों के निर्वाचन क्षेत्रों के बीच विकास में एक चौथाई का अंतर है. नासा द्वारा ली गई तस्वीरों में पता चला था कि महिला विधानसभाओं में न सिर्फ बिजली का प्रसार पुरुष विधानसभाओं से ज्यादा हुआ है, बल्कि सड़क निर्माण में भी वे काफी आगे हैं. नासा की इन तस्वीरों यह भी सामने आया कि में महिला निर्वाचन क्षेत्रों में पुरुष निर्वाचन क्षेत्रों की अपेक्षा अधूरी सड़क परियोजनाओं की संख्या भी 22 फीसदी कम है.

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वे चार कारण जो महिला विधायकों को पुरुष विधायकों से बेहतर साबित करते हैं.

१- महिला विधायक अपराधों में कम लिप्त होती हैं. कुछ समय पहले केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 1765 सांसद और विधायक, कुल 3045 केसों में ट्रायल का सामना कर रहे हैं. यानी की कुल सांसदों और विधायकों के 36 प्रतिशत, किसी न किसी में अपराध के केस में फंसे हुए हैं. जाहिर है कि सामाजिक अपराधों में फंसना किसी के भी ऑफिस के कामकाज को नकारात्मक तरीके से प्रभावित करता है. अदालतों के चक्कर काटने में भी बहुत सारी ऊर्जा, पैसा और दिमाग लगता है.

बहुत बार खुद को दोषी साबित होने से बचाने के लिये गवाहों की खरीद-फरोख्त या फिर उन्हें ठिकाने लगाने तक की भी योजना बनाई जाती है. ये सारी चीजें पुरुष विधायकों का कामकाज नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं. जबकि महिला विधायक ऐसे केसों में न फंसी होने के कारण अपने क्षेत्र की जिम्मेदारियों पर और भी ज्यादा ध्यान केंद्रित कर पाती हैं.

२- महिला विधायक पुरुष विधायकों से कम भ्रष्ट व अधिक कुशल होती हैं. हाल ही में जरनल ऑफ इकोनॉमिक बिहेवियर एंड ऑर्गेनाइजेशन में प्रकशित एक शोध में सामने आया है, कि सरकार में ज्यादा महिलाओं का होना भ्रष्टाचार को सीमित करता है. 125 देशों में हुए इस शोध में पता चला है, कि जिन देशों की संसद में महिलाओं की संख्या ज्यादा है, वहां भ्रष्टाचार काफी कम पाया गया है. इस बात की पुष्टि भारत में होने वाले बड़े-बड़े घोटालों में लिप्त महिलाओं की न्यूनतम संख्या देखकर भी होती है.

भ्रष्टाचार में कम लिप्त होना भी महिलाओं को अपने क्षेत्र के लोगों के प्रति ज्यादा जिम्मेदार साबित करता है. इस कारण उनका पूरा ध्यान अपने निजी आर्थिक हित साधने की बजाय अपने क्षेत्र के लोगों के विकास में अधिक लगता है.

३- पुरुष नेताओं की तुलना में महिलाओं में राजनीतिक अवसरवाद भी कम होता है. भारतीय समाज में आज भी शिक्षित लड़कियां /महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा बहुत कम महत्वाकांक्षी हैं. अपने करियर को लेकर वे लड़कों जितनी उतावली और अवसरवादी नहीं हैं. राजनीति के क्षेत्र में आने वाली महिलाएं भी बहुत ऊंची राजनीतिक महत्वकांक्षा नहीं पालती. उन्हें लगता है पुरुषों के इस क्षेत्र में उनका एक बार विधायक बनना भी बड़ी बात है. सो महिलाओं का ध्यान भविष्य में फिर से विधायक बनने से ज्यादा अपनी वर्तमान जिम्मेदारियों पर ज्यादा होता है.

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४- महिला विधायकों में राजनीतिक असुरक्षा पुरुष विधायकों से कम होती है. भविष्य में वे फिर से विधायक बन सकेंगी या नहीं, सक्रिय राजनीति में रहेंगी या नहीं, इन सब बातों में वे पुरुषों से कम असुरक्षित महसूस करती हैं. भावी राजनीतिक असुरक्षा के चलते पुरुष नेताओं का ज्यादा ध्यान हमेशा जोड़-तोड़ करने में ही लगा रहता है.

सत्ता में बने रहने के लालच के चलते पुरुष नेता बहुत बार अनैतिक साठगांठ भी करते हैं. अपनी भावी राजनीतिक सुरक्षा के मद्देनजर वे अक्सर ही गुंडे, बदमाशों यहां तक की अंडरवर्ल्ड से भी मदद लेने में नहीं हिचकते! जबकि कोई भी महिला नेता असामाजिक तत्वों की मदद लेकर अपनी भावी राजनीतिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने में दिमाग नहीं लगाती. (अपवाद हो सकते हैं)

उपरोक्त सभी शोध, आंकड़े और तथ्य इस बात की तरफ साफ तौर पर इशारा करते हैं, कि महिला निर्वाचन क्षेत्रों में ढ़ांचागत विकास ज्यादा हुआ है. लेकिन यह विडंबना ही है कि पुरुषों की अपेक्षा बेहतर परिणाम लाने के बावजूद, राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व आज भी बहुत ही कम है. इसलिए महिलाओं का ज्यादा से ज्यादा संख्या में राजनीति में आना आज और समाज दोनों की जरूरत है. महिलाओं की राजनीतिक सक्रियता से न सिर्फ व्यक्तिगत तौर पर महिलाओं का फायदा होगा बल्कि हमारे सामाजिक विकास के लिए भी अधिक फायदेमंद साबित होगा.