दिल्ली से लेकर पटना तक बिहार सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

शालिनी श्रीनेत

दिल्ली में रिपब्लिकन फोरम और विभिन्न संगठनों ने बिहार भवन पर किया प्रदर्शन वहीं बिहार में महिला संगठनों ने विधान भवन का घेराव किया. उधर उत्तर प्रदेश भवन पर गोंड महासभा, बापसा सहित विभिन्न संगठनों ने सोनभद्र में हुए आदिवासी-नरसंहार के खिलाफ प्रदर्शन किया. शालिनी श्रीनेत की रिपोर्ट :

देश भर में और खास तौर पर बिहार में होने वाली मॉब लिंचिंग की घटनाओं के विरोध में रिपब्लिकन फोरम के आह्वान पर कई जनपक्षधर संगठनों ने बिहार भवन पर पिछले 22 जुलाई को प्रदर्शन  किया। बिहार भवन के बाहर सभी संगठनों ने नारे लगाए और मॉब लिंचिग के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग रखी। प्रदर्शन करने वालों में मेरा रंग से शालिनी श्रीनेत, NFIW से मोना, नुसरत परवीन, आसिया कुरैशी, दीप्ति भारती, संगीता देवी, अनहद से शबनम हाशमी, फैज़ान आलम, नितीश कुमार, बहुजन कम्युनिस्ट पार्टी के केके नियोगी, हिम्मत सिंह, आल इंडिया ट्राइबल फोरम, दिल्ली से नितीशा खल्को, छात्र राजद के जयंत जिज्ञासु, मुलायम सिंह यादव, राजीव सुमन व पूर्व राज्यसभा सांसद अनवर आदि मौजूद थे।

अली अनवर सहित अन्य लोगों ने वहां संबोधित करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक साल पहले मॉब लिंचिंग पर कानून बनाने का गाइडलाइन जारी किया था। संसद का सत्र समाप्त होने वाला है लेकिन लिंचिंग पर कानून बनाने का कोई इरादा नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि भीड़ द्वारा हिंसा एक संक्रामक सिलसिला बन गया है. इसके तुरंत बाद गोंड महासभा बापसा (बिरसा फुले अम्बेडकर स्टूडेंट्स असोसिएशन) और AITLF की नितीशा खल्को के आह्वान पर सोनभद्र में हुए आदिवासियों के नरसंहार के विरोध में यूपी भवन पर भी प्रदर्शन हुआ। वक्ताओं ने इस नरसंहार के मामले में राज्य सरकार की लचर कानून-व्यवस्था को आड़े हाथ लिया.

बिहार में विधान भवन पर प्रदर्शन:

बिहार में महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार के खिलाफ 23 जुलाई को महिला संगठनों ने मार्च निकाला. डाकबंगला चौराहे पर मार्च को संबोधित करते हुए महिला संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस बात पर रोष व्यक्त किया कि विधानसभा के एक महीने के इस बजट सत्र में एक दिन भी  सरकार ने महिलाओं के सवाल पर चर्चा नहीं की. 

महिलाओं ने इस बात पर चिंता जताई कि आज समाज में नफरत और हिंसा की मानसिकता को बढ़ावा दिया जा रहा है. कहीं जानवर चोरी का आरोप लगा कर मॉबलिचिंग हो रही है तो कभी किसी लड़की को ‘संस्कृति’के नाम पर  छेड़खानी या बलात्कार कर उसका वीडियो बनाया जा रहा है और वायरल किया जा रहा है.

 महिला नेताओं ने कहा कि लड़कियों की ट्रैफिकिंग और लापता होने की घटनाओं पर सरकार संवेदनहीन बनी हुई है.यही कारण है कि विगत डेढ़ महीने  में गांधी मैदान क्षेत्र से लापता ग्यारह साल की तन्वी के मामले में कोई कार्यवाई नहीं हुई है.दलित, अल्पसंख्यक और कमजोर वर्ग की महिलाओं पर अत्याचार बढ़ गया है. बेगूसराय के भगवानपुर क्षेत्र में एक महिला पर बलात्कार के मामले में नामजद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.पुलिसकर्मी स्नेहा मंडल की संदिग्ध मौत के मामले में सरकार का रवैया अपराधियों के बचाव का है.शेल्टर होम कांड जिसमें लंबे संघर्ष के बाद सीबीआई जांच शुरू तो हुई लेकिन सीबीआई  की सुस्ती और उसकी पूरी कार्यप्रणाली दिखा रही है कि अपराधियों को बचाने का भरपूर प्रयास हो रहा है और दलित छात्रा डीका हत्याकांड में ढाई साल के बाद भी सीआइडी न तो सभी हत्यारों को पकड़ पाई है और न पकड़े गए अपराधियों के खिलाफ कोई सबूत जुटा पाई है. आज इस मार्च के जरिए हम मांग करते हैं कि महिलाओं पर हिंसा को रोकने के लिए सरकार विधानसभा में एक प्रस्ताव लाए तथा तात्कालिक तौर पर हमारी निम्नलिखित मांगे पूरी करे-

1.ट्रैफिकिंग रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए. लड़कियों को गायब करनेवाले दलाल पुलिस गठजोड़ को खत्म करने के लिए ठोस उपाय करे.

ग्यारह वर्षीय तन्वी को बरामद करने की तत्काल कोशिश हो.

2.पुलिस कांस्टेबल स्नेहा मंडल की संदिग्ध मौत मामले में उसके उच्च अधिकारियों पर कार्यवाई की जाय और  स्नेहा के परिजनों की मांग को स्वीकार कर पूरे मामले की सीबीआई जांच हो.

3शेल्टर होम कांड में सीबीआई शीघ्र जांच रिपोर्ट सौपे और बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाय.

4.अम्बेडकर विद्यालय, हाजीपुर की छात्रा डीका हत्याकांड में सीआईडी जांच शीघ्र पूरी की जाय डीका के परिवार को मुआवजे की राशि का पूरा भुगतान किया जाय.

5.बिहार में हिंसा को रोकने के लिए ठोस कदम उठाया जाय और धार्मिक आयोजनों के नाम पर आर एस एस द्वारा तलवार बांटने, लाठी बांटने या शाखा में बंदूक चलाने का प्रशिक्षण देने को सख्ती से रोका जाय.

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