मैं भी हो सकती थी उस दिन यौन हमले की शिकार

मनीषा झालान एक साल पहले मैं  जॉब ढूंढ रही थी मुझे साउथ इंडिया घूमना था और बैंगलोर मेरी पहली चॉइस थी बहुत कोशिश के बाद...

बच्चों के यौन उत्पीड़न मामले को दबाने, साक्ष्यों को नष्ट करने की बहुत कोशिश...

मुजफ्फरपुर बिहार के शेल्टर होम में बच्चियों के साथ हुए अमानवीय, बर्बरतापूर्ण यौन-शोषण की घटना और केस से जुड़े सामाजिक, न्यायिक और राजनीतिक पहलुओं...

नौकरी का प्रलोभन देकर महिला साहित्यकार से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति की अश्लील बातचीत:...

सुशील मानव  इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति रतन लाल हंगलू और एक महिला साहित्यकार के बीच वाट्सएप चैट का स्क्रीनशॉट इन दिनों वायरल हो रहा है।...

‘एक था गुल…’अलविदा शशि कपूर

स्वरांगी साने  अचानक वाट्स एप्प पर संदेश आता है..न्यूज चैनल्स पर फ्लैश होने लगता है..फिर स्क्रोल चलने लगता है, शशि कपूर नहीं रहे… पहली प्रतिक्रिया तो...

नाम अम्बेडकर विश्वविद्यालय, काम दलितों की उपेक्षा

दलित शोधार्थी गरिमा एवं रश्मि द्वारा लिखा गया प्रगतिशील एवं लोकतान्त्रिक छात्र समुदाय (PDSC) द्वारा किये गए प्रदर्शन के दौरान यह एक बार फिर सिद्ध...

राम-अल्लाह वाले फर्जी पोस्ट की कैराना-सांसद ने की पुलिस में शिकायत,जांच के आदेश

स्त्रीकाल डेस्क कैराना से नवनिर्वाचित सांसद तबस्सुम हसन ने शामली के पुलिस अधीक्षक को अपने नाम पर वायरल किये जा रहे पोस्ट के खिलाफ पत्र...

‘ग्लोबल बहुजन एवार्ड’से सम्मानित हुईं मनीषा बांगर

स्त्रीकाल डेस्क  बामसेफ की उपाध्यक्ष मनीषा बांगर न सिर्फ देश में बल्कि दुनिया भर के बहुजनों के बीच बहुजन-क्रान्ति का बिगुल बजा रही हैं.  पिछले...

आदिवासियों का पत्थलगड़ी आंदोलन: संघ हुआ बेचैन, डैमेज कंट्रोल को आगे आये भागवत

झारखंड, छत्तीसगढ़ के आदिवासी पत्थलगड़ी की अपनी पुरानी परम्परा का नये रूप में अपने अधिकारों को स्थापित करने के लिए राजनीतिक रूप से इस्तेमाल...

शोधार्थियों ने मनाई सावित्रीबाई फुले जयंती

डेस्क  किसी भी समाज में क्रांतिकारी बदलाव तब ही आ सकता है जब प्रत्येक स्वाभिमानी व्यक्ति एक ईकाई के रूप में स्वतंत्र एवं व्यापक समाज...

हमें खत्म करने के पहले वे लोकतंत्र को खत्म करेंगे

स्त्रीकाल संपादकीय टीम  चाहे कोई भी संघर्ष हो-जाति के खिलाफ, ब्राह्मणवाद के खिलाफ, पितृसत्ता के खिलाफ, तानाशाही के खिलाफ- वह  तभी तक जारी रह सकता...

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कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।