मेरी माँ मेरा आदर्श..!

इंदिरा जी के इस कथन से सीख लेते हुए कि “राजनीति में अगर रहना है तो टीका-टिप्पणी, निंदा, सहन करने की और पचाने की क्षमता होनी चाहिए” माँ ने जीवन के कटु-अनुभवों से सिख लेते हुए हर स्थिति का सामना करने की शक्ति प्राप्त की. जब मैं जिला परिषद् की अध्यक्षा बनी तो भी उन्होंने मुझे यही समझाया कि ‘किसी का बुरा मत करना. नेकी कर दरिया में डाल’ उनका कहना है कि गरीब के सेवा से ही भगवान की पूजा हो जाती है.

पटना में याद की गयीं रमणिका गुप्ता

हित्यिक संगठन बागडोर, दूसरा शनिवार, समन्वय और कोरस की संयुक्त पहल पर पटना कॉलेज सेमिनार हॉल में इसका आयोजन संपन्न हुआ।उपस्थित लोगों ने रमणिका गुप्ता की फोटो पर पुष्पांजलि अर्पित की, उनसे जुड़ी स्मृतियां साझी की और उनकी कविताओं का भी पाठ किया।

‘विज्ञापनों में महिलाओं का प्रस्तुतीकरण:आर्थिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य’

उपासना गौतम पी-एच. डी शोधार्थी,महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय,वर्धा. सम्पर्क: sonpari2003@gmail.com प्रस्तावना लिंगाधारित व्यवस्था में खड़ी विभिन्न संस्थाओं  और उसके घटकों ने स्त्री अधीनस्थता का पूरा लाभ...

मिथक और स्त्री आंदोलन का अगला चरण

संजीव चंदन ‘रिडल्स इन हिन्दुइज्म’ में डा. बाबा साहेब अंबेडकर इतिहास लिखने से ज्यादा इतिहास की व्याख्या को महत्वपूर्ण मानते हैं. भारतीय इतिहास के बहुत...

संविधान के हक में नफ़रत के खिलाफ औरतें

भारतीय मुस्लिम महिला अंदोलन की हलीमा ने कहा –“अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों की स्कूल ड्रापआउट करने की दर खतरनाक स्तर पर है। सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए जितने भी वादे किए हैं, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान और बाकी सब वादे देश में विफल हो चुके हैं। सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ट्रिपल तालाक और बुर्का प्रतिबंध और इस तरह के बारे में बात कर रही है।

स्मृति जी कंडोम के विज्ञापन वल्गर तो डीयो के संस्कारी कैसे?

श्वेता यादव अष्टभुजा शुक्ल की लाइनें हैं एक हाथ में पेप्सी कोला दूजे में कंडोम, तीजे में रमपुरिया चाकू चौथे में हरिओम, कितना ललित ललाम...

मीसा भारती: महिलाओं को अधिकार दिये बिना सामाजिक न्याय अधूरा

डा. मीसा भारती डा. मीसा भारती राज्यसभा सांसद हैं .  राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय जनता दल की प्रभावशाली महिला नेता डा. मीसा भारती...

चार अप्रैल को बदलाव का आगाज करती महिलायें होंगी सड़क पर

महिलाओं का मानना है कि वे नफरत और हिंसा के मौजूदा माहौल के खिलाफ और लोकतांत्रिक गणराज्य के नागरिकों के रूप में अपने संवैधानिक अधिकारों का दावा करने सडक पर उतर रही हैं. महिला मार्च फॉर चेंज का उद्देश्य भारत में महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों पर हमलों के खिलाफ आ राही है आवाजों को एकजुट करना है।

जाने क्या कुछ है महिलाओं के लिए कांग्रेस के पिटारे में: कांग्रेस का घोषणापत्र

समाज के श्रमशील वर्ग की महिलाओं के लिए भी महत्वपूर्ण घोषणा है जिसमे प्रवासी महिला श्रमिकों के लिए पर्याप्त रैन बसेरों, कसबों और शहरों में महिलाओं के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित शौचालयों की संख्या बढ़ाने, सार्वजनिक स्थलों, स्कूलों और कॉलेजों में सेनेटरी नेपकिन वेंडिंग मशीने लगाने की बात है.

न मार्क्सवाद, न अंबेडकरवाद, न स्त्रीवाद , बस एक्सपोजर चाहिए और मंच

सुशील मानव  देश और समाज में  नफ़रत, वैमनस्य, असहिष्णुता, हताशा और मातम का माहौल है और साहित्य में लगातार एक के बाद उत्सव मनाए जा...

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कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।