एक सांस्कृतिक आंदोलन के चार साल

प्रमोद रंजन व रवि प्रकाश ( देश में एक धीमा सांस्कृतिक आन्दोलन करवट ले रहा है , एक क्रांति घटित हो रही है , जिसकी...

असहिष्णुता/ क्रूरता के खिलाफ एक आयोजन

पुष्पा विवेक  दलित लेखक संघ के तत्वाधान में  एक  विचार गोष्ठी का आयोजन 15 नवम्बर 2015 एफ- 19 कनॉट पैलेस दिल्ली में सम्पन्न हुआ ....

राजनीति की स्त्रीविरोधी वर्णमाला

नीलिमा चौहान पेशे से प्राध्यापक नीलिमा 'आँख की किरकिरी ब्लॉग का संचालन करती हैं. संपादित पुस्तक 'बेदाद ए इश्क' प्रकाशित संपर्क : neelimasayshi@gmail.com. बिहार चुनाव...

सुनपेड़ हत्या कांड : तथ्य और प्रतिबद्धता

अनिल कुमार  प्रमोद रंजन, (सलाहकार संपादक, फॉरवर्ड प्रेस )और संजीव चंदन, (संपादक, स्त्रीकाल) के साथ सुनपेड़ से लौटकर  20 अक्टूबर 2015 को सुनपेड़, फरीदाबाद में दो...

हमारी पार्टी गरीबों की पार्टी है : दीपंकर भट्टाचार्य

बिहार चुनाव का तीसरा फेज 28 को है. छोटे -बड़े दलों के नेता हवाई मार्ग ( हेलीकॉप्टरों) से राज्य के खेत -खलिहानों में उतर...

हमारी पार्टी गरीबों की पार्टी है : दीपंकर भट्टाचार्य

बिहार चुनाव का तीसरा फेज 28 को है. छोटे -बड़े दलों के नेता हवाई मार्ग ( हेलीकॉप्टरों) से राज्य के खेत -खलिहानों में उतर...

औरत , विज्ञापन और बाजार

अदिति शर्मा केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, बैंगलोर पीठ में हिंदी अनुवादक संपर्क-ई-मेल : aditisharmamystery@gmail.com अदिति शर्मा स्त्री  मुक्ति चेतना व स्त्रीवादी दृष्टिकोण पर बहुत कुछ लिखा जा...

अपने ही पराभव का जश्न मनाती है स्त्रियाँ ! ( दुर्गा पूजा का...

नूतन मालवी <सत्यशोधक आन्दोलन की कार्यकर्ता, कई किताबें प्रकाशित, सत्यशोधक स्त्रीवाद नामक एक किताब प्रकाश्य.संपर्क : ई मेल- nootan.malvi@gmail.com नौ दिनों में दुर्गा की...

त्योहारों के बहुजन सन्दर्भ

नूतन मालवी  त्योहारों का सांस्कृतिक महत्व है.  वे भाईचारे, प्रेम व एकता के प्रतीक माने जाते हैं.   इनमें से कई सिन्धु घाटी की सभ्यता के...

रक्तरंजित कहानी महिला प्रतिनिधित्व की

उपेन्द्र कश्यप  (आज बिहार विधान सभा के लिए चुनाव का प्रथम चरण शुरू हुआ है. इस अवसर 2001 में मारी गई महिला मुखिया की कहानी...

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।