बोल्गा से गंगा, तुम्हारी क्षय हो के रचयिता ने दी समाज को नई उर्जा:...

अरुण नारायणकला संस्कृति एवं युवा विभाग और पटना संग्रहालय की संयुक्त पहल ‘जब हम...

नदियों की उदासी का छन्द रचती कविताएँ

  नदियों की उदासी का छन्द रचती कविताएँ नदी हमारी चेतना का अभिन्न अंग है | इतिहास साक्षी है कि मानव सभ्यता और संस्कृति का उत्स...

पारसनाथ का सम्मेद शिखर,बादशाह अकबर के फ़र्ज़ी फरमान से लेकर आदिवासियों की ज़मीन दबोचने...

'''उसका मन टूट गया । उसके मिट्टी खोदने पर कोयला या अबरख क्यों निकलता है और साथ ही साथ आ पहुंचते हैं अंग्रेज-बंगाली-बिहार लोग...

ब्राह्मणवादी पितृसत्ता पर बहुजन लेखिकाओं ने की बातचीत: बहुजन साहित्य संघ का आयोजन

अनीता मिंज जी ने यह बताया कि किस प्रकार आदिवासी स्त्रियों की स्वतंत्रता का अर्थ सिर्फ़ दैहिक सम्बन्ध तक सीमित समझ लिया जाता है जबकि वह अपनी स्वतंत्रता को जीती हैं । उनके रोजमर्रा के अभ्यास में यह शामिल होता है । वह मुख्यधारा की स्त्रियों से ज़्यादा स्वतंत्र और आत्मनिर्भर हैं, यहाँ उस प्रकार की समस्याएँ नहीं हैं जो दलित स्त्रियों की समस्याएँ हैं ।

उद्योगपति जिंदल ने जमीन हासिल करने के लिए एक आदिवासी महिला और उसके...

मुझे ठीक-ठीक पता नहीं है कि क्या हुआ था. लेकिन जब मुझे होश आया, तो मैंने खुद को बेबस पाया, आँखों पर पट्टी थी, और दोनों हाथ बिस्तर से बंधे थे। कुछ लोग एक दुसरे को मैनेजेर डाइरेक्टर कह कर बात कर रहे थे. मैं चिल्लायी, एक आदमी ने दौड़कर पास आया और धमकी दी - 'तुम्हारी जमीन का एक हिस्सा पहले से ही हमारे कब्जे में है, कलेक्टर को पत्र लिखो कि अपनी बाकी जमीन भी हमें दे रही हो।जब मुझे उसने झकझोरा तब मुझे पता चला कि मेरे शारीर पर कपडे नहीं हैं. आँखों पर मेरे पट्टी बाँधी गई थी. उन्होंने मेरे साथ गन्दी हरकतें की. वे मेरी हाथों में अपना गुप्तांग पकड़ा रहे थे.

सिक्स पैक सीता

सिक्स पैक सीता विप्लव रचयिता संघम (विरसम) के दो दिवसीय सम्मेलन में कई किताबों का लोकार्पण हुआ, जिसमें एक किताब के नाम ने अपनी ओर...

प्रधानमंत्री को पत्र लिखना हुआ गुनाह: 6 बहुजन छात्र निष्कासित

ये सिलसिला आगे बढ़ता है जब महात्मा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के प्रशासन ने छह विद्यार्थियों को निष्काशित कर दिया जाता है, चन्दन सरोज, नीरज कुमार, राजेश सारथी, रजनीश अम्बेडकर, पंकज वेला और वैभव पिंपलकर इन लोगों ने इस अलोकतांत्रिक कार्रवाई का विरोध करते हुए 9 अक्टूबर को विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री को पत्र लिखने का सामूहिक कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें छात्र-छात्राओं ने अपने पत्र में पीएम मोदी प्रधानमंत्री से देश के मौजूदा हालात को देखते हुए कुछ सवालों का जवाब मांगा है. छात्र-छात्राओं ने देश में दलित-अल्पसंख्यकों के मॉबलिंचिंग से लेकर कश्मीर को पिछले दो माह से कैद किए जाने; रेलवे-बीपीसीएल-एयरपोर्ट आदि के निजीकरण; दलित-आदिवासी नेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं एवं बुद्विजीवी- लेखकों के बढ़ते दमन और उनपर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने पर भी सवाल खड़े किए हैं. छात्र-छात्राओं ने महिलाओं पर बढ़ती यौन हिंसा व बलात्कार की घटनाओं के सवाल पर भी जवाब माँगा है. क्या ये सवाल जायज नहीं है? इन सवालों से देश की छवि खराब हो जाएगी?

बच्चियों का यौन शोषक एक हाई प्रोफाइल प्राइवेट ट्यूटर

मुझे याद है मुझे हमेशा बड़ों की इज़्ज़त करना सिखाया गया। 'बड़े हैं' यह कहकर यह उन्हें गैर जरूरी सम्मान दिया जाता है। हमारे माता पिता ने हमें अजनबियों से कुछ भी लेने से मना किया, जिन लड़कों से हम मिलते थे, उनसे सावधान रहने को कहा, लेकिन जिस व्यक्ति ने मेरा बचपन छीन लिया वह व्यक्ति वो था जिस पर मेरे माता पिता ने मुझे पढ़ाने के लिए भरोसा किया। मैं गणित में हमेशा से कमजोर थी और मुझे अच्छा ग्रेड चाहिए था, इसके लिए वह आया था - सफेद पूरी बाँह की शर्ट, फॉर्मल पैंट, अजीब सी मुस्कान और चोरों वाली चाल ढाल।

प्रोफ़ेसर रतनलाल की रिहाई!

यह आंबेडकरवाद और एकजुट लड़ाई की जीत है एच. एल. दुसाध  सत्ता का रवैया देखते हुए...

आसिफा (कठुआ) के बलात्कारियों को आजीवन कारावास (मृत्यु पर्यंत): अभियोजन पक्ष फांसी के लिए...

जम्मू में आसिफा की वकील दीपिका सिंह राजावत को काफी परेशान किया गया था, उन्हें बलात्कार की धमकियां दी गयी थीं। पिछले साल पीड़िता के परिवार ने उनसे केस वापस लिया था। एडवोकेट मुबीन फ़ारूकी ने आगे इस मामले में पैरवी की। मामले के अभियोजन पक्ष में जेजे चोपड़ा, एसएस बसरा और हरमिंदर सिंह शामिल थे ।

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कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।