मंडल मसीहा को याद करते हुए

लेखक : प्रेमकुमार मणि 25 अगस्त उस विन्ध्येश्वरी प्रसाद मंडल का जन्मदिन है , जिनकी अध्यक्षता वाले आयोग के प्रस्तावित फलसफे को लेकर 1990 के...

मीडिया से मजदूर गायब, सेक्सी माडल्स बिल्डिंग बना रहे हैं !

आदित्य कुमार गिरि शोधार्थी,कलकत्ता विश्वविद्यालय,ईमेल आईडी-adityakumargiri@gmail.com टीवी पर 'अल्ट्राटेक सीमेंट' का नया विज्ञापन आ रहा है.सुंदर और सेक्सी मॉडल्स बिल्डिंग  बना रहे हैं.मतलब विज्ञापन...

वर्मा जी,शर्मा जी, रावत जी, सबके हैं संबंध बच्चियों के बलात्कार काण्ड से

स्त्रीकाल डेस्क  इधर देश का ध्यान मीडिया ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लम्बी बीमारी के बाद मृत्यु पर केन्द्रित कर रखा है उधर...

देवी के नाम पर शेल्टर होम और चलता था सेक्स रैकेट त्रिपाठी परिवार: एक...

सुशील मानव  “ यहाँ   कई दीदी हैं। उन्हें बड़ी मैडम रात को कहीं भेजती थी। कभी लाल गाड़ी तो कभी काली गाड़ी आती थी उनको...

मीडिया की बलात्कारी भाषा: शेल्टर होम का सन्दर्भ

सुशील मानव  यौन-उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मुद्दे की रिपोर्टिंग में अपने भाषा संस्कार से बलात्कारी समाज गढ़ रहा मीडिया सेवा संकल्प बालिका गृह मुज़फ्फ़रपुर यौन उत्पीड़न केस...

अफसोस कि औरतें उठ तो रही हैं पर मर्दवादी संस्थाएं उन्हे कुचल देना...

पर अफसोस कि ये मार्च भी देश भर की लोकतांत्रिक संस्थाओं में भर दी गयी महिला विरोध की भावना की भेंट चढ़ गया. मुख्यधारा मीडिया में इस मार्च कि चर्चा आज न के बराबर दिख रही है. खासकर प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जो आम लोगों के बीच अभी सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं वे लगातार सत्ता के खिलाफ जारी राजनीतिक सामाजिक बदलाव को खारिज करने या आम लोगों के बीच न पहुंचने देने में एक षड़यंत्रकारी भूमिका निभा रहे हैं.

देर से ही सही जागी मुज़फ्फरपुर की सिविल सोसायटी भी

1 अगस्त को हुआ कैंडल-मार्च : बालिका-कांड और घन गरज-तर्पण   वीरेन नंदा जिन्हें सबसे पहले बोलना था, आगे आना था, वे देर से आये, लेकिन...

क्या केजरीवाल लेंगे ऐक्शन: साहित्य कला परिषद के उपसचिव द्वारा पत्नी से मारपीट का...

दिल्ली सरकार की साहित्य कला परिषद के प्रमुख अधिकारी और नाटककार जे.पी. सिंह (जयवर्धन) के ऊपर उनकी  पत्नी और दिल्ली की रंग-निर्देशक चित्रा सिंह...

आधुनिक गुरुकुलों में आंबेडकर के वंशजों की हत्या

चंद्र सेन ( रोहित वेमुला की आत्महत्या के कारणों की अकादमिक जगत में व्याप्तता की पड़ताल कर रहे हैं , जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के...

बहुत खूब कंगना राणावत, सलमान खान कुछ सीखो

मनीषा कुमारी  कंगना राणावत ने गोरा बनाने के क्रीम को नस्लभेदी दायरे में रखते हुए ऐसे विज्ञापन करने से मना कर दिया. इस निर्णय से...

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।