कश्मीरी सेब

प्रेमचंद कल शाम को चौक में दो-चार जरूरी चीजें खरीदने गया था. पंजाबी मेवाफरोशों की दूकानें रास्ते ही में पड़ती हैं. एक दूकान पर बहुत...

डा. अम्बेडकर की पहली जीवनी का इतिहास और उसके अंश

संदीप मधुकर सपकाले  डा. अम्बेडकर  की प्रमुख जीवनियों में  चांगदेव भवानराव खैरमोड़े द्वारा लिखित जीवनी (मराठी, प्रथम खंड प्रकाशन 14 अप्रैल 1952), धनंजय कीर द्वारा लिखी...

स्वयं में असाधारण स्त्री : माया एंजलो

गरिमा श्रीवास्तव गरिमा श्रीवास्तव हिन्दी विभाग,हैदराबाद केन्द्रीय विश्विद्यालय, में प्रोफ़ेसर हैं. सम्पर्क : drsgarima@gmail.com सन् 2014 के मई महीने का अंत होने में तीन दिन शेष...

प्रेम, विवाह और स्त्री

रेणु चौधरी जे.एन.यु.में शोधरत है renu.jnu14@gmail.com ‘‘प्रेम व्यक्ति के भीतर एक सक्रिय शक्ति का नाम है। यह वह शक्ति है जो व्यक्ति और दुनिया के बीच...

प्रसाद काव्य-कोश

डेस्क  स्त्रीकाल की अनुषंगी संस्था 'द मार्जिनलाइज्ड पब्लिकेशन ' की आगामी किताबों की अग्रिम बुकिंग शुरू है. आगामी तीन से चार सप्ताह में आने वाली किताबों...

अरुण चंद्र राय की कवितायें

अरुण चंद्र राय अरुण चंद्र राय प्रकाशक हैं. ' ज्योति पर्व' प्रकाशन का संचालन करते हैं. संपर्क  : 9811721147 धान रोपती औरतों का प्यार खेतों के...

फूटते पेट वाली औरत और मर्दवाद

रति सक्सेना डा रति सक्सेना संस्कृत की विदुषी हैं, कवयित्री हैं, आलोचक हैं.  साहित्य और संस्कृति की संस्था कृत्या की मैनेजिंग ट्रस्टी हैं.  इनकी हिन्दी...

.वो हरी घास की चादर

रजनीश आनंद कॉपी राइटर, प्रभात खबर, रांची, झारखंड संपर्क : 9835933669, 8083119988 रेलवे प्लेटफॉर्म पर खड़े -खड़े निहारिका लगातार बोल रही थी. तुम्हें मेरी सारी बात...

इस दुनिया से परे आख़िर है क्या

प्रांजल धर ( सविता सिंह के कविता संग्रह 'स्वप्न समय' की समीक्षा प्रांजल धर के द्वारा  ) कविता का एक काम यह भी है कि हमें...

मनीषा जैन की कवितायें

मनीषा जैन मनीषा जैन की कविताएं विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं. एक कविता संग्रह ' रोज गूंथती हूँ पहाड़' प्रकाशित...

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।