क्या महिला नेतृत्व की खोज की मुहीम में आप हमारे साथ शामिल होंगे?

आजादी के 70 साल बाद भी लोकसभा में आज तक महिलाओं की 12% भागीदारी ही संभव हो पाई है. विभिन्न राज्यों के विधान सभाओं...

‘सावित्री बाई फुले वैचारिकी सम्मान’

स्त्रीकाल के द्वारा 2015 के फरवरी –मार्च में दिये जाने वाले 'सावित्री बाई फुले वैचारिकी सम्मान' के लिए आवेदन / संस्तुतियां  30 नवम्बर 2014...

मानवाधिकार-प्रहरी सोनी सोरी को मिला अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सम्मान

कमल शुक्ल  वर्ष 2018 का विश्व प्रतिष्ठित मानव अधिकार सम्मान ‘फ्रंट लाइन डिफेंडर्स अवार्ड फॉर ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स ऐट रिस्क’ पाने वालों में भारत की ओर...

यू पी एस सी में स्त्रीकाल

यू पी एस सी में 22 साल की छात्रा अव्वल  संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की 2015 की परीक्षा में दिल्ली की टीना डाबी ने...

महिला आरक्षण, स्त्रीवाद पर बातचीत और सावित्रीबाई फुले वैचारिकी सम्मान समारोह

1942 के 20 जुलाई को हुए नागपुर महिला सम्मलेन के 75 वें साल के अवसर पर 29 जुलाई को जेएनयू के 'ट्रिपल एस ऑडिटोरियम'...

बहुजन भारत के शौर्य-मेधा का प्रतीक बनी हिमा दास

स्त्रीकाल डेस्क  फ़िनलैंड के टैम्पेयर शहर में 18 साल की हिमा दास ने 12 जुलाई को इतिहास रचते हुए आईएएएफ़ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की...

सतपुड़ा की वादियों में सक्रिय आदिवासियों की ताई: प्रतिभाताई शिंदे

नीलेश  झाल्टे   महाराष्ट्र में आदिवासियों के बीच उनकी लड़ाई में शामिल प्रतिभाताई शिंदे से महिला-नेतृत्व सीरीज के तहत  परिचित करा रहे हैं  नीलेश  झाल्टे :  आदिवासी समाज...

स्त्रीकाल देगा शर्मिला रेगे को ‘सावित्री बाई फुले वैचारिकी सम्मान ‘

३ जनवरी,  सावित्रीबाई फुले -जयन्ती की पूर्व सन्ध्या पर शर्मिला रेगे की किताब को सम्मान की घोषणा  स्त्रीवादी पत्रिका , ' स्त्रीकाल, स्त्री का समय...

वे 15 महिलायें जो सविधान सभा की सदस्य थीं,महिला अधिकारों के संघर्ष की चैम्पियन...

26 नवंबर, संविधान दिवस विशेष  जानिये उन 15 महिलाओं को जो संविधान सभा की सदस्य थीं. उन 15 महिलाओं में एकमात्र दलित महिला सदस्य केरल...

सावित्रीबाई फुले वैच्रारिकी सम्मान के बाद लेखिका अनिता भारती का वक्तव्य

स्त्रीवादी पत्रिका स्त्रीकाल, स्त्री का समय और सच ने डा. आंबेडकर के नेतृत्व में नागपुर में 20 जुलाई 1942 को हुए महिला सम्मेलन के 75वें...

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।