नाम जोती था मगर वे ज्वालामुखी थे

महात्मा जोतीबा  फुले की जयंती  (11 अप्रैल ) पर विशेष....  मनीषा बांगर और डा. जयंत चंद्रपाल  इनका जीवनक्रम ज्योति था बिलकुल ज्योति की तरह अन्धकार को...

अनारकली आरावाली 24 मार्च से

अनारकली आॅफ आरा देश भर में 24 मार्च को रीलीज़ हो रही है. नील बटे सन्नाटा के बाद स्वरा भास्कर की यह महत्वाकांक्षी सोलो...

स्मृति जी कंडोम के विज्ञापन वल्गर तो डीयो के संस्कारी कैसे?

श्वेता यादव अष्टभुजा शुक्ल की लाइनें हैं एक हाथ में पेप्सी कोला दूजे में कंडोम, तीजे में रमपुरिया चाकू चौथे में हरिओम, कितना ललित ललाम...

तानाशाह के खिलाफ वह खूबसूरत शख्सियत, हमें भी पढ़ा गयी पाठ!

संध्या नवोदिता फहमीदा रियाज़ से मेरा पहला परिचय उनकी कविताओं से हुआ था। उनसे आमने-सामने मिलने से पहले उनकी नज़्में लाखों पाठकों की तरह मेरे...

वे कुन्तियाँ नहीं गौरव से भरी माँ हैं

संजीव चंदन  वह कहती है, "मैं विकलांग हूँ, मेरा बच्चा ही मेरा सहारा होने वाला था, इसलिए मैंने निर्णय लिया कि मैं उसे जन्म दूंगी....

आपहुदरी : रमणिका गुप्ता की आत्मकथा -पहली किस्त

रमणिका गुप्ता रमणिका गुप्ता स्त्री इतिहास की एक महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं . वे आदिवासी और स्त्रीवादी मुद्दों के प्रति सक्रिय रही हैं . 'युद्धरत...

तीन दिनों के लिए नागपुर में जुटेंगे अम्बेडकरी महिला साहित्यकार

सम्बुद्ध महिला संगठन और अखिल भारतीय अम्बेडकरी साहित्य व संस्कृति महामंडल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन सुलोचनाबाई डोंगरे परिसर, दीक्षाभूमि नागपुर में होगा. साहित्य और सरोकार के ऐसे आयोजन महाराष्ट्र के अम्बेडकरी साहित्य को जनता से जोड़ने का भी काम करते हैं

स्त्री-पुरुष अलग-अलग प्रांत नहीं

डॉ. आरती   संपादक , समय के साखी ( साहित्यिक पत्रिका ) संपर्क :samaysakhi@gmail.com तेजाब हिंसा से संबंधित खबरों के शीर्षकों की बानगी देखिए- ....

होली पर पिंजडा खोलो ऋचा : अनुपम सिंह की चिट्ठी

( इलाहाबद विश्वविद्यालय के छात्र संघ की पहली महिला अध्यक्ष को विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा का पत्र )  प्रिय ऋचा,  मैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय की भूतपूर्व छात्रा...

जेंडर की अवधारणा और अन्या से अनन्या

भावना मासीवाल भावना मासीवाल महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय में शोध छात्रा हैं संपर्क :bhawnasakura@gmail.com; जब महिलाओं ने अपनी सामाजिक भूमिका को लेकर सोचना-विचारना...

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।