पवित्र आराधना स्थल और अपवित्र महिलाएं

नेहा दाभाड़े पवित्र धार्मिक स्थलों में प्रवेश के अधिकार पाने के लिए महिलाएं आंदोलनरत हैं। सबरीमला, शनि शिन्गनापुर और हाजी अली की दरगाह में महिलाओं...

वह इतिहास, जो बन न सका : राज्यसभा में महिला आरक्षण : चौथी क़िस्त

 महिला आरक्षण को लेकर संसद के दोनो सदनों में कई बार प्रस्ताव लाये गये. 1996 से 2016 तक, 20 सालों में महिला आरक्षण बिल पास...

सारे दल साथ -साथ फिर भी महिला आरक्षण बिल औंधे मुंह : क़िस्त सात

महिला आरक्षण को लेकर संसद के दोनो सदनों में कई बार प्रस्ताव लाये गये. 1996 से 2016 तक, 20 सालों में महिला आरक्षण बिल...

कंगना, गैंगस्टर और गुलशन की भाषा बनाम फिल्म जगत का मर्दवाद

दिवस  दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में शोधरत सिनेमा में गहरी रुचि. समकालीन जनमत में फ़िल्मों की समीक्षाएँ प्रकाशित. संपर्क : dkmr1989@gmail.com कंगना  को संबोधित '...

बाल विवाह के लिए अभिशप्त लड़कियाँ

उपासना बेहार लेखिका  सामाजिक कार्यकर्ता हैं और महिला मुद्दों और बाल अधिकारों को लेकर मध्यप्रदेश में लम्बे समय से काम कर रही हैं संपर्क...

12वीं की छात्रा ने चलाई मुहीम: बुलेट ट्रेन नहीं सुरक्षित रेलवे दो मोदी सर

मुंबई में हुई भगदड़ ने मुंबई-अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट  के खिलाफ गुस्सा और भड़का दिया है। मुंबई के एक स्कूलल में 12वीं...

महिलाओं के भरोसे है खेती लेकिन मालिक हैं पुरुष

महिलाओं के लिए श्रम विभाजन महज लैंगिक ही नहीं है, बल्कि जातीय भी है। हमने अध्ययन के दौरान पाया कि तमाम इलाकों में यह बात समान है कि आम तौर पर ऊंची जाति की महिलाएं या फिर मध्यम या बड़े जोत वाले आकार के परिवार की सभी जाति की महिलाएं खेतों में काम नहीं करतीं। अन्य पिछड़ी जातियों में भी ऊपरी पायदान पर आनेवाली जातियों की महिलाएं आम तौर पर खेतों में काम नहीं करतीं। एक तरह से यह मान्यता बन गयी है कि खेती में गरीब और सामाजिक पायदान पर नीचे आनेवाली जातियों की महिलाएं ही काम करती हैं।

सांस्कृतिक पिछड़ापन और हाशिये से उभरती कविता

रविता कुमारी हिंदी विभाग, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार, उत्तराखण्ड ईमेल: ravita_kumari@yahoo.in भारत सम्मान का वह शब्द है जिसके आगे विश्व नतमस्तक होता है। इसकी कला, संस्कृति, दर्शन,...

आदिवासी स्त्री जिसे मीडिया प्रस्तुत नहीं करती है

अंजली मीडिया से अलक्षित आदिवासी स्त्री-छवि और मीडिया द्वारा स्टीरिओटाइप का विश्लेषण कर रही हैं अंजली स्त्री को वैश्विक स्तर पर एक इकाई माना गया है...

औरत के मुंह में पेशाब करने और उसकी वजाइना में सिगरेट बुझाने में कौन...

यह अश्लीलता नहीं हिंसा है, वह भी क्रूरतम प्रकृति की  पूजा सिंह  कई भारतीय फेसबुक यूजर सोमवार सुबह उस समय हक्के-बक्के रह गये जब एक के...

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।