‘सावित्री बाई फुले वैचारिकी सम्मान’

स्त्रीकाल के द्वारा 2015 के फरवरी –मार्च में दिये जाने वाले 'सावित्री बाई फुले वैचारिकी सम्मान' के लिए आवेदन / संस्तुतियां  30 नवम्बर 2014...

स्त्री-विरोधी लेखन दलित लेखन नहीं हो सकता

( उर्मिला पवार मराठी कथा साहित्य में स्त्री अभिव्यक्ति के रूप में एक महत्वपूर्ण उपस्थिति हैं.   ‘आमची इतिहास गढे़ला’ (इतिहास संबंधी पुस्तक) तथा ‘आयदान’...

यौनिकता की विश्वसनीय दृश्यता: भाग 3

एल.जे. रूस्सुम/ अनुवाद डा अनुपमा गुप्ता (एल .जे .रुस्सुम का यह आलेख स्त्रीकाल के प्रिंट एडिशन के लिए भेजा गया था , जिसे हम स्त्रीकाल...

मंडल और महिला आरक्षण

वासंती रामन ( इस सरकार में ६ महिला मंत्रियो को विशिष्ट विभागों का पदभार दिया गया है . यह लोकसभा भी महिला सदस्यों के मामले...

बदलाव की बयार : जद्दोजहद अभी बाकी है

अमृता ठाकुर ( यह आलेख हरियाणा के सतरोल खाप के द्वारा , महिला विंग बनाने , अन्तरजातीय विवाहों को मान्यता देने आदि के फैसलों के...

मर्दों के लिए घर आशियाना और औरतों के लिए जेलखाना है : अरविन्द जैन

( कल ही दिल्ली की एक अदालत ने यह व्यवस्था दी है कि पति के द्वारा जबरन संभोग बलात्कार नहीं है , और दो...

यौनिकता की विश्वसनीय दृश्यता -भाग 2

एल.जे. रूस्सुम/ अनुवाद : डा अनुपमा गुप्ता (एल .जे .रुस्सुम का यह आलेख स्त्रीकाल के प्रिंट एडिशन के लिए भेजा गया था , जिसे हम...

यौनिकता की विश्वसनीय दृश्यता

एल.जे. रूस्सुम/ अनुवाद : डा अनुपमा गुप्ता (एल .जे .रुस्सुम का यह आलेख स्त्रीकाल के प्रिंट एडिशन के लिए भेजा गया था , जिसे हम...

दाम्पत्य में ‘बलात्कार का लाइसेंस’ असंवैधानिक है

 अरविन्द जैन  ( भारत में नैतिकता और परिवार की पवित्रता और निजी दायरे की आड में विवाह के भीतर बलात्कार के खिलाफ कानून बनाने के...

फैंसी स्त्रीवादी आयोजनों में जाति मुद्दों की उपेक्षा

ज्योत्सना सिद्धार्थ / अनुवाद : रंजना बिष्ट  ( एक स्त्रीवादी आयोजन के बहाने ज्योतसना भारत में ठहर गये स्त्रीवादी आंदोलन और चिंतन की पड्ताल कर...

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।