महिला मताधिकार के राजनीतिक संदेश

  संजीव चंदन   अन्य देशों की तुलना में भारतीय महिलाएं इस मामले में थोड़ी सुविधाजनक स्थिति में रही हैं कि उन्हें आजादी के बाद से ही पुरुषों के...

स्त्री-सत्ता : यथार्थ या विभ्रम

अर्चना वर्मा हम सब जानते हैं कि शब्दों के अर्थ उनके प्रयोग-सन्दर्भ से निर्धारित होते हैँ। सत्ता का प्राथमिक अर्थ विद्यमानता, वर्तमानता, उपस्थिति, मौजूदगी या होना यानी...

मनुवादी न्याय का शीर्ष तंत्र

( भगाणा की दलित लड्कियों के साथ बलात्कार के खिलाफ साथियों ने आन्दोलन छेड ही रखा था कि 'योगगुरु' रामदेव ने दलित स्त्रियों के...

दिमाग पर निष्क्रिय होने की चोट उसे निष्क्रिय बनाकर ही छोड्ती है

( सुधा अरोडा का यह आलेख स्त्री के साथ मानसिक हिंसा की सूक्ष्मतम और निरंतर चलने वाली  प्रक्रियाओं क़ॆऎ स्त्रीवादी व्याख्या करता है . सुधा अरोडा...

पितृसत्तात्मक समाज का शिकार पुरुष तथा स्त्रीवादी मुक्ति अभियान

( सुधा अरोडा जितनी मह्त्वपूर्ण कथाकार हैं उतनी ही मह्त्वपूर्ण स्त्रीवादी विचारक . वे स्त्रीवादी मुद्दों के लिए जमीनी स्तर पर भी सक्रिय रहती...

डॉ. अम्बेडकर का मूल चिंतन है स्त्री चिंतन

अनिता भारती   ( कहानीकार आलोचक व कवयित्री अनिता भारती का यह आलेख उनकी पुस्तक ‘समकालीन नारीवाद और दलित स्त्री का प्रतिरोध’ में संकलित...

न्यायपालिका में मौजूद जातिवादी मानसिकता – अरविंद जैन

प्रो. परिमला अंबेकर अध्यक्ष, हिन्दी विभाग गुलबर्गा विश्वविद्यालय, गुलबर्गा ‘भारतीय समाज में दो तरह की संस्कृतियां मौजूद रहीं हैं, ब्राह्मणवादी और लोक संस्कृति। पहली सतावाद और यथास्थितिवाद...

डा0 अम्बेडकर और स्त्री अधिकार – सुजाता पारमिता

( आज आधुनिक भारत के निर्माता डा बाबा साहब भीमराव आम्बेडकर की जयंती है . बाबा साहब स्त्री अधिकारों के लिए ठोस पहल लेते रहे ....

दलित स्त्री आंदोलन तथा साहित्य- अस्मितावाद से आगे

स्त्रीकाल के ताजा अंक 'दलित स्त्रीवाद ' में प्रकाशित  बजरंग बिहारी तिवारी का यह आलेख दलित स्त्रीवाद को समझने के  लिए अनिवार्य  पाठ है....

सावित्रीबाई फुले : शैक्षिक –सामाजिक क्रान्ति की अगुआ

आज भारत की आद्यशिक्षिका सावित्री बाई फुले का जन्मदिन है. आज के इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए ....

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।