यौन हिंसा और न्याय की भाषा: पांचवी क़िस्त

अरविंद जैन स्त्री पर यौन हिंसा और न्यायालयों एवम समाज की पुरुषवादी दृष्टि पर ऐडवोकेट अरविंद जैन ने मह्त्वपूर्ण काम किये हैं. उनकी किताब...

यौन हिंसा और न्याय की भाषा: चौथी क़िस्त

अरविंद जैन स्त्री पर यौन हिंसा और न्यायालयों एवम समाज की पुरुषवादी दृष्टि पर ऐडवोकेट अरविंद जैन ने मह्त्वपूर्ण काम किये हैं. उनकी किताब...

यौन हिंसा और न्याय की मर्दवादी भाषा : तीसरी किस्त

अरविंद जैन स्त्री पर यौन हिंसा और न्यायालयों एवम समाज की पुरुषवादी दृष्टि पर ऐडवोकेट अरविंद जैन ने मह्त्वपूर्ण काम किये हैं. उनकी किताब...

यौन हिंसा और न्याय की मर्दवादी भाषा : दूसरी किस्त

अरविंद जैन स्त्री पर यौन हिंसा और न्यायालयों एवम समाज की पुरुषवादी दृष्टि पर ऐडवोकेट अरविंद जैन ने मह्त्वपूर्ण काम किये हैं. उनकी किताब...

यौन हिंसा और न्याय की मर्दवादी भाषा : पहली क़िस्त

अरविंद जैन स्त्री पर यौन हिंसा और न्यायालयों एवम समाज की पुरुषवादी दृष्टि पर ऐडवोकेट अरविंद जैन ने मह्त्वपूर्ण काम किये हैं. उनकी किताब...

‘‘….एण्ड सन्स’’ का कपटतंत्र और एक चिरविस्थापित: वैश्वीकृत भारत में स्त्री के सम्पदा अधिकार...

डा. अनुपमा गुप्ता अब हम देखेंगे कि सम्पदा पर अधिकारों के मामले में भारतीय स्त्री आज कहाँ है और उसे किस दिशा  में बढ़ना है। 1....

33 प्रतिशत आरक्षण की राजनीति

विजया  रहटकर  अध्यक्ष बी जे पी महिला मोर्चा, अध्यक्ष, महाराष्ट्र महिला आयोग औरंगाबाद म्युन्सिपल कारपोरेशन में चुनी जाने के बाद और ओपन सीट से वहीं मेयर...

12वीं लोकसभा में महिला आरक्षण पर बहस ( 8 मार्च )

राष्ट्रपति , उपराष्ट्रपति  दोनो ने महिला प्रतिनिधियों की सभा में महिला आरक्षण बिल पारित किये जाने की जरूरत पर बल दिया , परन्तु प्रधानमंत्री...

महिला आरक्षण : मार्ग और मुश्किलें

12 दिसंबर को एन एफ आई डवल्यू और स्त्रीकाल के संयुक्त तत्वावधान में ' महिला आरक्षण : कहाँ हैं रूकावटे' विषय पर एक सार्थक...

महिला आरक्षण : मार्ग और मुश्किलें

संजीव चंदन दूसरे देशों की तुलना में भारतीय महिलायें कम से कम एक मामले में भाग्यशाली रहीं हैं और वह यह कि उन्हें आजादी के...

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।