ताकि पीड़िताओं को बार –बार बलात्कार से न गुजरना पड़े

संजीव चंदन बलात्कार पीडिताओं को लेकर भारतीय समाज अजीब मर्दवादी मानसिकता में जीता है. अभी कल ही खबर आई कि बलात्कार पीडिता को उसके बलात्कारी...

ताकि बलात्कार पीड़िताओं को बार –बार बलात्कार से न गुजरना पड़े

संजीव चंदन बलात्कार पीडिताओं को लेकर भारतीय समाज अजीब मर्दवादी मानसिकता में जीता है. अभी कल ही खबर आई कि बलात्कार पीडिता को उसके बलात्कारी...

महिलाओं को साहस से भर देते हैं बलात्कारियों के खिलाफ ऐसे निर्णय

आये दिन समाचारपत्र बलात्कार की खबरों से भरे-पड़े होते हैं. उनमें से कुछ ख़बरें, नियमित अंतराल पर, टीवी मीडिया की सुर्खियाँ भी बनती हैं....

सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ आगे आये महिला संगठन

दहेज़ कानूनों के दुरुपयोग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के खिलाफ चारो ओर आक्रोश है . आज पटना में भी ८ महिला...

अबोध पर अपराध थोपने के ख़तरे

प्रियंका कल से आ रही ख़बरों के मुताबिक दिल्ली के एक स्कूल में नर्सरी में पढ़ने वाले चार साल के एक बच्चे पर, लगभग अपनी...

देवी से देवदासी तक संकट ही संकट: मानवाधिकार आयोग हुआ सख्त

स्त्रीकाल डेस्क  भारत में लोकतंत्र अपना काम कर रहा है. एक ओर  छतीसगढ़ में देवी पूजा के नाम पर दूसरों की आस्थाओं पर हमले पर...

राष्ट्रपति, क्या कुलपति के खिलाफ कार्रवाई करने वाले हैं!

स्त्रीकाल डेस्क  कार्य स्थलों पर महिला कर्मियों के यौन  उत्पीडन को लेकर 2013 में क़ानून बना. इसके पहले कार्यस्थलों पर यौन  उत्पीड़न के प्रसंग में...

जानें न्यायालय के निर्णय से कैसे महिलायें लटकीं अधर में, बढ़ेगी उनकी परेशानी

स्त्रीवादी कानूनविद  अरविंद जैन से स्त्रीकाल की बातचीत पर आधारित सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों, जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस कुरियन जोसफ, जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस...

अपने ही कानूनी जाल-जंजाल में फंसे पितृसत्ता के होनहार लाडले

बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की धारा 9 के अनुसार अगर अठारह साल से अधिक उम्र का लड़का, अठारह साल से कम उम्र लड़की से विवाह करे तो अपराध। सज़ा दो साल कैद या दो लाख ज़ुर्माना या दोनों हो सकते हैं. इसका सीधा-सीधा अर्थ है कि अगर लड़का भी अठारह साल से कम हो, तो कोई अपराध नहीं!

माहवारी का ब्योरा नौकरी के लिए क्यों जरूरी (?) : बेड़ियां तोडती स्त्री: नीरा...

“जब हम भारतीय महिलाओं के लिए समान अधिकारों की संवैधानिक गारंटी प्राप्त करने के लिए आगे बढ़...

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।