स्त्री अध्ययन विभागों पर शामत, असोसिएशन भी सवालों के घेरे में

देश भर में विभिन्न विश्वविद्यालयों में लगभग दो सौ  के आस-पास स्त्री अध्ययंन विभाग/केंद्र आज नयी चुनौतियों से जूझ रहे हैं. अभी बमुश्किल चार दशक...

लड़कियाँ सड़को पर आईं तो सौ सालों में बीएचयू को पहली महिला प्रॉक्टर (कुलानुशासक)...

सामाजिक परिवर्तन का परिणाम, एक सौ एक वर्ष का इतिहास टूटा अनिल कुमार सौ सालों में बीएचयू में नियुक्त पहली महिला कुलानुशासक रोयोना ...

बीएचयू में लड़कियों के आंदोलन को हड़पने की रस्साकशी

अनिता भारती  बीएचयू में लड़कियों के स्वतःस्फूर्त आन्दोलन को एबीवीपी और एनएसयूआई द्वारा हड़पने की कोशिश के बारे में बता रही हैं आन्दोलन की एक...

बीएचयू में प्रशासन के गुंडे थे सक्रिय: लाठीचार्ज का आँखों देखा हाल

विकाश सिंह मौर्य 23 सितम्बर को दोपहर बाद अखिल विद्यार्थी परिषद् के उपद्रवी लड़कों ने अफवाह उड़ाई कि मुख्य गेट के सामने स्थित मदन मोहन...

बीएचयू की छात्राओं के समर्थन में आये लेखक संगठन : 25 सितंबर को जंतर...

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के जवाबी नारे ‘बचेगी बेटी तो पढ़ेगी बेटी’ के साथ सड़क पर उतरी बीएचयू की छात्राओं पर बर्बर लाठीचार्ज करवाकर...

विश्वविद्यालय पढ़ायेगा इंद्रजाल, जादूगरी, प्रेत बाधा दूर करने की कला:संघ का एनजीओ दे रहा...

मनीषा   बीएचयू के बाद एक खबर यह भी: अभी 23 सितंबर की देर रात बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में अपनी सुरक्षा की मांग के साथ शांतिपूर्ण...

बीएचयू से लेकर जेएनयू तक लड़कियों को घर बैठाने की संघी साजिश: यौन उत्पीड़न...

जेएनयू में परचम को आँचल बनाने की संघी साज़िश  नीतिशा खलखो  देश भर में महिलाओं की शिक्षा पर हमला हो रहा है, बीएचयू से लेकर जेएनयू...

पत्रकारों, वार्डनों, छात्राओं सब पर बरसायी लाठियां: बीएचयू में पुलिसिया राज

सिद्धांत मोहन  आज रविवार के दिन बीएचयू में कर्फ्यू की स्थिति बनी हुई है. मैं तीन-चार लाठियां खाने के बाद थोड़ी दूरी पर बैठा हुआ...

बीएचयू: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही लड़कियों को देर रात योगी-मोदी-त्रिपाठी की पुलिस ने घेर...

बनारस से, कलंकित बीएचयू से  क्या लिखूं? लिखूं कि पत्नी को छोड़कर आया शासक नहीं जानता बेटियों से स्नेह-राग. माँ से ममत्व का नाटक करने...

बीएचयू की बेटियों को देश भर से समर्थन

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्राओं ने छेड़छाड़ के खिलाफ पिछले कई घंटों से प्रदर्शन कर रही हैं. बीएचयू के कुलपति प्रधानमंत्री से अपने...
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भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू

इस उपन्यास को लिखते हुए मनीषा को बार—बार यह डर सताता रहा कि कभी मैं मल्लिका के बहाने हरिचंद ज्यू का जीवन ही न दोहरा दूं। निश्चित रूप से इस उपन्यास का लेखन मनीषा कुलश्रेष्ठ के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन्होंने जिस तरह इस उपन्यास में संतुलन कायम किया है, वह पाठकों के लिए हैरानी की बात है। मल्लिका बालविधवा थी और काशी अपनी मुक्ति की खोज में आई थी। उसे क्या मालूम था कि बनारस में न केवल भारतेंदु से उसका परिचय होगा बल्कि उनके प्रेम में वह डूब जाएगी।
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