खबरें

साहित्य

कला-संस्कृति

स्वास्थ्य

ISSN 2394-093X
418FansLike
783FollowersFollow
73,600SubscribersSubscribe

पढ़ी जा रही हैं

समसामयिकी

गांधी जी की राह पर राहुल गांधी, क्या उनकी तरह सफल भी होंगे?

अभी कुछ दिन पहले अरुंधति रॉय का इंटरव्यू सुन रहा था, इंटरव्यू किया था बीबीसी के लिए रूपा झा और उनकी टीम ने। अरुंधति...

राष्ट्रीय राजनीति में राहुल के बढ़ते असर से यूपी-बिहार में कांग्रेस बेअसर क्यों? 

पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का राजनीतिक प्रभामंडल निश्चय ही बढ़ा है। उनकी छवि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के एक साहसी...

जितेन्द्र सिंह : स्मृति में जीवित पत्रकारिता और समाजवादी आंदोलन का एक मूल्यवान दौर

आपातकाल के दौरान उनका तबादला ओडिशा कर दिया गया। उन्होंने नौकरी छोड़ दी और जयप्रकाश नारायण के साथ काम करने लगे। यह उनके संघर्ष का दौर था। इसी समय उन्होंने पत्रकारिता संस्थान की स्थापना की और उसके लिए मगध विश्वविद्यालय से स्वीकृति प्राप्त की। उनके संस्थान के पहले बैच के छात्र राजेश शुक्ला थे। रामवचन राय ने कहा कि राजेश शुक्ला ने इस पुस्तक का प्रकाशन कर गुरु-ऋण और पितृ-ऋण, दोनों से उऋण होने का प्रयास किया है।

अतिपिछड़ा दावेदारी सम्मेलन में 18 जिलों के प्रतिनिधि जुटे, जाति गणना और संख्यानुपातिक हिस्सेदारी पर जोर

अतिपिछड़ा दावेदारी सम्मेलन में दस सूत्री मांगों पर बनी सहमति, बिहार के सभी जिलों में चरणबद्ध सम्मेलन और जन-जागरण अभियान चलाने का संकल्प

गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़

वे बचपन में अपनी ही माँ के उस अनपेक्षित गुस्से और ज़हनी तौर पर बिठाए गए तानाशाही पहरे से किस क़दर ख़ौफ़ खाती थीं। यह रिश्ता महज़ ममता का कोई मखमली झूला नहीं था, बल्कि कलेजे को कुतर देने वाला, नियंत्रण, डर और अपने वजूद को जिंदा रखने की एक बेहद कड़वी जद्दोजहद का मैदान बन गया था। इसी दमघोंटू माहौल और माँ के उस सख़्त, निष्ठुर ढर्रे से तंग आकर आखि़रकार उन्होंने महज़ 18 बरस की उम्र में उस घर की दहलीज को हमेशा के लिए लांघ दिया।

बड़ी ख़बरें

गांधी जी की राह पर राहुल गांधी, क्या उनकी तरह सफल भी होंगे?

अभी कुछ दिन पहले अरुंधति रॉय का इंटरव्यू सुन रहा था, इंटरव्यू किया था बीबीसी के लिए रूपा झा और उनकी टीम ने। अरुंधति...

Latest Articles

लोकप्रिय