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       रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श

            हिंदी साहित्य का उत्तर मध्यकाल ही रीतिकाल के नाम से जाना जाता है‌। मुगल साम्राज्य की जड़ें जमने के बाद एक व्यवस्थित दरबारी...

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       रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श

            हिंदी साहित्य का उत्तर मध्यकाल ही रीतिकाल के नाम से जाना जाता है‌। मुगल साम्राज्य की जड़ें जमने के बाद एक व्यवस्थित दरबारी...
ISSN 2394-093X
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हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’

करुणा से भीगा प्रेम : फ़िल्म समीक्षा के बहाने फ़िल्म क्यों देखें उसके पहले “मैं वापस आऊंगा” पर सबसे पहली प्रतिक्रिया, ...

“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”

शोध सारांश भक्तिकालीन हिंदी साहित्य भारतीय साहित्य परंपरा का एक महत्वपूर्ण और सशक्त चरण है, जिसमें भक्ति, आस्था, सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति...

सूखा नशा

अक्टूबर 2011 की बात है। घर के कामों की भारी व्यस्तता के बावजूद काली ने संस्था के काम से पटना से मोतिहारी जाने का...

नाच एक संवेदनशील उपन्यास

लेखक: नवनीत नीरव  कला: नरेश पासवान प्रकाशक: एकलव्य  नाच उपन्यास एक ऐसे पात्र की कहानी है जो कहने के लिए तो शिक्षित परिवार से आता है लेकिन...

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