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परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !

सवाल है कि क्या अपने लिए परायेपन का वातावरण बनाने में सम्राट चौधरी ने खुद अपना योगदान दिया है? क्या उनके लिए एक परसेप्शन बन जाएगा कि वे सबके तो नहीं ही हैं, जैसे नीतीश कुमार सबके होने का अहसास देते थे, वे किसी के हो भी नहीं सके हैं। क्या यह अर्जित परायापन है? जब से सम्राट ने शपथ ली है तब से मीडिया का एक बड़ा तबका, समाज का एक बड़ा तबका स्थायी नहीं मान रहा है, समय-समय पर उनकी जगह दूसरा मुख्यमंत्री बनाए जाने की डेडलाइन तय करता है, जिसमें प्रशांत किशोर के बयान सहित भाजपा नेताओं की समय-समय पर टिप्पणियाँ उद्दीपन पैदा करती हैं।

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गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़

औरतों की कारगुजारियों का इतिहास अगर कभी पूरी ईमानदारी और साफ़गोई से लिखा जाएगा, तो तारीख़ के बंद पन्नों से निकलकर कई बेहद अहम...

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गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़

औरतों की कारगुजारियों का इतिहास अगर कभी पूरी ईमानदारी और साफ़गोई से लिखा जाएगा, तो तारीख़ के बंद पन्नों से निकलकर कई बेहद अहम...
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गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़

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सवाल है कि क्या अपने लिए परायेपन का वातावरण बनाने में सम्राट चौधरी ने खुद अपना योगदान दिया है? क्या उनके लिए एक परसेप्शन बन जाएगा कि वे सबके तो नहीं ही हैं, जैसे नीतीश कुमार सबके होने का अहसास देते थे, वे किसी के हो भी नहीं सके हैं। क्या यह अर्जित परायापन है? जब से सम्राट ने शपथ ली है तब से मीडिया का एक बड़ा तबका, समाज का एक बड़ा तबका स्थायी नहीं मान रहा है, समय-समय पर उनकी जगह दूसरा मुख्यमंत्री बनाए जाने की डेडलाइन तय करता है, जिसमें प्रशांत किशोर के बयान सहित भाजपा नेताओं की समय-समय पर टिप्पणियाँ उद्दीपन पैदा करती हैं।

प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन

यह एक बड़ी राजनीतिक विडंबना है। राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गाँधी लगातार सोशल जस्टिस, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की बात करते रहे हैं। कांग्रेस की वैचारिकी में एक पैराडाइम शिफ्ट" राहुल गाँधी इसी की बात करते रहे हैं। और यह भी कि दलित, आदिवासी और मुस्लिम खासतौर पर कर्नाटका में कांग्रेस के वोटर रहे हैं। कर्नाटका में दलितों की आबादी 18 प्रतिशत के करीब है और अनुसूचित जनजाति की लगभग 7 फीसद। और इस इतनी बड़ी आबादी का ज्यादातर कांग्रेस को ही वोट करती है। लेकिन फिर भी कांग्रेस कई संवेदनशील, धार्मिक, सांस्कृतिक मुद्दों पर बहुसंख्यक भावनाओं या ताकतवर जातियों के साथ खड़ी हो जाती है।

फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में

17 अक्टूबर को स्मिता पाटिल के जन्मदिन पर विशेष : रक्षा गीता  समाज बनने और उसके विकास के साथ साथ समाज में स्त्री और पुरुषों की...

ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय

--- वीरेंद्र यादव न्यूज --- पूर्व विधायक और पीरो के गांधी के नाम से चर्चित स्व. राम एकबाल सिंह वरसी की 10वीं पुण्यतिथि के...

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