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कहानी: टुकी मिसिर

अभय कुमार  बारह साल की ललिता जब किराने की दुकान पर नमक, तेल, ज़ीरा, मिर्च इत्यादि सामान ख़रीदने जाती, तो पास बैठे कुछ बूढ़े-बुज़ुर्ग, अगर...

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कहानी: टुकी मिसिर

अभय कुमार  बारह साल की ललिता जब किराने की दुकान पर नमक, तेल, ज़ीरा, मिर्च इत्यादि सामान ख़रीदने जाती, तो पास बैठे कुछ बूढ़े-बुज़ुर्ग, अगर...
ISSN 2394-093X
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जदयू में उतराधिकार : नीतीश मॉडल की नयी पटकथा

अरुण आनंद बिहार की राजनीति में वंशवाद शब्द पिछले तीन दशकों से एक खास राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल होता रहा है। जब भी...

इमाम आयतुल्लाह ख़ामेनेई से नासिरा शर्मा का साक्षात्कार

एक अत्यंत ज़हीन खूबसूरत, जिज्ञासु, तेज तर्रार और उत्साहित युवती। जिसे ईरान जाने का मौका मिला तो इंडो-ईरान संबंधों की और बहुत-सी महत्वपूर्ण...

महकार की महागाथा: लोकतंत्र का एक जीवित महाकाव्य है महकार

हमारा तो उद्देश्य था महकार के महाकाव्य के पन्नों से गुजरना, उसकी काव्यात्मकता का आनंद लेना। बहुत कुछ हम पहले से सुन चुके थे। आज फिर उकसा कर सुन रहे थे। आज देख भी रहे थे। जीतन राम मांझी बड़े अच्छे किस्सागो हैं। वे नेता नहीं होते तो साहित्यकार होते। अच्छा हुआ नेता हुए -महाकाव्य पन्नों पर नहीं, पगडंडियों पर रचा गया, घटित हुआ।जितना संभव हो सके पुराने क्षणों का रिप्लिका तैयार हो रहा था। पुराने का कुछ ढांचागत अवशेष नहीं है, लेकिन पुराने अवशेष पर ही खड़ा है सपनों का यथार्थ, वर्तमान का यथार्थ।

ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा

प्रतिमा कुमारी की ख़ास रिपोर्ट ग्रामीण बिहार के कई इलाकों में बीते कुछ वर्षों से एक खामोश लेकिन भयावह संकट फैल रहा है, जिसे स्थानीय...

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