मंडल और महिला आरक्षण

वासंती रामन ( इस सरकार में ६ महिला मंत्रियो को विशिष्ट विभागों का पदभार दिया गया है . यह लोकसभा भी महिला सदस्यों के मामले...

बेहाल गाँव, बेहाल बेटियां , गायब पौधे… धरहरा , जहाँ बेटी पैदा होने पर...

 संजीव चंदन         यह गाँव अचानक से देश -विदेश में चर्चित हो गया, जब 2010 में सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने...

प्रसंग : मोदी और दलित

तुलसीराम ( जब द्विज समूह मोदी की सत्ता की आगवानी के लिए पलक –पावडे बिछाये हुए है , तब मोदी को अति पिछडा और चाय वाला गरीब...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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