अपने ही पराभव का जश्न मनाती है स्त्रियाँ ! ( दुर्गा पूजा का...

नूतन मालवी <सत्यशोधक आन्दोलन की कार्यकर्ता, कई किताबें प्रकाशित, सत्यशोधक स्त्रीवाद नामक एक किताब प्रकाश्य.संपर्क : ई मेल- nootan.malvi@gmail.com नौ दिनों में दुर्गा की...

त्योहारों के बहुजन सन्दर्भ

नूतन मालवी  त्योहारों का सांस्कृतिक महत्व है.  वे भाईचारे, प्रेम व एकता के प्रतीक माने जाते हैं.   इनमें से कई सिन्धु घाटी की सभ्यता के...

न मार्क्सवाद, न अंबेडकरवाद, न स्त्रीवाद , बस एक्सपोजर चाहिए और मंच

सुशील मानव  देश और समाज में  नफ़रत, वैमनस्य, असहिष्णुता, हताशा और मातम का माहौल है और साहित्य में लगातार एक के बाद उत्सव मनाए जा...

महाराष्ट्र में बौद्ध विवाह क़ानून: नवबौद्ध कर रहे स्वागत और विरोध

संजीव चंदन महाराष्ट्र की भाजपा सरकार द्वारा हिन्दू विवाह क़ानून से अलग बौद्ध विवाह कानून बनाने की पहल 2015 से ही शुरू हो गयी थी,...

बहुजन सांस्कृतिक आगाज : महिषासुर शहादत दिवस

बहुजन सांस्कृतिक आगाज : महिषासुर शहादत दिवस ( चिंतक और लेखक प्रेमकुमार मणि से बातचीत, जिन्होंने ' किसकी पूजा कर रहे हैं बहुजन' लेख लिखा.'...

मेरा एक सपना है ! (मार्टिन लूथर किंग का उद्बोधन,1963)

 मार्टिन लूथर किंग, जूनियर  प्रस्तुति और अनुवाद : यादवेन्द्र    ‘मेरा एक सपना है’, 1963 में वाशिंगटन मार्टिन लूथर किंग, जूनियर द्वारा दिया गया प्रसिद्द भाषाण है, जो उन्होंने...

विमर्श नहीं, विचारधारा : अस्मितावाद की जगह आंबेडकर-चिंतन

बजरंग बिहारी तिवारी बजरंग बिहारी तिवारी हिंदी के प्रसिद्द आलोचक हैं।  दलित मुद्दों पर इनकी प्रतिबद्धता जगजाहिर है और यही इनके आलोचकीय व्यक्तिव की...

इस दुनिया को जितनी जल्दी हो बदल देना चाहिए

सीमा आज़ाद ये आंखें हैं तुम्हारी तकलीफ का उमड़ता हुआ समन्दर इस दुनिया को जितनी जल्दी हो बदल देना चाहिए गोरख पाण्डे की ये कविता 16 दिसम्बर से ही बार-बार जेहन...

डॉक्टर मनीषा बांगर ‘वायस ऑफ पीपल’ सम्मान से हुईं सम्मानित !

 राजीव कुमार सुमन    14 सिंतबर 2018 को दिल्ली के माता सुंदरी रोड पर स्थित एवान-ए-गालिब ऑडिटोरियम में पल-पल न्यूज वेब पोर्टल की तरफ से...
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कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।