सामाजिक क्रांति के लिए आवश्यक सावित्रीबाई फुले के महत्वपूर्ण दस्तावेज

विद्याभूषण रावत  सावित्री बाई जोतिबा  फुले भारतीय इतिहास में सर्वोत्तम युगल के तौर पर कहे जा सकते है. भारतीय समाज में यदि फुले दम्पति के...

जहां ईश्वर है और अन्य कविताएं (वीरू सोनकर)

वीरू सोनकर कविता एवं कहानी लेखन, विभिन्न पत्र पत्रिकाओं व ब्लाग्स पर रचनाएं प्रकाशित . संपर्क :[email protected], 7275302077 जहाँ ईश्वर है  प्रार्थना के पीछे पहले...

स्त्रीवाद की ` रिले रेस `में रमणिका गुप्ता का बेटन

नीलम कुलश्रेष्ठ जिंदगी की तनी डोर, ये स्त्रियाँ, परत दर परत स्त्री सहित कई किताबें प्रकाशित हैं. सम्पर्क:  [email protected], स्त्रियों की जागृति  का इतिहास सवा सौ साल...

स्त्रीकाल द्विमासिक ई जर्नल (शोध), अंक 27-28 ( दिसम्बर मार्च )

स्त्रीकाल शोध द्विमासिक का यह दिसम्बर-मार्च अंक है. अंक 27-28. इस अंक में .दीनानाथ मौर्य,  अनिता शुक्ल, अंजली पटेल, रतन लाल,विकल सिंह, सीमा मिश्रा,...

दुश्मनी से परे जन की बात: पाकिस्तानी जनांदोलन की किताब

 “पीपल्स  मूवमेंट्स इन पाकिस्तान’” पर एक चर्चा इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के कांफ्रेंस हॉल में, आठ फरवरी को रखी गई. पुस्तक पाकिस्तान के जाने माने...

महिलाओं को संसद में होना ही चाहिए : वेंकैया नायडू

नवल कुमार उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने  को कहा कि महिलाओं को अवसर दीजिये और देखिये कि वे किस तरह खुद को साबित करती हैं. वे...

“आम औरत की दैहिक या मानसिक यातना के लिए दहकते सवाल“

नीलम कुलश्रेष्ठ जिंदगी की तनी डोर, ये स्त्रियाँ, परत दर परत स्त्री सहित कई किताबें प्रकाशित हैं. सम्पर्क:  [email protected],  आदरणीय सुधा अरोडा जी की पुस्तक मंगाने से...

स्त्रीकाल (अक्टूबर-दिसंबर) पढ़ें नॉटनल पर

स्त्रीकाल का ताजा अंक (अक्टूबर-दिसंबर) नॉटनल पर. ऑनलाइन पढ़ने के लिए सबसे नीचे दिये गए लिंक को क्लिक करें:  ताजा अंक में संसद के दोनो सदनों में...

स्त्रीकाल द्विमासिक ई जर्नल (शोध), अंक 26 (अक्टूबर -नवंबर, 2017)

स्त्रीकाल द्विमासिक ई जर्नल (शोध), अंक 26 (अक्टूबर -नवंबर, 2017) (संशोधित) by Streekaaleditor on Scribd

‘दलित’ शब्द दलित पैंथर आंदोलन के इतिहास से जुड़ा है: रामदास आठवले

'दलित' शब्द पर प्रतिबंध के खिलाफ सरकार के मंत्री आठवले  केरल सरकार ने दलित और हरिजन शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. सरकार...
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अम्बेडकर की प्रासंगिकता के समकालीन बयान

महितोश मंडल का कहना है कि विश्वविद्यालयों में दुनिया भर के तमाम चिन्तक पढ़ाए जाते हैं पर अम्बेडकर की सतत अनुपस्थिति और बहिष्करण की राजनीति के पीछे अम्बेडकर के प्रति ब्राह्मणवाद की घृणा है, और यह घृणा दुश्चिंता से उपजी है. दरअसल अम्बेडकर ने हिन्दू धर्म और ब्राह्मण सभ्यता के विरुद्ध कोई आधारहीन शोर-गुल नहीं किया है, बल्कि वे कानून के विद्यार्थी थे और बहुत ही तर्कपूर्ण व प्रासंगिक ढ़ंग से उन्होंने ब्राह्मणवाद की आलोचना प्रस्तुत की है. यदि युवा विद्यार्थी अम्बेडकर के आमूल परिवर्तनवादी विचारों को गंभीरता से पढ़ना शुरू करें, तो अकादमिक जगत से लेकर राजनीति, अर्थव्यवस्था, मीडिया, साहित्य, सिनेमा, और इत्यादि तक फैले राष्ट्र-व्यापी ब्राह्मणवादी साम्राज्य को भयंकर चुनौती मिलेगी.
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