नाक की फुरूहुरी: सोनी पांडेय कहानी

सोनी  पांडेय सोनी पांडेय लगातार लोक जीवन और ग्रामीण स्त्री-जीवन की प्रभावशाली कहानियाँ लिख रही हैं. ऐसे समय में जब महिला लेखन में यह परिवेश लगभग...

दस द्वारे का पिंजरा: स्त्री मुक्ति की संघर्ष गाथा

अनामिका कृत ‘दस द्वारे का पिंजरा’ उपन्यास सन् 2008 को प्रकाशित हुआ। इस उपन्यास में नये प्रयोगों के कारण अनामिका जी को कई पुरस्कारों...

स्त्रीवाद की ` रिले रेस `में रमणिका गुप्ता का बेटन

नीलम कुलश्रेष्ठ जिंदगी की तनी डोर, ये स्त्रियाँ, परत दर परत स्त्री सहित कई किताबें प्रकाशित हैं. सम्पर्क:  .kneeli@rediffmail.com, स्त्रियों की जागृति  का इतिहास सवा सौ साल...

आपहुदरी : रमणिका गुप्ता की आत्मकथा : दूसरी किस्त

रमणिका गुप्ता रमणिका गुप्ता स्त्री इतिहास की एक महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं . वे आदिवासी और स्त्रीवादी मुद्दों के प्रति सक्रिय रही हैं . 'युद्धरत...

पितृसत्तात्मक हादसों से मुठभेड़ करती लेखिका की आत्मकथा: ‘हादसे’

स्त्री को सदा से पुरुष की अनुगामिनी बनकर जीवन जीने की शिक्षा दी जाती है। स्त्री  का लक्षमण रेखा लाँघना समाज के तथाकथित पहरेदारों...

हिन्दी साहित्य में अस्मितामूलक विमर्श विशेष संदर्भःस्त्री अस्मिता

अजय कुमार यादव अजय कुमार यादव, शोधर्थी , जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली . संपर्क :ajjujnu@gmail.com Mobile no.8882273975 पिछले कुछ दशकों में विचारधारा और चिन्तन की...

हिंदी उपन्यास और थर्ड जेंडर

भावना मासीवाल भावना मासीवाल महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय में शोध छात्रा हैं.   संपर्क :bhawnasakura@gmail.com; हमारा पूरा समाज दो स्तम्भों पर खड़ा है...

सुशीला टाकभौरे की कविताओं में दलित और स्त्री प्रश्न

रेखा सेठी   हिंदी विभाग, इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय, दिल्ली वि वि, में एसोसिएट प्रोफेसर. विज्ञापन डॉट कॉम सहित आधा दर्जन से अधिक आलोचनात्मक और...

विकल सिंह की कवितायें

विकल सिंह गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय में शोधरत है. . संपर्क: vikalpatel786@gmail.com मो: 07897551642 आदिवासी स्त्री “वह सभ्य समाज की जड़ता को सिंचित करती नक्कासी में, न धर्म-भेद का ज्ञान...
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लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।