दलितस्त्रीवाद

आदिवासियों का पत्थलगड़ी आंदोलन: संघ हुआ बेचैन, डैमेज कंट्रोल को आगे आये भागवत

झारखंड, छत्तीसगढ़ के आदिवासी पत्थलगड़ी की अपनी पुरानी परम्परा का नये रूप में अपने अधिकारों को स्थापित करने के लिए राजनीतिक रूप से इस्तेमाल...

इकाई नही मैं करोड़ो पदचाप हूँ मैं: रजनी तिलक की काव्य-चेतना

अनिता भारती  रजनी तिलक  होतीं तो आगामी 27 मई को 60वां सालगिरह मना रही होतीं. पिछले 30 मार्च 2018 को उनका परिनिर्वाण हो गया. प्रथमतः सामाजिक...

छः दलित महिलाओं की पहल: सामुदायिक पत्रिका नावोदयम

नूतन यादव  छः दलित महिलाओं द्वारा की जा रही सामुदायिक पत्रकारिता के बारे में बता रही हैं नूतन यादव:  हाशिये के समाज से जुड़े गंभीर मुद्दे ...

मुश्किल डगर को आसान बनाया दलित महिला उद्यमी कृष्णा कुमारी ने

राजीव सुमन साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली दलित महिला उद्यमी की कहानी कह रहे हैं राजीव सुमन. डिक्की (दलित इन्डियन चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड...

आदिवासी युवती की हत्या को आत्महत्या करार देने की पुलिसिया साजिश (सामूहिक बलात्कार की...

किसके दवाब में वर्धा, महाराष्ट्र  की पुलिस, महिला एसपी सहित, आदिवासी युवती की हत्या को आत्महत्या करार देने में लगी है? लाश जिस हालत...

दलित स्त्रीवाद अंतरजातीय विवाह को सामाजिक बदलाव का अस्त्र मानता है -रजनी...

दलित स्त्रीवाद की सशक्त प्रवक्ता,  दलित और स्त्री सामाजिक आन्दोलन की प्रखर प्रतिनिधि एवं लेखिका रजनीतिलक से अरुण कुमार प्रियम की बातचीत. यह बातचीत...

सामाजिक क्रांति के लिए आवश्यक सावित्रीबाई फुले के महत्वपूर्ण दस्तावेज

विद्याभूषण रावत  सावित्री बाई जोतिबा  फुले भारतीय इतिहास में सर्वोत्तम युगल के तौर पर कहे जा सकते है. भारतीय समाज में यदि फुले दम्पति के...

अभी तो बहुत कुछ शेष था ! (रजनी तिलक का असमय जाना)

संजीव चंदन अलग-अलग सरोकारों के लोग, वामपंथी लेखक और एक्टिविस्ट, अम्बेडकरवादी लेखक और एक्टिविस्ट, सामाजिक संस्थाओं के लोग, महिला अधिकार के कार्यकर्ता, एलजीबीटी समूह की...

स्त्रीवाद की ` रिले रेस `में रमणिका गुप्ता का बेटन

नीलम कुलश्रेष्ठ जिंदगी की तनी डोर, ये स्त्रियाँ, परत दर परत स्त्री सहित कई किताबें प्रकाशित हैं. सम्पर्क:  .kneeli@rediffmail.com, स्त्रियों की जागृति  का इतिहास सवा सौ साल...

पेरियार: महिलाओं की आजादी का पक्षधर मसीहा

ललिता धारा  महिला दिवस पर विशेष  पेरियार की मूर्ति को नुकसान पहुंचना समतावादी आंदोलन और विचार के प्रति प्रतिगामियों के गुस्से की बानगी है. आइये आज...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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