दलितस्त्रीवाद

दलित छात्रा ने की आत्महत्या मोदी सरकार के फैसले को कोर्ट में उसने दी...

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में बहस करने वाली तमिलनाडु के अरियालुर जिले की दलित लड़की अनीथा  ने...

सावित्रीबाई फुले-स्त्री संघर्षो की मिसाल

सुजाता पारमिता सावित्रीबाई फुले (3 जनवरी 1831-10 मार्च 1897) के संघर्षो पर आज भारतीय स्त्री संगठनों में चर्चा की जा रही है। लगभग डेढ़ सौ साल...

नैन्सी तुम मारी नहीं गई तुम तो यूपीएससी टॉप कर रही हो, सीबीएसई टॉप...

संपादकीय नैन्सी, मैं कई दिनों से तुम्हारे मारे जाने की खबर पढ़ रहा था, सोशल मीडिया में तुम्हारे मृत शरीर पर की गई हैवानियत की तस्वीरों...

स्त्रीवादी आंबेडकर की खोज

आज 14 अप्रैल, 2016 को देश बाबा साहेब डा. आंबेडकर की 125 वीं  जयन्ती मना रहा है . डा. बाबा साहेब आंबेडकर इस देश...

रंगकर्मियों से बलात्कार : क्या बलात्कारी पीड़िता को खुद सही-सलामत वापस छोड़ते हैं? आदिवासी...

विक्रम कुमार  रांची के खूंटी जिले के कोचांग में नुक्कड़ नाटक करने गयीं रंकर्मियों के साथ बलात्कार की घटना ने रंगकर्म की दुनिया और देश...

सावित्रीबाई फुले : शैक्षिक –सामाजिक क्रान्ति की अगुआ

आज भारत की आद्यशिक्षिका सावित्री बाई फुले का जन्मदिन है. आज के इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए ....

आदिवासी युवती की हत्या को आत्महत्या करार देने की पुलिसिया साजिश (सामूहिक बलात्कार की...

किसके दवाब में वर्धा, महाराष्ट्र  की पुलिस, महिला एसपी सहित, आदिवासी युवती की हत्या को आत्महत्या करार देने में लगी है? लाश जिस हालत...

पूर्ण शराबबंदी के लिए प्रतिबद्ध वड़ार समाज की बेटी संगीता पवार

नितिन राउत  'स्त्री नेतृत्व की खोज’ श्रृंखला के तहत नितिन राउत परिचित करा रहे हैं संगीता पवार से. घूमंतू जनजाति वड़ार समुदाय से आने वाली संगीता...

दलित महिला कारोबारी का संघर्ष

'स्त्री नेतृत्व की खोज’ श्रृंखला के तहत दलित महिला कारोबारी के संघर्ष और उनकी उपलब्धियों से रू-ब-रू करा रहे हैं  पत्रकार नितिन राउत. कमानी ट्यूब्स  की...

‘डेंजर चमार’ की गायिका गिन्नी माही का प्रतिरोधी स्वर : हमारी जान इतनी सस्ती...

कौशल कुमार   'द डेंजर चमार' अल्बम के माध्यम से गिन्नी  माही के गीतों में  प्रतिरोध की अभिव्यक्ति का अध्ययन: प्रतिरोध के रूप में प्रदर्शन-  असंतोष से...
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रजनी दिसोदिया की आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

इस किताब में सलीके से कही गयी बातों को हमें कक्षाओं में लेकर जाना चाहिए। जाति के मुद्दे को पाठ्यक्रम में न लाना भी एक साज़िश है। लेखिका की दृष्टि दलित या स्त्री विमर्श तक नहीं बल्कि कहीं अधिक व्यापक है। उनकी विनम्र शैली लोगों को जोड़ने का काम करती है। इन लेखों में ताऱीख भी देनी चाहिए जिससे उनकी वैचारिक यात्रा को पाठक समझ सके। यह पुस्तक दलित चेतना को विस्तार देती है।
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