स्त्रीकाल का नया अंक ऑनलाइन पढ़ें या घर मँगवायें

स्त्रीकाल घर मँगवायें लिंक क्लिक करें और द मार्जिनलाइज्ड पब्लिकेशन के वेबसाईट से ऑर्डर करें, सदस्य बनें : एक प्रति के लिए 25 रूपये शिपिंग चार्ज अलग से देना होगा

अम्बेडकर की प्रासंगिकता के समकालीन बयान

महितोश मंडल का कहना है कि विश्वविद्यालयों में दुनिया भर के तमाम चिन्तक पढ़ाए जाते हैं पर अम्बेडकर की सतत अनुपस्थिति और बहिष्करण की राजनीति के पीछे अम्बेडकर के प्रति ब्राह्मणवाद की घृणा है, और यह घृणा दुश्चिंता से उपजी है. दरअसल अम्बेडकर ने हिन्दू धर्म और ब्राह्मण सभ्यता के विरुद्ध कोई आधारहीन शोर-गुल नहीं किया है, बल्कि वे कानून के विद्यार्थी थे और बहुत ही तर्कपूर्ण व प्रासंगिक ढ़ंग से उन्होंने ब्राह्मणवाद की आलोचना प्रस्तुत की है. यदि युवा विद्यार्थी अम्बेडकर के आमूल परिवर्तनवादी विचारों को गंभीरता से पढ़ना शुरू करें, तो अकादमिक जगत से लेकर राजनीति, अर्थव्यवस्था, मीडिया, साहित्य, सिनेमा, और इत्यादि तक फैले राष्ट्र-व्यापी ब्राह्मणवादी साम्राज्य को भयंकर चुनौती मिलेगी.

स्त्रीकाल शोध जर्नल अंक (31)

इस अंक के लेखक: पूजा तिवारी, गंगा सहाय मीणा, डॉ. अनीता शुक्ल, महमुदा खानम, डॉ. अखिलेश गुप्ता, सुशील कुमार, स्वाति चौधरी, कंचन...

स्त्रीकाल शोध पत्रिका अंक (30)

इस अंक के लेखक: पल्लवी, राहुल,शशांक शुक्ला, पूजा, सुबोधकांत, ज्योतिशर्मा, सत्यप्रकाश, शाइस्ता सैफी,आरती, ललिता बघेल, प्रोफेसर सुधा, जीतेन्द्र, आरती, माधवी धुर्वे, विनीत सिंह, मो...

स्त्रीकाल शोध पत्रिका अंक (28-29)

स्त्रीकाल शोध पत्रिका ऑनलाइन  का यह अंक  28-29 है. इस अंक में भारती शुक्ला, ज्योति कुमारी, अंजली, पूनम प्रसाद, डॉ. तूबा जमाल, डॉ. सुनीता...

सामाजिक क्रांति के लिए आवश्यक सावित्रीबाई फुले के महत्वपूर्ण दस्तावेज

विद्याभूषण रावत  सावित्री बाई जोतिबा  फुले भारतीय इतिहास में सर्वोत्तम युगल के तौर पर कहे जा सकते है. भारतीय समाज में यदि फुले दम्पति के...

जहां ईश्वर है और अन्य कविताएं (वीरू सोनकर)

वीरू सोनकर कविता एवं कहानी लेखन, विभिन्न पत्र पत्रिकाओं व ब्लाग्स पर रचनाएं प्रकाशित . संपर्क :veeru_sonker@yahoo.com, 7275302077 जहाँ ईश्वर है  प्रार्थना के पीछे पहले...

स्त्रीवाद की ` रिले रेस `में रमणिका गुप्ता का बेटन

नीलम कुलश्रेष्ठ जिंदगी की तनी डोर, ये स्त्रियाँ, परत दर परत स्त्री सहित कई किताबें प्रकाशित हैं. सम्पर्क:  .kneeli@rediffmail.com, स्त्रियों की जागृति  का इतिहास सवा सौ साल...

स्त्रीकाल द्विमासिक ई जर्नल (शोध), अंक 27-28 ( दिसम्बर मार्च )

स्त्रीकाल शोध द्विमासिक का यह दिसम्बर-मार्च अंक है. अंक 27-28. इस अंक में .दीनानाथ मौर्य,  अनिता शुक्ल, अंजली पटेल, रतन लाल,विकल सिंह, सीमा मिश्रा,...

दुश्मनी से परे जन की बात: पाकिस्तानी जनांदोलन की किताब

 “पीपल्स  मूवमेंट्स इन पाकिस्तान’” पर एक चर्चा इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के कांफ्रेंस हॉल में, आठ फरवरी को रखी गई. पुस्तक पाकिस्तान के जाने माने...

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।