अरुणा शानबाग सिर्फ बलात्कार पीडिता ही नहीं थी

अरुणा शानबाग सिर्फ बलात्कार पीडिता ही नहीं थी . पिछले 42  सालों में वह समाज के सामने एक सवाल थी, एक आईना थी. बलात्कार...

वह आत्मीय और दृष्टिसंपन्न संपादक हमें अलविदा कह गयी

अनिता भारती जानी मानी लेखिका, दलित आदिवासी और स्त्री लेखन की सशक्त पैरोकार रमणिका गुप्ता जी छब्बीस मार्च...

यह सफर आजादी का है

वर्षा सिंह   आईएमएस गजियाबाद कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर। 13 वर्षों तक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कार्य-अनुभव. संपर्क :bareesh@gmail.com महिलाओं के खिलाफ हिंसा से जुड़ी...

युवती की आत्महत्या की रिपोर्टिंग कर रहे दलित पत्रकार को ही पुलिस ने किया...

स्त्रीकाल डेस्क  महाराष्ट्र के अमरावती जिले के पत्रकार प्रशांत कांबले को मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने अभी हाल में किया था सम्मानित, लेकिन फडनवीस की पुलिस...

1990 के बाद का हिंदी समाज और अद्विज हिंदी लेखन

प्रमोद रंजन  संपादक,फारवर्ड प्रेस. बहुजन साहित्य की अवधारणा सहित चार अन्य किताबें प्रकाशित. ईमेल आईडी janvikalp@gmail.com 1990 का दशक वैश्विक परिदृश्य अनेक सकारात्मक-नकारात्मक परिवर्तनों...

सम्मानित होंगे रवीश कुमार

मनीषा कुमारी  इस वर्ष पत्रकारिता जगत में एक प्रतिष्ठित पुरस्कार योजना की शुरुआत गांधी शान्ति प्रतिष्ठान और कुलदीप नैयर के सहयोग से हुई है. इस...

देश के सबसे बड़े अस्पताल (एम्स) में मेडिकल दलाल सक्रिय: कर्मचारियों की मिलीभगत

यह रिपोर्ट एक फैक्ट चेक है एम्स (ऑल इण्डिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल सायसेंज) का स्वास्थ्य मंत्री के उस बयान के बाद कि एम्स के...

तुम्हारी माँ भी छेड़छाड़ की शिकार हुई, बेटों तुम्हें जानना चाहिए औरत की देह...

स्त्रीकाल डेस्क  विश्व मुक्केवाजी चैम्पियनशिप में छठा स्वर्ण पदक जीतने वाली मैरी कॉम ने अपने साथ हुई यौन हिंसा और नस्लीय उत्पीड़न के बारे में...

सखी का सखी को प्रेम पत्र: खुल गई बेडियां!

यशस्विनी पाण्डेय प्यारी सखी , वैसे तो आमतौर पर मै पत्र लिखते हुए कोई संबोधन नहीं देती, क्योंकि ये मेरा पत्र लिखने का अपना आइकॉन है....

उन दिनों मम्मी की जगह बुआ या चाची खाना देती थी

नीतीश के एस   लेखक सामाजिक कार्यकर्ता हैं. संपर्क:9650280564 स्त्रियों के लिए माहवारी को टैबू बनाया जाना सामाजिक-सांस्कृतिक प्रक्रिया है. इसे गोपनीय,  टैबू और लज्जा का...

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कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।