न मार्क्सवाद, न अंबेडकरवाद, न स्त्रीवाद , बस एक्सपोजर चाहिए और मंच

सुशील मानव  देश और समाज में  नफ़रत, वैमनस्य, असहिष्णुता, हताशा और मातम का माहौल है और साहित्य में लगातार एक के बाद उत्सव मनाए जा...

तुम्हारी माँ भी छेड़छाड़ की शिकार हुई, बेटों तुम्हें जानना चाहिए औरत की देह...

स्त्रीकाल डेस्क  विश्व मुक्केवाजी चैम्पियनशिप में छठा स्वर्ण पदक जीतने वाली मैरी कॉम ने अपने साथ हुई यौन हिंसा और नस्लीय उत्पीड़न के बारे में...

बेपढ़ ऐंकरों द्वारा दलित साहित्य पर हमले की नाकाम कोशिश अर्थात साहित्य आजतक

सुशील मानव साहित्य आज तक के दूसरे संस्करण में प्रगतिशीलता, सहिष्णुता, साहित्य, वामपंथी विचारधारा, स्त्री विमर्श और दलित विमर्श निशाने पर रहे। दलित लेखन...

तानाशाह के खिलाफ वह खूबसूरत शख्सियत, हमें भी पढ़ा गयी पाठ!

संध्या नवोदिता फहमीदा रियाज़ से मेरा पहला परिचय उनकी कविताओं से हुआ था। उनसे आमने-सामने मिलने से पहले उनकी नज़्में लाखों पाठकों की तरह मेरे...

भिखारी ठाकुर की तुलना शेक्सपियर से करना भिखारी ठाकुर का अपमान है

आँचल  अंग्रेजी साहित्य की शोधार्थी आंचल भिखारी ठाकुर की तुलना शेक्सपियर से किये जाने को भिखारी ठाकुर का  अपमान बता रही हैं. इस टिप्पणी के अनुसार...

यौन स्वतंत्रता, कानून और नैतिकता (अरविन्द जैन)

वर्तमान भारतीय समाज का राजनीतिक नारा है 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ', मगर सामाजिक-सांस्कृतिक आकांक्षा है 'आदर्श बहू'।वैसे भारतीय शहरी मध्य वर्ग को 'बेटी नहीं...

राजनीति का अपराधीकरण और अपराध का राजनीतिकरण

अरविंद जैन सुप्रीम कोर्ट के पाँच न्यायमूर्तियों (दीपक मिश्रा, नरीमन खानविलकर, धनन्जय चंद्रचूड, इंदु मल्होत्रा) की संविधान पीठ का निर्णय (25.9.2018) है कि अदालत उन...

काश ! ऐसी पत्नियाँ, बहनें समाज का अधिकतम सच हो जायें!

ज्योति प्रसाद क्या आपको मदर इण्डिया फिल्म का अंतिम दृश्य याद है? क्या आपको राधा, जिसका किरदार हिंदी सिनेमा की अदाकारा नरगिस ने निभाया था,...

मन की बात और स्वच्छता की ढोंग वाली सरकार ज़रा हम सफाई कर्मियों का...

सुशील मानव अंबेडकर महासभा द्वारा सफाईकर्मियों की सीवर में मौत के खिलाफ़ 25 सितंबर को देशव्यापी आंदोलन के आह्वान पर ‘सफाई कर्मचारी यूनियन दिल्ली’ की...

डॉक्टर मनीषा बांगर ‘वायस ऑफ पीपल’ सम्मान से हुईं सम्मानित !

 राजीव कुमार सुमन    14 सिंतबर 2018 को दिल्ली के माता सुंदरी रोड पर स्थित एवान-ए-गालिब ऑडिटोरियम में पल-पल न्यूज वेब पोर्टल की तरफ से...

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।