अथ (साहित्य: पाठ और प्रसंग)

अनुपमा शर्मा दिल्ली विश्वविद्यालय की शोधार्थी। कविताएं, समीक्षाएं, आलेख-पाठ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।सम्पर्क : anupamasharma89@gmail.com पिछले दिनों आलोचक राजीव रंजन गिरि की पुस्तक ‘अथ (साहित्य :...

हिंदी उपन्यास और थर्ड जेंडर

भावना मासीवाल भावना मासीवाल महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय में शोध छात्रा हैं.   संपर्क :bhawnasakura@gmail.com; हमारा पूरा समाज दो स्तम्भों पर खड़ा है...

मनुस्मृतिः जेंडर हिंसा का कानूनी ग्रंथ

सर्वेश पांडेय सर्वेश पांडेय ने स्त्री अध्ययन में शोध किया है , अभी महिला आयोग में कार्यरत हैं . संपर्क : मोबाइल न.- 08756754651 भारतीय...

दलित स्त्रियाँ खुद लिखेंगी अपना इतिहास

हेमलता हेमलता ने 'दलित अस्मिता और शिक्षा' पर शोध किया है.सम्पर्क :hmdehrwal@gmail.com अनिता भारती आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। अपने तीखे और सटीक शब्दों...

एक नई ‘दस्तक’

 अनंत विजय पालीवाल  ( अरुण कुमार प्रियम की सद्य प्रकाशित पुस्तक ' पितृसत्ता और साहित्'  की समीक्षा कर रहे हैं डा. आम्बॆडकर विश्वविद्यालय के शोधार्थी...

स्त्री विमर्श की पठनीय किताबें

( स्त्री अध्ययन आज भारत में भी एक अकादमिक हकीकत है . विभिन्न विश्वविद्यालयों के स्त्री -अधययन विभागों में अलग -अलग भाषा माध्यमों में...
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भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू

इस उपन्यास को लिखते हुए मनीषा को बार—बार यह डर सताता रहा कि कभी मैं मल्लिका के बहाने हरिचंद ज्यू का जीवन ही न दोहरा दूं। निश्चित रूप से इस उपन्यास का लेखन मनीषा कुलश्रेष्ठ के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन्होंने जिस तरह इस उपन्यास में संतुलन कायम किया है, वह पाठकों के लिए हैरानी की बात है। मल्लिका बालविधवा थी और काशी अपनी मुक्ति की खोज में आई थी। उसे क्या मालूम था कि बनारस में न केवल भारतेंदु से उसका परिचय होगा बल्कि उनके प्रेम में वह डूब जाएगी।
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