एक बम तो मैं भी फोङूँगी ही

चंद्रभान    शोधार्थी, जेएनयू.   इतिहास एवं साहित्य में रुचि के साथ-साथ थिएटर भी।संपर्क : saahir2000@gmail.com एक बम तो, मैं भी फोङूँगी ही उस दिन क्या हुआ...

“आम औरत की दैहिक या मानसिक यातना के लिए दहकते सवाल“

नीलम कुलश्रेष्ठ जिंदगी की तनी डोर, ये स्त्रियाँ, परत दर परत स्त्री सहित कई किताबें प्रकाशित हैं. सम्पर्क:  .kneeli@rediffmail.com,  आदरणीय सुधा अरोडा जी की पुस्तक मंगाने से...

अविनाश मिश्र की चार कवितायें : बदसूरत औरत की जरूरत और अन्य

अविनाश मिश्र युवा कवि अविनाश मिश्र तीक्ष्ण धार और गहरी सम्वेदना के कवि हैं. संपर्क : darasaldelhi@gmail.com 1. बदसूरत औरत की जरूरत  उस दोपहर वह...

कुमकुम में लिपटी औरते

सुनीता झाड़े सुनीता झाड़े मराठी और हिन्दी में कविताएँ  लिखती हैं  तीन मराठी कविता संग्रह प्रकाशित संपर्क: commonwomen@gmail.com एक डोर बेल बजाने के कोई तीसरी चौथी बार...

क्रान्ति

राज वाल्मीकि  युवा रचनाकार , सामाजिक कार्यकर्ता rajvalmiki71@gmail.com ‘‘आप सभी साथियों को जयभीम ! मेरा नाम क्रान्ति है. मैं उन्नीस साल की लड़की हूं....

अशोक कुमार पाण्डेय की कवितायें

अशोक कुमार पाण्डेय सोशल मीडिया में बेवाक सक्रिय अशोक कुमार पाण्डेय बेहद संवेदनशील कवि हैं. संपर्क :ashokk34@gmail.com कहां होंगी जगन की अम्मा ? सतरंगे प्लास्टिक...

नाम जोती था मगर वे ज्वालामुखी थे

महात्मा जोतीबा  फुले की जयंती  (11 अप्रैल ) पर विशेष....  मनीषा बांगर और डा. जयंत चंद्रपाल  इनका जीवनक्रम ज्योति था बिलकुल ज्योति की तरह अन्धकार को...

आज़ादी मेरा ब्रांड उर्फ कोई वक्त गलत नहीं होता

विजेन्द्र सिंह चौहान  क्या कभी चाय की दुकान पर, नुक्कड़ पर , कचौड़ी के ठेले पर किसी स्त्री को अकेले चाय , कचौड़ी और नुक्कड़...

आलोक धन्वा, ध्रुव गुप्त, निवेदिता समेत अधिकांश साहित्यकारों ने किया ‘बिहार संवादी’ (दैनिक...

सुशील मानव दैनिक जागरण ने प्रो-रेपिस्ट पत्रकारिता का बेहद ही अश्लील नमूना पेश करते हुए अपनी कल के चंड़ीगढ़,पटना,दिल्ली,लखनऊ, जम्मू संस्करणों में छापे गए आधारहीन...

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।