बिहार की सावित्रीबाई फुले कुन्ती देवी की कहानी

इस किताब में कुन्ती देवी-केशव दयाल मेहता की पुत्री पुष्पा कुमारी मेहता ने अपने माता-पिता की जीवनचर्या के बहाने भारत के निर्माण की जटिल प्रक्रिया को अनायास तरीके से दर्ज किया है. यह एक ऐसी कहानी है, जो अपनी ओर से कुछ भी आरोपित नहीं करती

विज्ञान के क्षेत्र में लडकियां क्यों कम हैं ?

सुशील शर्मा  लड़कियों  भावनात्मक रूप से लड़कों की अपेक्षा ज्यादा मजबूत होती हैं ,किन्तु वे आधुनिक तकनीकी एवं विज्ञान के विषयों की अपेक्षा परम्परागत विषयों...

आदिवासी गरीब स्त्रियों का ‘शिकार’ करके भी जनवादी कहलाने वाले कलाकार की आत्मकथा (!)

 मंजू शर्मा हिन्दी की शिक्षिका,  सोशल मीडिया में सक्रिय. सम्पर्क:  manjubksc@gmail.com रामशरण जोशी जी आप साहित्य की दुनिया में किसी परिचय के मोहताज नहीं।यूँ भी अपनी...

बहन भी तो मेट्रो ले रही होगी इस वक्त

सिद्धार्थ प्रियदर्शी क्रिएटिव राइटर और फिल्मों और सीरियल्स में सक्रिय लेखन।संपर्क: 9718277003 शाम 6 बजे ऑफिस छूटने के बाद की भारी भीड़ में 17 मिनट...

क्रान्ति के कपड़े

अर्चना वर्मा अर्चना वर्मा प्रसिद्ध कथाकार और स्त्रीवादी विचारक हैं.  ई मेल :  mamushu46@gmail.com 2007 के अन्तरराष्ट्रीय -वाणिज्य-मेले के समय 'हिन्दुस्तान टाइम्स' में एक...

हनीप्रीत की खबर नहीं सेक्स फंतासी बेच रही मीडिया

स्वरांगी साने वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार और अनुवादक विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित. संपर्क : swaraangisane@gmail.com मीडिया में हनीप्रीत की खबरें एक महीने से अलग-अलग एंगल और...

क्या इसे ही जंगलराज कहते है योगी जी

योगी जी इधर आप रोमियो स्क्वैड बना रहे हैं  उधर आपके राज्य के दबंग बलात्कार पीडिता को तेज़ाब पिला रहे हैं. क्या इसी को...

औरत ’चुप‘ रहे, तभी ’महान‘ है

सुधा अरोड़ा  आज स्त्रीकाल के पाठकों के लिए सुधा अरोड़ा की एक छोटी सी टिप्पणी जो १९९७ में जनसत्ता में छपी थी . यह टिप्पणी...

अपने ही घर में खतरों से घिरी बेटियां

अरविंद जैन स्त्री पर यौन हिंसा और न्यायालयों एवम समाज की पुरुषवादी दृष्टि पर ऐडवोकेट अरविंद जैन ने मह्त्वपूर्ण काम किये हैं. उनकी किताब...

धर्म की खोखली बुनियादों में दबी स्त्री

वसीम अकरम वसीम अकरम युवा पत्रकार हैं . इन दिनों प्रभात खबर में कार्यरत हैं. संपर्क : ई -मेल : talk2wasimakram@gmail.com : 9899170273  संस्कृति,...

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कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।