पैसे की हवस विरासत में मिली थी हंटर वाले अंकल ‘ब्रजेश ठाकुर’ को !

वीरेन नंदा मुजफ्फरपुरकाण्ड के मुख्य सरगना ब्रजेश ठाकुर के अन्तःपुर की कहानी बता रहे हैं वरिष्ठ साहित्कार वीरेन नंदा. वीरेन नंदा अयोध्या प्रसाद खत्री सम्मान...

बेपढ़ ऐंकरों द्वारा दलित साहित्य पर हमले की नाकाम कोशिश अर्थात साहित्य आजतक

सुशील मानव साहित्य आज तक के दूसरे संस्करण में प्रगतिशीलता, सहिष्णुता, साहित्य, वामपंथी विचारधारा, स्त्री विमर्श और दलित विमर्श निशाने पर रहे। दलित लेखन...

बलात्कारी परिवेश में रक्षाबंधन पर एक बहन का नोट्स:

ज्योति प्रसाद अपने समय से कट जाना बड़ा ही मुश्किल काम है. और जो लोग इस तरह से कट जाने में सफल रहते हैं वास्तव में...

एक ‘अच्छी औरत’, स्मृति ईरानी के पक्ष में ( खुला ख़त , सेवा में...

संजीव चंदन दोस्तो, आज यह पत्र दो बजे रात को लिख रहा हूँ , एक दुश्मन के पक्ष में. दुश्मन एक अच्छी औरत है - स्मृति...

कार्बाइड का कलंक : औरतों की आपबीतियां

स्वाति तिवारी लेखन की कई विधाओं में सक्रिय स्वाति तिवारी मध्यप्रदेश सरकार की एक अधिकारी हैं.   संपर्क : stswatitiwari@gmail.com  ( ३० साल हो गए...

भगवान! ‘एक कटोरा भात खिला दो बस, भारत में भात नहीं मिला’

ज्योति प्रसाद  शोधरत , जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय. सम्पर्क: jyotijprasad@gmail.com स्वर्ग और नरक के बीच भूखी बच्ची वहाँ भी फंस गयी, उम्र 11 साल. क्या...

एफ जी एम / सी यानि योनि पर पहरा

नीलिमा चौहान पेशे से प्राध्यापक नीलिमा 'आँख की किरकिरी ब्लॉग का संचालन करती हैं. संपादित पुस्तक 'बेदाद ए इश्क' प्रकाशित संपर्क : neelimasayshi@gmail.com. नाइजीरिया ने...

समलैंगिकता को मिली सुप्रीम मान्यता: अंतरंगता निजी मामला

राजीव सुमन  नई दिल्ली, 6 सितम्बर : समलैंगिकता की धारा 377 को लेकर चल रहे घमासान पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना अहम फैसला सुना...

काश ! ऐसी पत्नियाँ, बहनें समाज का अधिकतम सच हो जायें!

ज्योति प्रसाद क्या आपको मदर इण्डिया फिल्म का अंतिम दृश्य याद है? क्या आपको राधा, जिसका किरदार हिंदी सिनेमा की अदाकारा नरगिस ने निभाया था,...

जुंको फुरुता: जिसे याद रखना ही होगा

मंजू शर्मा  आज अगर जुंको फुरुता जीवित होती तो 43वाँ जन्मदिन मना रही होती। दु:खद है कि जापानी गुड़िया विश्वस्तरीय प्रसिद्धि पा चुकी है लेकिन जुंको...

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।