क्या ‘महिलायें’ सिर्फ़ ‘पुरुषों’ की जरुरत की वस्तु हैं ??

हिमांशु यादव जर्मन अध्ययन केंद्र ,गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोधरत है. संपर्क :9998780243, 9104676458 Email : yadavhimanshu2642@gmail.com यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। हमारे देश में यह...

रेखा का खत अमिताभ बच्चन के नाम (!): काश, तुम्हारी जिंदगी लंबी के साथ...

आज तुम्हारा जन्मदिन है अमित मुबारक हो जीवन में कुछ इच्छाएं अधूरी रह जाएं, कुछ हसरतें पूरी न हो पाएं तो जीने की ललक बनी रहती...

ब्राह्मणवादियों द्वारा संविधान जलाने पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन

स्त्रीकाल डेस्क  पिछले 9 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर आरक्षण विरोधी अभियान चलाने वाले सवर्णों ने भारतीय संविधान की प्रतियां जला डालीं. और...

न्यायपालिका में यौन शोषण का मामला पहला नहीं है और न्याय नहीं हुआ तो...

समाचार है कि भारत के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अपने खिलाफ़ यौन उत्पीड़न की जाँच, न्यायमूर्ति बोबड़े को सौंप दी है। न्यायमूर्ति बोबड़े ने आंतरिक समिति में, न्यायमूर्ति एन. वी.रमन्ना और इंदिरा बनर्जी को रखने का फैसला लिया है। काश! यह फैसला शनिवार को ही ले लिया गया होता, तो कितना बेहतर होता। किसी को यह नहीं लगता कि मीडिया, सुप्रीम कोर्ट बार या किसी और दबाव-तनाव में लिया फैसला है। खैर... न्यायिक विवेक जागा तो सही, भले ही थोड़ी देर से।

चाहे नरक में दीजो डार

नासिरूद्दीन हैदर खाँ नासिरूद्दीन हैदर खाँ पेशे से पत्रकार हैं और जेंडर जिहाद के संपादक हैं . ( मुसलमानों के बीच स्त्री -पुरुष के...

‘परमाणु ऊर्जा का नकार’ स्त्रियों के लिये इतना मह्त्वपूर्ण क्यों है ?

 भार्गवी दिलीप कुमार शीतयुद्ध के दौरान शान्ति और परमाणु विरोधी आंदोलन स्त्री-अधिकार समूहों ने शुरू किए थे। सैद्धांतिक तौर पर युद्ध और 'मर्दानगी' के...

स्थितियां बनायी गयी थीं, लेकिन उसने ‘हाँ’ कहने से इनकार किया और…

पल्लवी  जब पुरुष ने ऐसी स्थितियां उत्पन्न की, तब स्त्री का 'हाँ' या 'न' अर्थहीन हो गया-और उसी वक्त स्त्री ने 'वस्तु' होने से इनकार...

आत्मकथा नहीं चयनित छविनिर्माण कथा (!)

संजीव चंदन रामशरण जोशी की आत्मकथा  ‘मैं बोनसाई अपने समय का’ में बहुत से प्रसंग छोड़े और एडिट किये गये हैं. स्त्रीकाल में हमने इस...

आमिर खान और उनकी बेटी का अपमान: सिलसिला पुराना है, ट्रॉल्स नये हैं

ज्योति प्रसाद  शोधरत , जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय. सम्पर्क: jyotijprasad@gmail.com   शाहजहाँ-जहांआरा से लेकर आमिर खान और उनकी बेटी तक बाप-बेटी के सहज रिश्तों को लेकर...

सत्ता के शीर्ष से है अपराधियों को संरक्षण: प्रधान सचिव का बयान बड़ा संकेतक

संतोष कुमार  पटना के एक शेल्टर होम में एक नाबालिग लड़की और एक महिला कथित बीमारी से मृत पायी जाती है, जबकि उस शेल्टर होम...

लोकप्रिय

कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।