सो गया साज़ पे सर रख के सहर के पहले: संगीत में एक पुरोधा...

डॉ. श्यामरंग शुक्ल गुसाईं घराने के गायक डा. श्यामरंग शुक्ल अन्नपूर्णा देवी को याद कर रहे हैं.  तारा डूब गया। वह रोशनी रुक गई जो संगीत...

नफरत के खिलाफ “अमन की बातें”: महिलाओं की यात्रा का आज दिल्ली में...

स्त्रीकाल डेस्क  20 सितम्बर 2018 से देश की स्त्रियाँ "बातें अमन की" यात्रा पर हैं. यह यात्रा देश भर में अमन राग बिखेरते हुए अपने...

मेरा एक सपना है ! (मार्टिन लूथर किंग का उद्बोधन,1963)

 मार्टिन लूथर किंग, जूनियर  प्रस्तुति और अनुवाद : यादवेन्द्र    ‘मेरा एक सपना है’, 1963 में वाशिंगटन मार्टिन लूथर किंग, जूनियर द्वारा दिया गया प्रसिद्द भाषाण है, जो उन्होंने...

डॉक्टर मनीषा बांगर ‘वायस ऑफ पीपल’ सम्मान से हुईं सम्मानित !

 राजीव कुमार सुमन    14 सिंतबर 2018 को दिल्ली के माता सुंदरी रोड पर स्थित एवान-ए-गालिब ऑडिटोरियम में पल-पल न्यूज वेब पोर्टल की तरफ से...

मुनिरका से अमेरिका तक: कल्चरल शॉक और द्विध्रुवीय समानता के दृश्य

मुनिरका से अमेरिका तक-यह वाक्य हमेशा आप जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू ) में सुन सकते हैं. मतलब, जेनयू से निकलते ही लोग दो ही...

महाराष्ट्र में बौद्ध विवाह क़ानून: नवबौद्ध कर रहे स्वागत और विरोध

संजीव चंदन महाराष्ट्र की भाजपा सरकार द्वारा हिन्दू विवाह क़ानून से अलग बौद्ध विवाह कानून बनाने की पहल 2015 से ही शुरू हो गयी थी,...

कथित उदार नजरिया भी ब्राह्मणवादी नजरिया है

स्त्रीकाल डेस्क  पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और बहुजन समाज की जानी मानी नेत्री डॉ मनीषा बांगर पिछले दिनों कनाडा के ब्राह्मप्टन शहर...

सांप्रदायिक, जातिवादी, भाषा-वर्चस्ववादी ‘बिहार संवादी’ (दैनिक जागरण का आयोजन) छोड़ गया कई सवाल

अनन्त पटना में आयोजित दैनिक जागरण के ‘बिहार संवादी’ कार्यक्रम को जहां लेखक 'अनंत' साम्प्रदायिक, दलित विरोधी बता रहे हैं, भाषा के सवाल पर वर्चस्ववादी...

छत्तीसगढ़ में दुर्गापूजा आयोजन समिति के खिलाफ केस दर्ज:आदिवासियों की धार्मिक भावना भड़काने का...

नवल किशोर कुमार छत्तीसगढ के कांकेर जिले के पखांजुर थाने में स्थानीय आदिवासी समुदाय के लोगों ने दुर्गापूजा समिति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।...

‘मैं हिन्दू क्यों नहीं’ के लेखक पर हमला, ‘दुर्गा’ के कथित अपमान के आरोप...

स्त्रीकाल डेस्क  हिन्दू भावनाओं के कथित अपमान के आरोप में देश भर में लेखकों, बुद्धिजीवियों पर होने वाले हमलों की कड़ी में कुछ और मामले...
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अम्बेडकर की प्रासंगिकता के समकालीन बयान

महितोश मंडल का कहना है कि विश्वविद्यालयों में दुनिया भर के तमाम चिन्तक पढ़ाए जाते हैं पर अम्बेडकर की सतत अनुपस्थिति और बहिष्करण की राजनीति के पीछे अम्बेडकर के प्रति ब्राह्मणवाद की घृणा है, और यह घृणा दुश्चिंता से उपजी है. दरअसल अम्बेडकर ने हिन्दू धर्म और ब्राह्मण सभ्यता के विरुद्ध कोई आधारहीन शोर-गुल नहीं किया है, बल्कि वे कानून के विद्यार्थी थे और बहुत ही तर्कपूर्ण व प्रासंगिक ढ़ंग से उन्होंने ब्राह्मणवाद की आलोचना प्रस्तुत की है. यदि युवा विद्यार्थी अम्बेडकर के आमूल परिवर्तनवादी विचारों को गंभीरता से पढ़ना शुरू करें, तो अकादमिक जगत से लेकर राजनीति, अर्थव्यवस्था, मीडिया, साहित्य, सिनेमा, और इत्यादि तक फैले राष्ट्र-व्यापी ब्राह्मणवादी साम्राज्य को भयंकर चुनौती मिलेगी.
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