मेरे ख़्वाबों के दूल्हे बनाम शहनाइयां जो बज न सकीं

असीमा भट्ट रंगमंच की कलाकार,सिनेमा और धारवाहिकों में अभिनय, लेखिका संपर्क : asimabhatt@gmail.com ( रंगकर्मी, अभिनेत्री और लेखिका असीमा भट्ट शादी को लेकर अपने ख़्वाबों...

किन्नर से अपने बेटे का विवाह कराने वाली एक दिलेर माँ की कहानी, उसी...

जब मेरे बेटे ने ट्रांसवुमन ईशिता से विवाह के अपने फैसले के बारे में मुझे बताया, तो मैंने अपने सभी रिश्तेदारों को बुलाया और उनसे इस बारे में बात की। उन सभी ने इसपर और तो कोई आपत्ति नहीं जताई, किन्तु औलाद को लेकर ही उनकी आपत्ति थी। फिर मैंने अपने रिश्तेदारों को समझाया कि तुमलोगों की यह बात तो सही है। किन्तु स्त्री-पुरुष में भी शादी होती है, तो किसी-किसी के बाल-बच्चे नहीं होते हैं, तो उस वक्त हम क्या करते हैं! उसे तो समाज भी कुछ नहीं कहता।

‘दिल्ली की नागरिक’ जिसने 15 सालों में दिल्ली को बदल दिया

एक संयोग यह भी है कि जिस इलाक़े में शीला दीक्षित रहती थीं वह निज़ामुद्दीन नाम से दिल्ली में पहचाना जाता है. निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह पर बहुत से लोग हर रोज़ अपनी मिन्नतों को माथा टेकने को कहते हैं और कुछ उनकी दरगाह को मिन्नतों के पुरी होने पर ख़ुशी से चूमने आते हैं. लेकिन यह बात भी दीगर है कि शाहजहाँ की बड़ी बेटी और मुग़ल शहजादी, पादशाह बेग़म जहाँआरा, निज़ामुद्दीन की दरगाह के अंदर ही आराम फरमा रही हैं.

बिहार के 14 संस्थानों में बच्चों का यौन शोषण: रिपोर्ट

रोहिण कुमार  कुछ महीने पहले बिहार सरकार की पहल पर टाटा इंस्टिट्युट ऑफ सोशल साइंसेस (टीआईएसएस या टिस) ने बिहार के बालगृहों का एक सोशल...

वे सब ऊंची जाति की हिन्दू सहेलियां थीं: मेरे मुसलमान होने की पीड़ा

ऐसा मौका कई बार आया जब मेरी एक अन्य सहकर्मी (ब्राहमण) साथ खाना खाने से कतराती रहती थी, कभी खा भी लेती तो मेरे डब्बे से एक निवाला भी न चखती। ये सिलसिला लम्बा चलता रहा। कष्ट किसी को नही था इस बात से, सिवाय मेरे। वक्त गुज़रता गया। दिल की बात जुबान तक आने में ज्यादा वक्त नही लगा। एक दिन उसने कहा गुरूदेव कहते हैं, जैसा खाओगे अन्न वैसा होगा मन….। गायत्री परिवार के श्रीराम शर्मा की भक्ति के शब्द थे ये।

हिन्दी पाठ्यपुस्तकों में स्त्री छवि

कमलानंद झा कमलानंद झा केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिहार में हिन्दी अध्ययन के विभागाध्यक्ष हैं. इन्होने पाठ्यक्रमों की सामाजिकी पर शोध किया है : मोबाइल...

क्या आप छत्तीसगढ़ की पहली महिला सांसद मिनीमाता को जानते हैं?

ज्योति प्रसाद कुछ ही हफ़्ते बाक़ी हैं इस देश के लोकतंत्र के चुनावों में. मीडिया से लेकर देश...

क्या इसे ही जंगलराज कहते है योगी जी

योगी जी इधर आप रोमियो स्क्वैड बना रहे हैं  उधर आपके राज्य के दबंग बलात्कार पीडिता को तेज़ाब पिला रहे हैं. क्या इसी को...

आदिवासियों के मानवाधिकार की लड़ाकू पर रिपब्लिक टीवी का निशाना: यह सत्ता का चारण...

उत्तम कुमार (फेसबुक पोस्ट से)  पीयूसीएल द्वारा 2016 का निर्भीक पत्रकारिता सम्मान लेते समय उन्होंने पुरस्कार स्वरूप प्रशस्ति पत्र और धान के कटोरा पुरस्कार में...

बिहार के दूसरे शेल्टर होम से भी आ रही हैं बुरी खबरें: सीतामढ़ी ...

सुशील मानव    हैवानियत की आग सिर्फ मुज़फ्फ़रपुर में हीं नहीं लगी है। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक़ उत्तरी बिहार में मुजफ्फरपुर के पड़ोस...
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कुछ अल्पविराम

लेडी श्रवण कुमार-भारतीय समाज की इस विडंबना की ओर संकेत किया है जहां पुरूष कोई कार्य करता है तो उसे समाज उसकी सराहना करता है। श्रवण कुमार की सेवा भक्ति का जिक्र हर एक की जुबान पर मिलता है। मगर हमारे देश में महिलाएं सेवाकर्म बरसों से करती आ रहीं हैं। मगर घर-परिवार हो या समाज सबने उसके योगदान को नजरअंदाज किया है।
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